मलयालम फिल्म इंडस्ट्री 1 जून से सभी गतिविधियां बंद करने का ऐलान किया है। बढ़ते खर्च और घटते मुनाफे के कारण फिल्म निर्माताओं ने ये कदम उठाया है। फिल्मों के निर्माण में आने वाली लागत और अभिनेताओं की फीस प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।

एंटरटेनमेंट डेस्क, malayalam film industry shutdown । साउथ इंडस्ट्री में मलयालम सिनेमा का बड़ा हिस्सा होता है। यहां कई बड़े स्टार हैं, जिनकी पूरे देश में फैन फॉलोइंग है। अब इस इंडस्ट्री के टॉप मेकर ने मिलकर एक बड़ा फैसला किया है। उन्होंने गुरुवार 6 फरवरी ये अपील की है कि 1 जून से फिल्मों की शूटिंग और स्क्रीनिंग सहित सभी फिल्मी गतिविधियों को पूरी तरह से बंद किया जाएगा । मलयालम फिल्म मेकर जी.सुरेश कुमार ने ऐलान करते हुए कहा कि ये इंडस्ट्री पहले से ही मंदी में है और बॉक्स ऑफिस पर एक के बाद एक फिल्में फ्लॉप हो रही हैं, जिससे मेकर बहुत बड़े घाटे के बाद असमंजस में हैं।

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मलयालम फिल्म मेकर ने सरकार पर साधा निशाना

नेशनल अवार्ड विनर कीर्ति सुरेश के पिता सुरेश कुमार ने कहा, "ऐसी कोई इंडस्ट्री नहीं है जिस पर 30 प्रतिशत कर लगाया जा रहा है, इसमें एडीशनल एंटरटेनमेंट टैक्स के अलावा जीएसटी भी शामिल है। सरकार को इसपर फिर से विचार करना चाहिए ।

प्रोड्यूसर के लिए आसान नहीं रह गया फिल्म बनाना

सुरेश कुमार ने आगे कहा कि,"एक्टर्स और अन्य दूसरे टेक्नीशिएन का पारिश्रमिक पहले के मुकाबले इतना बढ़ गया है । और इसे कम करना होगा। एक फिल्म की कॉस्ट का 60 प्रतिशत हिस्सा एक्टर्स की फीस में चला जाता है, जिसकी वजह से मेकर का मूवी बना मुश्किल होता जा रहा है। अब हम बिना एक्टर्स के तो फिल्म नहीं बना सकते हैं। वहीं एक्टर्स को इसकी कोई चिंता नहीं है, और हम इस तरह से आगे नहीं बढ़ सकते हैं।

एक्टर्स के होम प्रोडक्शन का नहीं करेंगे सपोर्ट

सुरेश ने कहा, "अब तो नए एक्टर्स भी मोटी फीस लेते हैं और डायरेक्टर ने भी अपनी फीस में अनाप-शनाप बढ़ोतरी की है। एक फिल्म जो 50 दिनों में खत्म हो सकती है, उसके लिए 150 दिन लग जाते है। एक्टर्स जितनी फीस वसूलते हैं, उसकी तुलना में सिनेमाघरों से 10 प्रतिशत भी नहीं वसूला जाता है। वहीं अब हम एक्टर्स द्वारा निर्मित फिल्मों के साथ सपोर्ट नहीं करेंगे।"