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Bihar Chunav 2025: वो सुपरस्टार, जिसने दो बार ठुकराया बिहार के मुख्यमंत्री का पद!
बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण की वोटिंग के लिए प्रत्याशी जान झोंक रहे हैं। बिहार वह प्रदेश है, जिसने कई ऐसे एक्टर दिए हैं जो आगे चलकर राजनेता भी बने। लेकिन एक एक्टर ऐसा भी, जिसे दो बार बिहार के मुख्यमंत्री का पद ऑफर हुआ था।

कौन है वो सुपरस्टार, जिसे मुख्यमंत्री का पद ऑफर हुआ था
हम बात कर रहे हैं शत्रुघ्न सिन्हा, जो बॉलीवुड के दिग्गज स्टार हैं। उनका जन्म 16 जुलाई 1946 को पटना में हुआ था। फिल्मों में काम करते हुए उन्हें 6 दशक से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, जबकि 3 दशक से ज्यादा का वक्त वे राजनीति में दे चुके हैं। उनकी मानें तो उन्हें दो बार बिहार के मुख्यमंत्री का पद ऑफर किया गया था।
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राजनीति के कब हुई शत्रुघ्न सिन्हा की एंट्री
शत्रुघ्न सिन्हा ने 1992 में राजनीति में एंट्री ली थी। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा और अपने दोस्त राजेश खन्ना के खिलाफ उपचुनाव लड़ा। यह चुनाव शत्रु 25 हजार वोटों से जीत गए थे। लेकिन इस प्रतिद्वंद्विता ने दोनों दोस्तों के बीच खटास ला दी थी। राजेश खन्ना ने बाद में कभी शत्रुघ्न सिन्हा से बात नहीं की।
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केन्द्रीय मंत्री बनने वाले पहले बॉलीवुड स्टार शत्रुघ्न सिन्हा
शत्रुघ्न सिन्हा जुलाई 2002 से मई 2004 के बीच अटल बिहारी वाजपयी की सरकार में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री रहे। बाद में वे जहाजरानी मंत्री भी रहे।वे पहले फिल्म स्टार थे, जिन्हें केंद्र में मंत्री बनाया गया था।
2013 में भाजपा से उचटने लगा था शत्रुघ्न सिन्हा का मन
2013 तक लगभग सब ठीक चल रहा था। लेकिन इसी समय केंद्र की राजनीति में नरेन्द्र मोदी की एंट्री हुई और 2014 के चुनाव के लिए उन्हें प्रधानमंत्री का चेहरा बनाया गया। शत्रुघ्न सिन्हा चाहते थे कि लाल कृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री बनाया जाए। उन्होंने यह भी कहा था कि आडवाणी जैसे अनुभवी नेता को साइडलाइन नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, बाद में उन्होंने यह दावा भी किया था कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा 300 से ज्यादा सीटें जीतेगी। जब फाइनल आंकड़ा आया तो BJP ने 282 सीटें जीतीं और गठबंधन के सदस्यों को मिलाने के बाद NDA की कुल सीटें 336 हो गईं और मोदी प्रधानमंत्री बन गए।
मोदी कैबिनेट में जगह ना मिलने पर निराश हुए थे श्रतु
2014 में जब पीएम मोदी ने अपने 24 कैबिनेट मंत्रियों का ऐलान किया तो उनमें पटना साहिब से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा का नाम नहीं था। इसके बाद से कयास लगाए जाने लगे कि मोदी और शत्रु के बीच मनमुटाव है। रजत शर्मा ने ‘आप की अदालत’ में जब शत्रु से पूछा कि उन्हें मंत्रीपद क्यों नहीं दिया गया तो उन्होंने इसे प्रधानमंत्री का फैसला बताया और साफ़ कहा कि वे आगे से आकर मंत्री पद नहीं मांगेंगे। लेकिन पद ऑफर किया जाएगा तो इसे ठुकराएंगे भी नहीं।
शत्रु ने दो बार ठुकराया बिहार के मुख्यमंत्री का पद?
बाद में कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि नरेन्द्र मोदी और शत्रुघ्न सिन्हा के बीच तनाव की असली वजह सिन्हा की आडवाणी के साथ नादीकियां हैं। उस वक्त शत्रुघ सिन्हा ने दावा किया था कि आडवाणी ने उन्हें दो बार बिहार के मुख्यमंत्री का पद ऑफर किया था। लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया था। उनके मुताबिक़, बाद में उन्होंने अपनी वफादारी की कीमत चुकाई। उन्होंने तो यह दावा तक किया था कि वे इस नतीजे के बारे में पहले से जानते थे।
मोदी कैबिनेट में क्यों नहीं मिली शत्रु को जगह?
जुलाई 2015 में वरिष्ठ पत्रकार योगेश नायक ने इंटरव्यू में जब उनसे सवाल किया कि क्या बदले की भावना से उन्हें मोदी कैबिनेट में जगह नहीं मिली तो उन्होंने कहा था, "अनुपम खेर का शो है 'कुछ भी हो सकता है।'लेकिन मैं शिकायत नहीं कर रहा। आखिरकार यह प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है। मैं बस यही उम्मीद और कामना करता हूं कि यह किसी मकसद से ना हुआ हो। मुझे उम्मीद है कि मुझे किसी बात की सजा नहीं मिली। मैं कैबिनेट मंत्री रहा हूं। फिल्म इंडस्ट्री से पार्टी में शामिल होने वाला पहला व्यक्ति हूं, हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से कैबिनेट मंत्री बनने वाला पहला व्यक्ति। कई बार मुझे लगता है कि मैं बिहार के दिल से हूं और तमाम मुश्किलों के बावजूद जीता हूं। क्या जो दिखता है, उससे भी बढ़कर कुछ है?उम्मीद करता हूं कि ऐसा ना हो।"
अब तृणमूल कांग्रेस के सांसद हैं शत्रुघ्न सिन्हा
2019 में शत्रुघ्न सिन्हा भारतीय जनता पार्टी का दामन छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए। 2022 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा और आसनसोल लोक सभा सीट से उपचुनाव जीतकर सांसद बने। 2024 में वे एक बार फिर इसी सीट से लोकसभा सांसद चुने गए।
नोट : शत्रुघ्न सिन्हा की राजनीतिक यात्रा की यह कहानी दिग्गज लेखक राशिद किदवई की किताब ‘नेता अभिनेता : बॉलीवुड स्टार पावर इन इंडियन पॉलिटिक्स’ में बताई गई है।
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