Pakistani cricketer Basit Ali and Nana Patekar friendship: नाना पाटेकर के निधन पर पाकिस्तानी क्रिकेटर बसीत अली ने उन्हें याद किया। दोनों की दोस्ती 1994 में शुरू हुई थी।

नाना पाटेकर के जाने के बाद हर तरफ से यादें और श्रद्धांजलियां आ रही हैं। लेकिन पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर बसीत अली ने जो बात कही है, वो दिल को छू लेने वाली है। उन्होंने बताया कि नाना सिर्फ स्क्रीन पर ही नहीं, असल जिंदगी में भी कितने बड़े इंसान थे। दोनों की दोस्ती 1994 से शुरू हुई थी और सालों तक चलती रही। बसीत की मां जब अस्पताल में थीं तो नाना हर हफ्ते फोन करते थे, दुआएं मांगते थे और पुरानी बातें सुनते थे। मां के निधन के बाद भी उन्होंने बसीत का ख्याल रखा। खुद बसीत की दिल की तकलीफ पर भी नाना ने फोन करके हालचाल पूछा। बसीत ने कहा, 'वो एक अद्भुत इंसान थे। फिल्मों में जैसे दिखते थे, असल में भी वैसे ही थे।'

1994 में शुरू हुई दोस्ती और सालों का रिश्ता

बसीत अली ने वीडियो में बताया कि सुबह जब नाना के निधन की खबर सुनी तो पुरानी यादें ताजा हो गईं। उन्होंने कहा कि नाना उनके बहुत प्यारे भाई, दोस्त और जीवित किंवदंती थे। दोनों की मुलाकात 1994 में हुई थी। उस समय टीम के खिलाड़ी लतीफ को नाना का निकनेम देते थे। उसी से बातचीत शुरू हुई और फिर रिश्ता गहरा होता गया। बसीत ने बताया कि आमतौर पर महीने में एक-दो बार बात होती थी। नाना हमेशा परिवार का हाल पूछते थे और अपनापन बनाए रखते थे। सीमाओं के पार ये दोस्ती दोनों के लिए खास थी।

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मां की बीमारी में नाना का सहारा

सबसे भावुक करने वाली बात ये है कि बसीत की मां जब अस्पताल में थीं, नाना हर हफ्ते फोन करते थे। वो दुआएं मांगते, मां से लंबी बात करते और उनकी पुरानी कहानियां सुनते। मां के गुजर जाने के बाद नाना ने बसीत से कहा, “अरे बसीत, अब अपना ख्याल रखना।” ये छोटी सी बात बसीत के लिए बहुत मायने रखती थी। जब खुद बसीत को दिल की समस्या हुई और स्टेंट डाला गया, तो नाना ने मैसेज भेजकर हालचाल पूछा और बेहतर होने पर फोन करने को कहा। जब बसीत ने फोन किया तो नाना ने पूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से पूछा। ये दिखाता है कि नाना कितने संवेदनशील और देखभाल करने वाले इंसान थे।

स्क्रीन और असल जिंदगी में एक जैसे नाना

बसीत ने कहा कि जो लोग नाना को सिर्फ फिल्मों से जानते हैं, वो जान लें कि असल जिंदगी में भी वो बिल्कुल वैसे ही थे। लोग उनकी तारीफ करते थे और दोनों को कई बातचीत करने का मौका मिला। कभी-कभी बसीत फिल्म के किसी सीन के बारे में पूछते तो नाना हंसकर कहते, 'चुप रहो, तुम्हें क्या पता।' बसीत के लिए नाना बड़े भाई जैसे थे। उनका प्यार और स्नेह अद्भुत था। बसीत ने ये भी कहा कि नाना 75 साल के नहीं लगते थे। वो हमेशा उन्हें “यंग मैन” कहते थे और नाना जवाब देते, 'छोड़ो, अब हम दोनों बूढ़े हो गए।'

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पाकिस्तान में भी नाना का उतना ही प्यार

बसीत ने साफ कहा कि नाना को पाकिस्तान में भी उतना ही प्यार मिलता था जितना भारत और दुनिया भर में। लोग उन्हें बहुत पसंद करते थे। उनकी मौत की खबर पर बसीत अभी भी यकीन नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये बहुत दर्दनाक है। नाना की फिल्में और उनका अंदाज सीमाओं के पार लोगों के दिलों में जगह बनाए हुए थे। बसीत की ये यादें बताती हैं कि नाना सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि इंसानियत के प्रतीक थे।

नाना की विरासत और यादों का सिलसिला

नाना पाटेकर के निधन के बाद कई लोग अपनी व्यक्तिगत यादें साझा कर रहे हैं। बसीत अली की ये बातें खास इसलिए हैं क्योंकि ये सीमाओं के पार की दोस्ती और इंसानियत को दिखाती हैं। नाना ने अपनी फिल्मों से जितना प्रभावित किया, उतना ही असल जिंदगी में भी लोगों के करीब रहे। बसीत जैसे लोग उनकी यादों को जिंदा रखेंगे। नाना की अंतिम यात्रा पुणे में राजकीय सम्मान के साथ पूरी हुई, लेकिन उनकी यादें और उनके किए हुए अच्छे काम लंबे समय तक लोगों के दिलों में रहेंगे।