क्या सनी देओल और डिंपल कपाड़िया की साथ वाली तस्वीरें जानबूझकर नहीं खींची जाती थीं? आखिर मीडिया को कौन देता था निर्देश? क्यों उस दौर में सितारों की निजी जिंदगी कैमरों से दूर रहती थी? कैसे माधुरी, श्रीदेवी और मनीषा कोइराला की तस्वीरों के लिए फोटोग्राफर्स पहले पहुंच जाते थे? बॉलीवुड फोटोग्राफी के पुराने दौर के कई चौंकाने वाले राज अब सामने आए हैं।
सोशल मीडिया और पैपराजी कल्चर के दौर में सितारों की हर छोटी-बड़ी गतिविधि कैमरे में कैद हो जाती है, लेकिन बॉलीवुड का एक दौर ऐसा भी था जब सेलेब्स अपनी निजी जिंदगी पर काफी हद तक कंट्रोल रखते थे। वरिष्ठ सेलिब्रिटी फोटोग्राफर रामाकांत मुंडे ने हालिया बातचीत में फिल्म इंडस्ट्री के उन अनकहे नियमों का खुलासा किया है, जिनका पालन फोटोग्राफर्स किया करते थे। उन्होंने बताया कि सनी देओल और डिंपल कपाड़िया को एक साथ तस्वीरों में कैद नहीं करने के निर्देश आम बात थे। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि उस समय ग्लैमरस तस्वीरों की मांग ज्यादा होती थी, न कि सितारों की निजी मुलाकातों की।

सनी देओल-डिंपल कपाड़िया तस्वीरें क्यों नहीं खींचते थे फोटोग्राफर?
वरिष्ठ फोटोग्राफर रामाकांत मुंडे के मुताबिक, उस दौर में मीडिया और सितारों के बीच एक अलग तरह की समझदारी होती थी। उन्होंने दावा किया कि फिल्म सेट, इवेंट या किसी समारोह में सनी देओल और डिंपल कपाड़िया मौजूद होते थे, लेकिन दोनों साथ में तस्वीरें खिंचवाना पसंद नहीं करते थे। हिंदी रश से बातचीत में मुंडे ने कहा, "कई बार दोनों एक ही0 जगह पर होते थे, लेकिन उन्हें एक फ्रेम में फोटो खिंचवाना पसंद नहीं था। मीडिया में यह बात सभी जानते थे।"
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सनी देओल-डिंपल कपाड़िया की ओर से कैसे मिलते थे निर्देश?
रामाकांत मुंडे ने बताया कि जब भी दोनों सितारों के किसी कार्यक्रम में पहुंचने की जानकारी होती थी, तो फोटोग्राफर्स को पहले ही संकेत दे दिया जाता था। उनके मुताबिक, "फोटोग्राफर्स के बीच यह संदेश रहता था कि अगर दोनों साथ हों तो तस्वीर नहीं लेनी है। आमतौर पर उनकी टीम का कोई सदस्य आकर बता देता था या कोई संकेत दे दिया जाता था कि फोटो नहीं चाहिए।"
वह दौर, जब निजी जिंदगी की तस्वीरों की नहीं थी डिमांड
मुंडे का कहना है कि आज की तरह उस समय सितारों की निजी जिंदगी की तस्वीरों को लेकर ज्यादा उत्सुकता नहीं होती थी। मीडिया संस्थान भी ऐसी तस्वीरों की बजाय ग्लैमरस और स्टाइलिश फोटो को प्राथमिकता देते थे। उन्होंने कहा, "उस तरह की मांग नहीं थी। उस समय अच्छी ड्रेस, ज्वेलरी, मेकअप और ग्लैमरस लुक वाली तस्वीरें ज्यादा बिकती थीं। प्रकाशकों को खूबसूरत तस्वीरें पसंद आती थीं।"
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सोशल मीडिया ने बदला एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का पूरा खेल?
फोटोग्राफर के मुताबिक, सोशल मीडिया, स्मार्टफोन और पैपराजी पेजों के आने के बाद एंटरटेनमेंट मीडिया पूरी तरह बदल गया है। उन्होंने कहा, "आज लोग किसी सेलिब्रिटी की निजी जिंदगी का हर पहलू जानना चाहते हैं। एयरपोर्ट लुक से लेकर फैमिली आउटिंग और निजी मुलाकातों तक सब कुछ चर्चा का विषय बन जाता है। लेकिन पहले ऐसा नहीं था।"
सबसे ज्यादा डिमांड में रहती थीं हीरोइनों की तस्वीरें?
रामाकांत मुंडे ने बताया कि उस दौर में एक्ट्रेसेस की तस्वीरों की मांग एक्टर्स से कहीं ज्यादा होती थी। इसकी वजह उनका स्टाइल, कॉस्ट्यूम और मेकअप था। उन्होंने कहा, "हीरो सामान्य दिखते थे, लेकिन हीरोइनों के कॉस्ट्यूम, मेकअप और स्टाइलिंग बेहद आकर्षक होती थी। उनकी तस्वीरों की मांग सबसे ज्यादा रहती थी।" मुंडे ने बताया कि बड़े सितारों की शूटिंग की जानकारी मिलते ही फोटोग्राफर्स तय समय से काफी पहले लोकेशन पर पहुंच जाते थे। उन्होंने कहा, “अगर पता चलता था कि माधुरी दीक्षित, मनीषा कोइराला या श्रीदेवी शूटिंग कर रही हैं, तो हम कम से कम आधा घंटा या एक घंटा पहले पहुंच जाते थे क्योंकि उनकी तस्वीरों की जबरदस्त मांग होती थी।”
