New Psychological Thriller Film Obsess : क्या है पीटर विल्सन और ईशा सिंह की साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म ‘ऑब्सेस’ की कहानी?  ऑब्सेस फिल्म आखिर क्यों देखें और क्यों ना देखें?  'ऑब्सेस' फिल्म को कितनी रेटिंग मिली? ऑब्सेस फिल्म का डायरेक्शन किसने किया और इसका संगीत कैसा है?

साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्मों की असली पहचान उनका तनाव, अनिश्चितता और दर्शकों को मानसिक रूप से असहज कर देने वाला माहौल होता है। ‘ऑब्सेस’ इसी फॉर्मूले को बेहद प्रभावशाली तरीके से इस्तेमाल करती है। फिल्म एक छोटे से रोड रेज विवाद से शुरू होती है, लेकिन धीरे-धीरे कहानी हिंसा, डर और मानसिक सनक के ऐसे खतरनाक खेल में बदल जाती है, जहां हर सीन के साथ बेचैनी बढ़ती जाती है। सीमित किरदारों और कम संवादों के बावजूद फिल्म अपनी पकड़ नहीं छोड़ती। यही वजह है कि यह रेगुलर मसाला फिल्मों से अलग एक डार्क और इंटेंस अनुभव बनकर सामने आती है।

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ऑब्सेस’ की कहानी: मामूली गुस्से से शुरू होता है खतरनाक खेल

फिल्म की कहानी एक साधारण सड़क विवाद से शुरू होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह मामला जुनून, बदले और मानसिक अस्थिरता के खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है। कहानी का सबसे मजबूत पक्ष इसका लगातार बना रहने वाला तनाव है। दर्शक कभी अंदाजा नहीं लगा पाते कि अगला हमला कब और कैसे होगा। फिल्म बहुत ज्यादा ट्विस्ट पर निर्भर नहीं करती, बल्कि माहौल और डर के जरिए असर छोड़ती है। क्लाइमैक्स तक आते-आते कहानी पूरी तरह दर्शकों को अपने जाल में फंसा लेती है।

ऑब्सेस’ स्टार कास्ट की परफॉर्मेंस: पीटर विल्सन ने डर को बनाया असली

पीटर विल्सन फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरते हैं। उन्होंने मानसिक रूप से टूट चुके इंसान का किरदार बेहद कंट्रोल्ड लेकिन खौफनाक अंदाज में निभाया है। कई सीन में उनका शांत चेहरा ही डर पैदा कर देता है। वहीं ईशा सिंह ने एक मां के डर, बेचैनी और मजबूरी को प्रभावशाली तरीके से पर्दे पर उतारा है। दोनों कलाकारों की केमिस्ट्री फिल्म के तनाव को और मजबूत बनाती है।

ऑब्सेस’ का डायरेक्शन: सीमित किरदारों में भी बनाए रखा जबरदस्त सस्पेंस

निर्देशक पीटर विल्सन ने कहानी को जरूरत से ज्यादा फैलाने की बजाय उसे टाइट रखने की कोशिश की है। फिल्म में कम किरदार और सीमित लोकेशंस होने के बावजूद बोरियत महसूस नहीं होती। कई जगह सन्नाटा ही डर पैदा करता है। हालांकि बीच के कुछ हिस्से थोड़े धीमे लगते हैं, लेकिन निर्देशक क्लाइमेक्स तक आते-आते पूरी पकड़ बना लेते हैं।

ऑब्सेस’ का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर: खामोशी भी यहां डराती है

फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर इसकी जान है। तेज आवाजों की बजाय साइलेंस और हल्के साउंड इफेक्ट्स का इस्तेमाल ज्यादा असर छोड़ता है। कई दृश्यों में सिर्फ माहौल और म्यूजिक ही तनाव पैदा कर देते हैं। यही वजह है कि फिल्म का डर लंबे समय तक दिमाग में बना रहता है।

क्यों देखें / क्यों ना देखें

अगर आपको स्लो-बर्न साइकोलॉजिकल थ्रिलर, माइंड गेम्स और डार्क सस्पेंस पसंद हैं तो ‘ऑब्सेस’ आपको जरूर पसंद आएगी। यह फिल्म मसाला एंटरटेनमेंट नहीं, बल्कि मानसिक तनाव और डर का इंटेंस अनुभव देती है। हालांकि जो दर्शक तेज रफ्तार कहानी और बड़े ट्विस्ट की उम्मीद करेंगे, उन्हें फिल्म कुछ हिस्सों में धीमी लग सकती है। हमारी ओर से इसे 5 में से 3.5 स्टार।