दिलजीत दोसांझ और अभिजीत दिपके के बीच विवाद की शुरुआत एक बयान से हुई, लेकिन दिल्ली कॉन्सर्ट में दिलजीत के जवाब और दिपके की पोस्ट ने मामले को नया मोड़ दे दिया।

पंजाबी सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ इन दिनों अपने एक बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। मामला जून 2026 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन से शुरू हुआ था। NEET पेपर लीक और युवाओं की बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर चल रहे इस आंदोलन से दूरी बनाने वाले दिलजीत को CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने निशाने पर लिया था। अब 30 अक्टूबर को दिल्ली में हुए अपने कॉन्सर्ट में दिलजीत ने इस पूरे विवाद पर जवाब दिया। इसके बाद अभिजीत ने भी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर अपना पक्ष रखा। आइए जानते हैं कि आखिर यह विवाद कैसे शुरू हुआ और दोनों ने क्या-क्या कहा।

दिलजीत दोसांझ ने CJP प्रोटेस्ट पर क्या कहा था?

इस विवाद की शुरुआत जून 2026 में हुई थी। दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े युवा NEET पेपर लीक, परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान एक फैन ने इंस्टाग्राम लाइव पर दिलजीत से पूछा कि क्या वह इस आंदोलन में शामिल होंगे या इस पर अपनी राय देंगे। इस सवाल पर दिलजीत ने राजनीति और विरोध प्रदर्शनों से दूरी बनाने की बात कही थी। उन्होंने कहा था,

भाई, मुझे विरोध-प्रदर्शन जैसी चीजों से दूर ही रखो। भाई, मैं एक कलाकार हूं। मैं कोई नेता थोड़ी हूं। जिंदगी में हर चीज कभी ठीक नहीं हो सकती। इस दुनिया में सब कुछ ठीक नहीं हो सकता।

इसके बाद उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब की एक पंक्ति भी कही थी, जिसका भाव था कि पूरा संसार दुखी है और वही सुखी है जिसका आधार ईश्वर का नाम है।

अभिजीत दिपके ने दिलजीत पर क्यों उठाए सवाल?

दिलजीत के इस जवाब से CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके नाराज बताए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश के युवा NEET पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, तब लोकप्रिय हस्तियां चुप क्यों हैं? दिपके ने दिलजीत के कलाकार होने वाले तर्क पर भी सवाल किया। उनका कहना था कि जब किसी कलाकार की फिल्म या काम विवादों में घिरता है, तब उसे जनता के समर्थन की जरूरत पड़ती है, लेकिन जब युवाओं के मुद्दों पर बोलने की बात आती है तो वही कलाकार तटस्थ रहना चाहते हैं।

दिपके ने दिलजीत की फिल्म 'सतलुज' का संदर्भ देते हुए भी उनकी आलोचना की थी। उनका इशारा इस बात की ओर था कि कलाकारों और दर्शकों का रिश्ता सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर भी उनकी जिम्मेदारी बनती है। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, दिपके ने कहा था,

आना पड़ता है ब्रो... नहीं तो आपकी फिल्में बैन हो जाती हैं।

'सतलुज' को लेकर क्या हुआ था विवाद?

इस पूरे मामले में दिलजीत की फिल्म 'सतलुज' का जिक्र भी अहम है। यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और काम पर आधारित है। खालड़ा ने 1980 के दशक के आखिरी वर्षों और 1990 के शुरुआती दौर में पंजाब में कथित गैरकानूनी हत्याओं और गुप्त अंतिम संस्कारों के मामलों को सामने लाने का काम किया था। फिल्म पहले 'पंजाब 95' नाम से बनाई गई थी और सेंसर से जुड़ी अड़चनों के कारण लंबे समय तक रिलीज नहीं हो सकी। बाद में यह 3 जुलाई को जी5 पर आई, लेकिन दो दिन के भीतर प्लेटफॉर्म से हटा दी गई। CJP के विरोध प्रदर्शन के दौरान मंच से 'सतलुज' को लेकर कथित तौर पर मजाक किए जाने की बात सामने आई थी। यही वजह रही कि बाद में दिलजीत ने अपने कॉन्सर्ट में इस फिल्म का जिक्र करते हुए आलोचकों को जवाब दिया।

दिल्ली कॉन्सर्ट में दिलजीत दोसांझ ने क्या जवाब दिया?

30 अक्टूबर को दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में अपने औरा इंडिया टूर के पहले शो के दौरान दिलजीत ने इस विवाद पर खुलकर बात की। उन्होंने सीधे किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी बातों को CJP और उनके आलोचकों से जोड़कर देखा गया। दिलजीत ने कहा,

मैं आप सभी से प्यार करता हूं, क्योंकि मैं एक कलाकार हूं भाई। मैं चुप हूं, तो मुझे चुप ही रहने दो। मैं आप सभी का समर्थन करता हूं। लेकिन पंजाबियों को यह मत सिखाओ कि लड़ाइयां कैसे लड़ी जाती हैं।

इसके बाद उन्होंने 'सतलुज' का बचाव करते हुए कहा,

जिस फिल्म का आप मंच पर मजाक उड़ा रहे हैं, वह जसवंत सिंह खालड़ा की फिल्म है। उस फिल्म के लिए हमने लंबे समय तक लड़ाई लड़ी है। मैं आप सभी से प्यार करता हूं। अगर कोई हमसे नफरत करता है, तो भी ठीक है, लेकिन मैं आप सभी से प्यार करता हूं।

दिलजीत के जवाब के बाद अभिजीत दिपके ने क्या कहा?

दिलजीत के कॉन्सर्ट में दिए गए जवाब के बाद अभिजीत दिपके ने इंस्टाग्राम पर एक लंबा नोट साझा किया। उन्होंने दिलजीत को 'पाजी' कहकर संबोधित किया और बताया कि जून में उनके बयान से उन्हें व्यक्तिगत तौर पर दुख पहुंचा था। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि उनके मन में दिलजीत के लिए कोई निजी दुश्मनी नहीं है। दिपके ने लिखा,

पाजी, जून में जब हम विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, तब आपकी टिप्पणी से मुझे थोड़ा दुख हुआ था। ऐसा नहीं था कि मेरे मन में आपके खिलाफ कुछ था, बल्कि मैंने हमेशा आपको ऐसे व्यक्ति के रूप में देखा है जो मुद्दों के लिए आवाज उठाता है, जैसा कि आपने खुद भी कहा है।

उन्होंने आगे लिखा,

अगर कुछ है, तो मैं हमेशा से आपका प्रशंसक रहा हूं और यह बात आज भी नहीं बदली है। मैं आज भी आपका संगीत सुनता हूं। दरअसल, भारत लौटने से ठीक पहले इस साल मई में मैं शिकागो में आपके कॉन्सर्ट में आया था। मैं सिर्फ आपके संगीत के लिए नहीं, बल्कि आपके व्यक्तित्व के प्रति गहरे सम्मान की वजह से भी वहां था। आपका साहस, आपकी सच्चाई और अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए भारत को वैश्विक मंच तक ले जाने का आपका अंदाज ऐसी बातें हैं, जिनकी मैंने हमेशा प्रशंसा की है। शायद इसीलिए आपकी टिप्पणी से मुझे थोड़ा दुख हुआ, क्योंकि मैंने आपको हमेशा बहुत ऊंचे स्थान पर रखा है।

आखिर में दिपके ने लिखा,

लेकिन एक असहमति या गलतफहमी से मेरे मन में आपके लिए सम्मान और प्रशंसा कम नहीं हो जाती। बाकी पाजी, छोटे भाई की तरह समझकर इस बात को यहीं खत्म कर दीजिए। और आखिर में मैं बस इतना कहना चाहूंगा- ‘गबरू ता वैरी नूं वी मिठा बोलदा, नी तू ता फेर जट्ट दा प्यार गोरीए।’

अब देखना यह है कि दोनों के बीच का यह विवाद यहीं थमता है या आगे कोई और बयानबाजी होती है।