डायरेक्टर नितिन कक्कड़ की फिल्म ‘आवारापन 2’ पुराने दर्द और नए इमोशन को जोड़ती है। इमरान हाशमी की दमदार एक्टिंग, संगीत और भावनात्मक कहानी फिल्म को एक अच्छी थिएटर वॉच बनाते हैं।
करीब दो दशक बाद इमरान हाशमी बतौर शिवम पंडित फिर बड़े पर्दे पर लौटे हैं। 'आवारापन 2' उसी भावनात्मक दुनिया को आगे बढ़ाती है, जिसने पहली फिल्म को समय के साथ एक खास दर्शक वर्ग दिलाया। नितिन कक्कड़ के निर्देशन में बनी यह फिल्म इस बार प्रेम के साथ इंसानियत और एक मासूम बच्ची को बचाने की कहानी लेकर आती है। 14 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई 140 मिनट लंबी फिल्म में इमरान के साथ दिशा पाटनी, शबाना आजमी, पूरन गब्बी, सुविंदर विक्की और विजयंत कोहली नजर आते हैं। क्या सीक्वल पुराने जादू को कायम रख पाता है? काफी हद तक इसका जवाब हां है।
क्या है 'आवारापन 2' की कहानी?
आवारापन 2 की कहानी पहली फिल्म के बाद आगे बढ़ती है, इसलिए इसे देखने से पहले पुरानी फिल्म देख लेना कहानी के भावनात्मक संदर्भ को समझने में मदद करेगा। शिवम पंडित आज भी आलिया की यादों से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाया है। एक दिन आलिया की कब्र पर जाने के दौरान शिवम को एक नवजात बच्ची के रोने की आवाज सुनाई देती है। वह बच्ची को अनाथालय पहुंचाता है और उसका नाम आलिया रख देता है। धीरे-धीरे शिवम की जिंदगी में यह बच्ची एक बेहद खास जगह बना लेती है। वह अनाथालय की मदद करता है और आलिया के साथ उसका रिश्ता गहराता जाता है। कहानी तब गंभीर मोड़ लेती है, जब एक दंपती बच्ची को गोद ले लेता है और बाद में शिवम को पता चलता है कि वह मानव तस्करी के जाल में फंस चुकी है। इसके बाद शिवम उसे खोजने और बचाने के मिशन पर निकलता है।
यह भी पढ़ें :Batwara 1947 Vs Awarapan 2: 19 साल पहले जब BO पर भिड़े थे सनी देओल-इमरान हाशमी, कौन पड़ा था भारी?
आवारापन 2' में इमरान हाशमी की एक्टिंग कैसी है?
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इमरान हाशमी हैं। शिवम पंडित के किरदार में उनकी वापसी सिर्फ पुराने किरदार को दोहराने जैसी नहीं लगती। उनकी बॉडी लैंग्वेज, लंबे बाल और आंखों के भाव किरदार के भीतर जमा दर्द और अकेलेपन को उभारते हैं। शबाना आजमी कम स्क्रीन टाइम में भी अपनी छाप छोड़ती हैं। पूरन गब्बी अपनी बॉडी लैंग्वेज और अभिनय से ध्यान खींचते हैं। दिशा पाटनी को सिर्फ ग्लैमर के लिए इस्तेमाल नहीं किया गया और वह अपने किरदार के साथ न्याय करती हैं। सुविंदर विक्की और विजयंत कोहली समेत बाकी कलाकार भी कहानी को सपोर्ट करते हैं।

नितिन कक्कड़ का डायरेक्शन कैसा है?
डायरेक्टर नितिन कक्कड़ फिल्म की भावनात्मक जमीन को लगातार बनाए रखते हैं। कहानी को सिर्फ पुरानी आवारापन की लोकप्रियता के सहारे आगे बढ़ाने के बजाय उन्होंने शिवम के अतीत को नई परिस्थिति से जोड़ा है। निर्देशन की अच्छी बात यह है कि भावनाओं को अलग से चिपकाए गए सीन्स की तरह पेश नहीं किया गया। फिल्म में पहली आवारापन की यादों का इस्तेमाल भी किया गया है। पुरानी घटनाओं की झलकियां शिवम के अतीत को समझने में मदद करती हैं और सीक्वल को पिछली कहानी से जोड़ती हैं। हालांकि फिल्म पूरी तरह परफेक्ट नहीं है। कुछ जगहों पर कहानी थोड़ी धीमी महसूस होती है और एडिटिंग में अतिरिक्त कसावट होती तो इसकी रफ्तार और बेहतर हो सकती थी।
कैसा है 'आवारापन 2' का म्यूजिक?
आवारापन 2 का संगीत फिल्म के नैरेटिव से अलग खड़ा नहीं होता। गाने कहानी के बीच अचानक लगाए गए ब्रेक की तरह महसूस नहीं होते, बल्कि किरदारों की भावनाओं और परिस्थितियों के साथ जुड़े हुए नजर आते हैं। खासकर फिल्म का इमोशनल टोन बनाए रखने में संगीत अहम भूमिका निभाता है। शिवम के दर्द, उसकी यादों और बच्ची के साथ बनते रिश्ते को संगीत अतिरिक्त भावनात्मक परत देता है। टेक्निकल स्तर पर फिल्म का काम संतुलित है। दृश्य प्रभावों का इस्तेमाल जरूरत के मुताबिक सीमित रखा गया है। जहां कहानी को इसकी जरूरत पड़ती है, वहां VFX प्रभावी नजर आता है और फिल्म पर हावी नहीं होता।
यह भी पढ़ें : Toxic Runtime: यश की 'टॉक्सिक' कितनी लंबी? CBFC सर्टिफिकेट ने खोला रनटाइम का राज
क्यों देखें 'आवारापन 2'?
आवारापन 2 कोई दोषरहित सीक्वल नहीं है, लेकिन इसमें भावनात्मक पकड़ जरूर है। इमरान हाशमी का शिवम पंडित के रूप में प्रभाव, कहानी का मानवीय पक्ष, संगीत और पहली फिल्म से जुड़ा नॉस्टेल्जिया इसे सिनेमाघर में देखने लायक बनाते हैं। हमारी ओर से इस फिल्म को 5 में से 3.5 स्टार।
