Hema Malini Dharmendra Shadi Controversy: धर्मेंद्र ने 1980में  पहली पत्नी प्रकाश कौर को तलाक दिया बिना हेमा मालिनी से दूसरी शादी की थी। उन पर धर्म परिवर्तन के आरोप लगे थे। कांग्रेस ने उन्हें जमकर घेरा था। पढ़िए क्या था वो पूरा विवाद… 

हेमा मालिनी ने जहां अपनी शानदार अदाकारी और खूबसूरती के दम पर ड्रीम गर्ल के रूप में पहचान बनाई तो वहीं उनकी जिंदगी में कुछ ऐसे मौके भी आए, जब वे विवादों में घिर गईं। ऐसा ही एक मौका था उनकी शादी का। शादीशुदा धर्मेन्द्र से जब उन्होंने शादी की तो इस मुद्दे ने उनका कभी पीछा नहीं छोड़ा। 2 मई 1980 को हेमा मालिनी और धर्मेन्द्र ने शादी की। धर्मेन्द्र ने पहली पत्नी प्रकाश कौर को तलाक दिए बिना हेमा से दूसरी शादी की, जो हिंदू मैरिज एक्ट के तहत के तहत अवैध थी। शादी के 24 साल बाद इस मुद्दे ने जमकर उस वक्त तूल पकड़ा, जब धर्मेन्द्र ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामकर लोकसभा चुनाव लड़ा। कांग्रेस ने उनकी दूसरी शादी को लेकर उन्हें जमकर घेरा था।

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कांग्रेस ने धर्मेन्द्र को निशाने पर लिया था

2004 में यह बात रोशनी में आई कि 1979 में धर्मेन्द्र और हेमा दोनों ने इस्लाम धर्म अपनाकर शादी की थी, जिसमें एक से ज्यादा शादी करने पर कोई पाबंदी नहीं है। दावा यह तक किया गया कि मुस्लिम रिवाज़ से शादी के लिए धर्मेन्द्र ने अपना नाम दिलावर और हेमा ने अपना नाम आयशा बी रख लिया था। कहा यह भी गया कि बाद में धर्मेन्द्र-हेमा ने अयंगर रीति-रिवाजों से दूसरी शादी की। 2004 में धर्मेन्द्र ने जब लोकसभा चुनाव के दौरान अपना नॉमिनेशन भरा तो कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उन्होंने सिर्फ अपनी पहली पत्नी प्रकाश कौर की संपत्ति का जिक्र किया था, दूसरी पत्नी हेमा का नहीं। 24 साल बाद भी हेमा और धर्मेन्द्र की शादी सवालों के घेरे में थी।

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हेमा मालिनी ने विवाद पर क्या कहा था?

राम कमल मुखर्जी की किताब 'हेमा मालिनी : बियॉन्ड द ड्रीम गर्ल' में हेमा मालिनी ने कांग्रेस के आरोपों को लेकर कहा था, "जब कोई बड़ा करने निकलता है तो कुछ लोग उसे पीछे धकेलने की कोशिश करते हैं। लेकिन मुझे उम्मीद है कि वे (धर्मेन्द्र) कामयाब होंगे।" जब हेमा से पूछा गया कि धर्मेन्द्र ने हलफनामे में उन्हें अपनी दूसरी पत्नी क्यों नहीं बताया? तो उन्होंने कहा, "यह हमारे बीच का निजी मामला है। और हम इसे आपस में सुलझा लेंगे। किसी और को इस बारे में परेशान होने की जरूरत नहीं है।" हालांकि, बात यहीं ख़त्म नहीं हुई। कांग्रेस ने हेमा मालिनी पर अपने नाम और धर्म की गलत जानकारी देने का आरोप लगाया और उनका राज्यसभा का नामांकन रद्द करने की मांग की।

हेमा ने इस आरोपों पर अपना बचाव किया और कहा था, "इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। इसके अलावा मुझे कुछ नहीं कहना। यह कम्पटीशन है और जाहिरतौर पर हर पार्टी खुद को बेहतर बताने की कोशिश करेगी। मैं तीन साल से चुनाव प्रचार कर रही हूं और मुझे नहीं लगता कि आज भी कुछ बदला है।"

धर्मेन्द्र ने बताई थी धर्म बदलने की ख़बरों की सच्चाई!

धर्मेन्द्र ने उसी समय शादी के लिए इस्लाम अपनाने और नाम बदलने की ख़बरों पर सफाई देते हुए कहा था, "ये आरोप पूरी तरह गलत हैं। मैं उस तरह का इंसान नहीं हूं, जो अपने फायदे के लिए धर्म बदल ले।" जब धर्मेन्द्र से कांग्रेस के आरोपों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा था, "अगर इस आरोप में कोई सच्चाई है तो किसी को इसे सबूत के साथ साबित करने दो। अगर झूठ है तो जनता को फैसला करने दो।" धर्मेन्द्र ने इस दौरान कांग्रेस पर उन्हें बदनाम करने का आरोप लगाया था। इस आम चुनाव में धर्मेन्द्र राजस्थान के बीकानेर से लड़े थे और उन्होंने 57175 वोटों से जीत दर्ज की थी।