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Rajpal Yadav करें सरेंडर नहीं तो..., हाईकोर्ट के आदेश के बाद एक्टर की बढ़ी मुश्किलें
दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा राजपाल यादव को 4 फरवरी तक संबंधित जेल अधीक्षक के समक्ष सरेंडर करने का निर्देश दिया गया है। इससे पहले उन्होंने सरेंडर की समय सीमा बढ़ाने के लिए आवेदन किया था, लेकिन कोर्ट ने उनकी पिटीशन खारिज कर दी है।

बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव उस समय सुर्खियों में आए जब खबर आई कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें चेक बाउंस के मामलों में सरेंडर करने को कहा है। समाचार एजेंसी एएनआई के ताजा अपडेट के मुताबिक, राजपाल यादव ने इसके लिए टाइम लिमिटेशन बढ़ाने के लिए याचिका दायर की है, लेकिन दिल्ली उच्च न्यायालय ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उन्हें राहत देने का कोई वाजिब आधार नहीं है।
राजपाल यादव चेक बाउंस मामला
2 फरवरी को राजपाल को बुधवार (4 फरवरी) को शाम 4 बजे तक सरेंडर करने का निर्देश दिया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, यादव के वकील ने बताया कि एक्टर ने 50 लाख रुपये का इंतजाम कर लिया है और इसलिए पेमेंट के लिए एक वीक का एडीशनल टाइम उसे दिया जाए।
हालांकि, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सरेंडर के लिए राजपाल की समय बढ़ाने की अभिनेता की अर्जी खारिज कर दी और कहा कि यहां रिलीफ देने का कोई ठोस आधार नहीं दिया गया है। न्यायाधीश ने कहा, “मैंने उसी दिन इन दलीलों को खारिज कर दिया था और आपको आत्मसमर्पण के लिए दो दिन का टाइम दिया था। मुझे नहीं लगता कि इसका कोई आधार है। आपको एक फिक्स डे पर सरेंडर करना था, लेकिन आपको दो दिन का समय दिया गया क्योंकि आपने कहा था कि आप मुंबई में हैं। लेकिन अब आत्मसमर्पण करना होगा।”
राजपाल बार-बार अदालत के आदेशों और निर्देंशों का पालन करने में विफल रहा है, अदालत ने कहा, “उसने अतीत में कम से कम 15-20 बार ऐसा किया है। उसके आचरण के बारे में पिछले आदेश में लिखा गया है। हालांकि इसके बाद भी उन्होंने किसी भी आदेश या कमिटमेंट का पालन नहीं किया है… मुझे नहीं लगता कि अब उसके प्रति किसी भी प्रकार की नरमी बरतने का कोई आधार है।”
अदालत के मुताबिक एक्टर का विहेवियर निंदनीय है क्योंकि उन्होंने शिकायतकर्ता, मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को पेमेंट देने के अपने वायदे का बार-बार उल्लंघन किया। उन पर लगे सात मामलों में से प्रत्येक में उन्हें 1.35 करोड़ रुपये का पेमेंट करना था और अदालत ने निर्देश दिया कि हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास पहले से जमा राशि शिकायतकर्ता को दी जाए।
अक्टूबर 2025 में, रजिस्ट्रार जनरल के पास 75 लाख रुपये के दो डिमांड ड्राफ्ट (डीडी) जमा किए गए थे और 9 करोड़ रुपये की राशि अभी भी बाकि है। आदेश में यह उल्लेख किया गया है। अदालत का यह आदेश यादव और उनकी पत्नी द्वारा दायर revision petitions पर आया है, जिसमें उन्होंने सेशन कोर्ट के 2019 के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसने अप्रैल 2018 में चेक बाउंस मामलों में मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखा था।
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