1984 में 500 रुपये कमाने वाला चाइल्ड आर्टिस्ट, जिसने 42 साल बाद राजनीति में इतिहास रच दिया। जानिए चाइल्ड स्टार के सुपरस्टार, फिर मुख्यमंत्री बनने तक का पूरा सफर।

एक चाइल्ड आर्टिस्ट, जिसने कभी अपने पिता की फिल्म में छोटा सा रोल निभाया था। उसने और उसके पिता ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन वही बच्चा एक राज्य का मुख्यमंत्री बन जाएगा। हम बात कर रहे हैं थलापति विजय की, जो 52 साल के हो गए हैं। 22 जून 1974 को उनका जन्म चेन्नई में हुआ था। उनका पूरा नाम चंद्रशेखर जोसेफ विजय है। 1984 में जब वे महज 10 साल के थे, तब उन्होंने अपने पिता एस. ए. चन्द्रशेखर की फिल्म ‘वेत्री’ में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम किया था और उन्हें इसके लिए 500 रुपए का मेहनताना मिला था। जानिए विजय की एक्टर से मुख्यमंत्री बनने तक की पूरी कहानी।

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पिता की कई फिल्मों में विजय ने किया काम

विजय ने अपने पिता द्वारा निर्देशित कई फिल्मों में छोटे-छोटे किरदार निभाए। इनमें ‘कुडुम्बम’, ‘नान सिगप्पु मनिथन’, ‘वसंथा रागम’, ‘सट्टम ओरु विलायट्टू’ और ‘इधु एंगल नीथि’ जैसी फिल्में शामिल थीं। उस दौर में विजय सिर्फ एक उभरते कलाकार थे, जबकि उनके पिता व्यावसायिक फिल्मों के सफल निर्देशक के रूप में पहचान बना रहे थे।

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विजय की बतौर हीरो पहली फिल्म रही फ्लॉप

1992 में विजय ने पहली बार मुख्य एक्टर के रूप में ‘नालाईया थीरपू’ में काम किया। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही और उनके अभिनय व लुक्स को लेकर आलोचना भी हुई। हालांकि अगले ही साल उनके पिता ने उन्हें लोकप्रिय एक्टर विजयकांत के साथ ‘सेंथूरापांडी’ में कास्ट किया। फिल्म हिट साबित हुई और विजय को दर्शकों के बीच पहली बड़ी पहचान मिली। 1994 में रिलीज हुई ‘रसिगन’ विजय के करियर का अहम मोड़ मानी गई। इसी फिल्म के बाद प्रशंसकों ने उन्हें ‘इलाया थलापति’ यानी ‘युवा कमांडर’ कहना शुरू किया। 1990 के दशक में ‘पूवे उनक्कागा’, ‘काधालुक्कु मरियाधाई’, ‘थुल्लाथा मनमुम थुल्लुम’ और ‘कुशी’ जैसी फिल्मों ने उन्हें रोमांटिक स्टार के रूप में स्थापित कर दिया।

एक्शन हीरो बनते ही बदल गई किस्मत

2003 में आई ‘थिरुमलाई’ ने विजय की स्क्रीन इमेज बदल दी। इसके बाद 2004 में रिलीज हुई ‘घिल्ली’ उनके करियर की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक साबित हुई। फिल्म ने उन्हें सिर्फ लोकप्रिय एक्टर नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर दर्शकों को आकर्षित करने वाले ‘मास एंटरटेनर’ के रूप में स्थापित कर दिया। 2007 में आई ‘पोक्किरी’ ने उनकी स्टारडम को और ऊंचाई दी और वह तमिल सिनेमा के शीर्ष सितारों में शामिल हो गए। 2010 के बाद विजय की फिल्मों का पैमाना लगातार बढ़ता गया। ‘थुप्पाक्की’, ‘काठी’, ‘थेरी’, ‘मर्सल’, ‘सरकार’, ‘बिगिल’, ‘मास्टर’ और ‘लियो’ जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया। इन फिल्मों ने विजय को न सिर्फ तमिलनाडु बल्कि पूरे देश में सबसे बड़े सितारों में शामिल कर दिया।

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विजय के फैन क्लब से तैयार हुई राजनीतिक जमीन

विजय ने अपने विशाल फैन नेटवर्क को 2009 में ‘विजय मक्कल इयक्कम’ नामक सामाजिक संगठन का रूप दिया। यही संगठन आगे चलकर उनकी राजनीतिक ताकत की नींव बना। वर्षों तक सामाजिक गतिविधियों और जनसंपर्क के जरिए यह नेटवर्क राज्यभर में मजबूत होता गया। 2 फरवरी 2024 को विजय ने ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ (TVK) नामक राजनीतिक पार्टी के गठन की घोषणा की। उन्होंने साफ कहा कि पार्टी 2026 के विधानसभा चुनाव में मैदान में उतरेगी। इसके बाद उनके हजारों फैन क्लब यूनिट्स को पार्टी संगठन में बदल दिया गया।

चुनाव में मचा दिया बड़ा उलटफेर

चुनाव में विजय की पार्टी ने पहली बार मैदान में उतरकर जबरदस्त प्रदर्शन किया। रिजस्ट में TVK 234 में से 108 सीटें जीतकर राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।विजय ने जिन दोनों सीटों से चुनाव लड़ा, वहां जीत हासिल की। इसके बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले और उनकी पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच गई। सरकार गठन को लेकर कई दौर की चर्चाओं के बाद विजय के नेतृत्व में गठबंधन तैयार हुआ। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और विधानसभा में बहुमत परीक्षण भी जीत लिया। फिल्मों की बात करें तो विजय की आखिरी फिल्म 'जन नायगन' है, जिसकी रिलीज डेट का सबको इंतज़ार है। रिपोर्ट्स की मानें तो इस फिल्म के लिए उन्होंने लगभग 275 करोड़ रुपये का मेहनताना लिया है।