समय रैना और चार अन्य को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। ‘इंडियाज़ गॉट लेटेंट’ विवाद से जुड़ी सभी FIR रद्द कर दी गई हैं। हालांकि, रणवीर इलाहाबादिया पर अभी फैसला नहीं आया है।
कॉमेडियन समय रैना को इंडियाज़ गॉट लेटेंट से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शुक्रवार को सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने समय रैना समेत पांच लोगों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर रद्द कर दीं। मामला दिव्यांग व्यक्तियों को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़ा था। कोर्ट ने माना कि आरोपियों ने जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने और दिव्यांग लोगों के लिए फंड जुटाने को लेकर दिए गए निर्देशों का पालन किया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले के व्यापक पहलू पर सुनवाई जारी रखने की बात कही है, ताकि ऐसे कंटेंट पर बेहतर निगरानी के लिए उचित दिशा-निर्देश तैयार किए जा सकें।
समय रैना को सुप्रीम कोर्ट से क्या राहत मिली?
सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना, विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर उर्फ सोनाली आदित्य देसाई और निशांत जगदीश तंवर के खिलाफ दर्ज एफआईआर और उनसे जुड़ी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। अदालत ने माना कि इन लोगों ने जागरूकता कार्यक्रम और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए फंड जुटाने की दिशा में वास्तविक प्रयास किए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कहा, “जब वास्तविक प्रयास होते हैं, तो सकारात्मक नतीजे आना तय है। वे बहुत प्रतिभाशाली युवा हैं। अगर उन्होंने सकारात्मक दिशा में काम करना शुरू किया है, तो सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।” कोर्ट ने यह भी कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों की ओर से दिए जाने वाले सुझावों पर आगे सुनवाई की जाएगी, ताकि ऐसे कंटेंट की बेहतर निगरानी के लिए व्यवस्था बनाई जा सके।
इंडियाज़ गॉट लेटेंट विवाद आखिर किस मामले से जुड़ा था?
विवाद इंडियाज़ गॉट लेटेंट के उस एपिसोड से जुड़ा था, जिसकी शूटिंग 14 नवंबर 2024 को मुंबई के खार हैबिटेट में हुई थी। बाद में प्रसारित हुए इस एपिसोड में दिव्यांग व्यक्तियों और स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) के इलाज की महंगी लागत को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों पर विवाद हुआ था। क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर इन टिप्पणियों पर आपत्ति जताई थी।
पहले समय रैना पर 3 लाख रुपये का जुर्माना क्यों लगा था?
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और चार अन्य पर 3 लाख रुपये की लागत लगाई थी। अदालत ने उस समय कमेंट किया था कि दिए गए आश्वासनों के मुताबिक सुधारात्मक कदम नहीं उठाए जाने से अदालत के निर्देशों का पालन नहीं हुआ। बाद में आरोपियों द्वारा जागरूकता कार्यक्रम और फंड जुटाने की दिशा में किए गए प्रयासों को कोर्ट ने सकारात्मक माना।
रणवीर इलाहाबादिया: क्या उन्हें भी मिली राहत?
इस विवाद में यूट्यूबर और कारोबारी रणवीर इलाहाबादिया, जिन्हें “बीयर बाइसेप्स” के नाम से भी जाना जाता है, का नाम भी सामने आया था। हालांकि, उनके खिलाफ मामलों में राहत मांगने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में अभी फैसला लंबित है। इससे पहले अदालत ने उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दी थी। समय रैना और अन्य के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही खत्म करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने व्यापक मुद्दे को खुला रखा है। अदालत अब दिव्यांग व्यक्तियों से सुझाव लेकर ऐसे कंटेंट की निगरानी और संवेदनशील विषयों से जुड़े मामलों में बेहतर जांच-व्यवस्था को लेकर दिशा-निर्देश तैयार करने पर विचार करेगी।
