थलापति विजय की आखिरी फिल्म मानी जा रही 'जन नायकन' पॉलिटिकल एक्शन ड्रामा है, जिसमें इमोशन, मास एंटरटेनमेंट, दमदार एक्शन का मिश्रण देखने को मिलता है। पढ़ें रिव्यू।

करीब 34 साल तक तमिल सिनेमा पर राज करने वाले थलापति विजय की आखिरी फिल्म मानी जा रही 'जन नायकन' आखिरकार सिनेमाघरों में पहुंच गई है। एच. विनोद के निर्देशन में बनी यह पॉलिटिकल एक्शन ड्रामा सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि विजय के लंबे सिनेमाई सफर का जश्न भी है। फिल्म में महिलाओं के सशक्तिकरण, राजनीति, एक्शन और इमोशन को एक कमर्शियल पैकेज में पेश किया गया है। विजय के साथ पूजा हेगड़े, बॉबी देओल, ममिता बैजू और कई अनुभवी कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आते हैं। जानिए कहानी, एक्टिंग, निर्देशन, संगीत और तकनीकी स्तर पर यह फिल्म कितनी मजबूत साबित होती है।

क्या है 'जन नायकन' की कहानी?

फिल्म की कहानी महिलाओं के सशक्तिकरण के विषय को केंद्र में रखती है। विजय इसमें थलापति वेत्री कोंडन के किरदार में हैं, जो विजय लक्ष्मी उर्फ़ विजी ( ममिता बैजू) के संरक्षक हैं। पहले हिस्से में दोनों के भावनात्मक रिश्ते को मजबूती से स्थापित किया गया है, वहीं बॉबी देओल के खतरनाक किरदार अमरीश पुजारी उर्फ़ जॉन हैमलार की एंट्री कहानी में तनाव पैदा करती है। इंटरवल के बाद कहानी एक लंबे फ्लैशबैक में जाती है, जहां थलापति वेत्री कोंडन और अमरीश पुजारी पुलिस अधिकारी के रूप में नजर आते हैं। एक घटना के बाद अमरीश खलनायक बन जाता है और थलापति एक ऐसे अपराध में फंस जाता है, जो उसने किया ही नहीं। वर्तमान में लौटने के बाद कहानी आधुनिक हथियारों, रोबोटिक तकनीक और बड़े राजनीतिक षड्यंत्र के खिलाफ थलापति की लड़ाई के साथ आगे बढ़ती है। हालांकि फिल्म के पहले हिस्से में कुछ हिस्से नंदमुरी बालकृष्ण स्टारर तेलुगु फिल्म 'भगवंत केसरी' की याद दिलाते हैं, लेकिन बाद में कहानी अपनी अलग दिशा पकड़ने की कोशिश करती है।

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कैसी है 'जन नायकन' की स्टारकास्ट की परफॉर्मेंस?

  • पूरी फिल्म का सबसे मजबूत स्तंभ थलापति विजय हैं। एक्शन, इमोशनल सीन, दमदार डायलॉग और फैन सर्विस वाले हर पल में वह पूरी तरह छाए रहते हैं। यह फिल्म उनके स्टारडम का पूरा फायदा उठाती है।
  • ममिता बैजू ने भी प्रभावशाली एक्टिंग की है। विजय के साथ उनका इमोशनल रिश्ता फिल्म की जान बनकर उभरता है।
  • बॉबी देओल स्क्रीन पर प्रभावशाली दिखते हैं और एक कमर्शियल विलेन के रूप में अपना काम अच्छी तरह निभाते हैं।
  • पूजा हेगड़े, प्रकाश राज, प्रियामणि, गौतम वासुदेव मेनन, नारायण, नासर, रेवती, सुनील और अन्य कलाकारों को सीमित स्क्रीन स्पेस मिला है, लेकिन सभी अपने किरदारों के साथ न्याय करते हैं।

एच. विनोद का डायरेक्शन कैसा है?

निर्देशक एच. विनोद ने फिल्म को पूरी तरह विजय के स्टारडम के मुताबिक डिजाइन किया है। उन्होंने सामाजिक संदेश को कमर्शियल मनोरंजन के साथ संतुलित करने की कोशिश की है। फिल्म कहीं भी अत्यधिक उपदेशात्मक नहीं लगती और लगातार मास ऑडियंस को ध्यान में रखकर आगे बढ़ती है। हालांकि कुछ हिस्सों में स्क्रिप्ट पहले से अनुमानित लग सकती है, लेकिन निर्देशक इसे बड़े पैमाने के मनोरंजन में बदलने में सफल रहते हैं।

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'जन नायकन' का म्यूजिक कैसा है?

  • अनिरुद्ध रविचंदर एक बार फिर फिल्म की सबसे बड़ी ताकतों में शामिल हैं। 'थलापति कचेरी' और 'रावणा मावंडा' जैसे गाने बड़े पर्दे पर जबरदस्त माहौल बनाते हैं। 
  • बैकग्राउंड स्कोर एक्शन, इमोशन और फैन सर्विस वाले दृश्यों को और ज्यादा प्रभावशाली बना देता है। विजय और अनिरुद्ध की सफल जोड़ी इस फिल्म में भी अपना असर छोड़ती है।

टेक्निकल फ्रंट पर कैसी है 'जन नायकन'?

  • सत्यन सूर्यन की सिनेमैटोग्राफी फिल्म को भव्य लुक देती है। बड़े एक्शन सीक्वेंस और वीएफएक्स वाले हिस्सों को शानदार तरीके से फिल्माया गया है। 
  • एक्शन डायरेक्टर अनल अरासु ने कई ऐसे सीन तैयार किए हैं, जिन पर सिनेमाघरों में सीटियां और तालियां बजना तय है।
  • एडिटिंग भी फिल्म की गति को काफी हद तक बनाए रखती है, हालांकि सेकंड हाफ में कुछ सीन्स को और छोटा किया जा सकता था।

क्यों देखें 'जन नायकन'?

'जन नायकन' सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि थलापति विजय के लंबे और सफल फिल्मी सफर का जश्न है। इसमें उनकी वही सभी खूबियां मौजूद हैं, जिन्हें दर्शक दशकों से पसंद करते आए हैं—मास एंट्री, दमदार डायलॉग, हाई-वोल्टेज एक्शन, इमोशनल पल और मनोरंजन। अगर आप विजय को आखिरी बार बड़े पर्दे पर एक्टर के रूप में देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए यादगार सिनेमाई अनुभव बन सकती है। हमारी ओर से इस फिल्म को 5 में से 3 स्टार।