धुरंधर: द रिवेंज में जमील जमाली का किरदार अंडरकवर भारतीय एजेंट के रूप में सामने आता है। यह ट्विस्ट कहानी को नया मोड़ देता है। क्या आप जानते हैं जमील जमाली का किरदार पाकिस्तान के एक पॉलिटिशियन से इंस्पायर्ड है। आखिर कौन है वो शख्स, जानते हैं। 

Dhurandhar 2 jameel jamali: 'धुरंधर' के फर्स्ट पार्ट में जमील जमाली का किरदार बेहद साधारण और बैकग्राउंड में रहने वाला दिखाया गया था। उस पर किसी को शक नहीं हुआ, न ही दर्शकों ने उसे एक खतरनाक विलेन माना। वह बस एक ऐसे शख्स के रूप में सामने आया, जो सबके साथ घुल-मिल जाता है और बिना ज्यादा असर छोड़े कहानी में मौजूद रहता है। लेकिन धुरंधर 2 में जमील जमाली के किरदार ने एक अलग ही छाप छोड़ी है। इस रोल को वेटरन एक्टर राकेश बेदी ने बखूबी पर्दे पर उतारा है। ये किरदार जिस शख्स से प्रेरित है, उसने खुद सामने आकर रोल के बारे में काफी कुछ कहा है। 

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धुरंधर: द रिवेंज में दिखा जमील जमाली का असली चेहरा

धुरंधर: द रिवेंज में जमील जमाली के किरदार को पूरी तरह बदल दिया गया है। यहां जमील जमाली एक गहरे रहस्य से जुड़ा हुआ शख्स निकलता है। वह कराची में काम करने वाला एक अंडरकवर भारतीय एजेंट होता है। वह आर. माधवन द्वारा निभाए गए अजय सान्याल के अंडर काम करता है। यह ट्विस्ट और भी ज्यादा दिलचस्प इसलिए हो जाता है क्योंकि रणवीर सिंह के किरदार हमजा को इसकी बिल्कुल भी जानकारी नहीं होती।

राकेश बेदी की दमदार परफॉर्मेंस

राकेश बेदी ने इस किरदार को इतनी गहराई और परतों के साथ निभाया है कि अब इस रोल में किसी और को सोचना भी मुश्किल लगता है। उनकी एक्टिंग ने जमील जमाली को एक यादगार और प्रभावशाली किरदार बना दिया है।

पाकिस्तान के इस शख्स से प्रेरित है जमील जमाली का रोल

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस किरदार की प्रेरणा पाकिस्तान के एक असली राजनेता नबील गबोल से ली गई है। इस खुलासे ने फिल्म के आसपास और ज्यादा चर्चा और रहस्य पैदा कर दिया। नबील गबोल खुद सामने आए और उन्होंने माना कि फिल्म का किरदार उनसे प्रेरित है। लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि फिल्म में दिखाया गया चित्रण उनकी असल जिंदगी से मेल नहीं खाता। उन्होंने खासतौर पर कराची के ल्यारी इलाके को आतंकवादियों का गढ़ दिखाने पर कड़ा विरोध जताया और इसे पूरी तरह गलत बताया।

बयान जिसने बहस को और बढ़ाया

एक वायरल वीडियो में नबील गबोल ने तंज कसते हुए कहा कि अगर कोई एजेंट सच में उनके सामने आ जाए, तो उसका अंजाम क्या होगा, यह सोचना मुश्किल नहीं है। उनका यह बयान काफी तीखा माना जा रहा है और इसने फिल्म को लेकर चल रही बहस को और भी बढ़ा दिया है।

क्रिएटिव लिबर्टी या गलत चित्रण?

अब सवाल यही है कि इसे फिल्म की ‘क्रिएटिव लिबर्टी’ माना जाए या फिर गलत तरीके से किया गया चित्रण। लेकिन एक बात साफ है — जमील जमाली का किरदार अब सिर्फ एक फिल्मी किरदार नहीं रहा, बल्कि उसने अपनी छाप सिनेमाघरों से बाहर भी छोड़ दी है।