‘टॉक्सिक’ में यश का स्वैग, जबरदस्त एक्शन और शानदार विजुअल्स खूब प्रभावित करते हैं, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले और लंबी कहानी फिल्म के असर को कई जगह कम कर देती है।
यश की ‘टॉक्सिक’ बड़े पर्दे पर आते ही अपने विशाल स्केल, डार्क गैंगस्टर वर्ल्ड और स्टार पावर से ध्यान खींचती है। फिल्म का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट यश हैं, जिनकी स्क्रीन प्रेजेंस और एटीट्यूड कई कमजोर हिस्सों को भी संभाल लेते हैं। तकनीकी स्तर पर फिल्म काफी मजबूत नजर आती है और सिनेमैटोग्राफी से लेकर प्रोडक्शन डिजाइन तक इसका भव्य ट्रीटमेंट साफ दिखाई देता है। हालांकि, फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी कहानी और स्क्रीनप्ले बन जाती है। कुछ सीक्वेंस शानदार हैं, लेकिन कई हिस्से जरूरत से ज्यादा उलझे और खिंचे हुए लगते हैं। नतीजा यह कि फिल्म का विजुअल तमाशा कई बार इसकी कहानी पर भारी पड़ जाता है।
क्या है ‘टॉक्सिक’ की कहानी?
‘टॉक्सिक’ एक डार्क गैंगस्टर दुनिया की कहानी पेश करती है, जहां सत्ता, अपराध और बड़े टकरावों के बीच किरदार आगे बढ़ते हैं। फिल्म के पास दिलचस्प आइडियाज हैं, लेकिन कहानी को जिस तरह स्क्रीनप्ले में पिरोया गया है, वह हर जगह उतना प्रभावी नहीं लगता। फिल्म लगातार किरदारों, एक्शन और स्टाइल के बीच घूमती रहती है। कुछ हिस्से पकड़ बनाते हैं, जबकि कुछ सीन जरूरत से ज्यादा जटिल महसूस होते हैं। कहानी का इमोशनल कनेक्शन भी हर जगह मजबूत नहीं बन पाता।
‘टॉक्सिक’ में यश की परफॉर्मेंस कैसी है?
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत यश हैं। उनकी एंट्री से लेकर एक्शन और स्वैग वाले सीक्वेंस तक, वह स्क्रीन पर पूरी तरह छाए रहते हैं। उनका एटीट्यूड, इंटेंसिटी और स्टारडम फिल्म को तुरंत एनर्जी देता है। कई ऐसे पल हैं जहां कहानी थोड़ी कमजोर पड़ती है, लेकिन यश की स्क्रीन प्रेजेंस दर्शकों का ध्यान वापस खींच लेती है। उनके फैंस के लिए यह परफॉर्मेंस फिल्म देखने की सबसे बड़ी वजहों में से एक है।
बाकी स्टार कास्ट की परफॉर्मेंस कैसी है?
सपोर्टिंग कास्ट को भी चमकने के मौके मिलते हैं और कुछ किरदार अपने हिस्से के सीन में प्रभाव छोड़ते हैं। हालांकि, समस्या किरदारों के डेवलपमेंट की है। सभी पात्रों को बराबर गहराई नहीं मिल पाती। इसकी वजह से कुछ भावनात्मक हिस्से उतना असर नहीं छोड़ते, जितनी उम्मीद फिल्म की भव्य प्रस्तुति से बनती है।
गीतू मोहनदास का डायरेक्शन कैसा है?
गीतू मोहनदास ने ‘टॉक्सिक’ को सामान्य गैंगस्टर फिल्म की तरह पेश करने के बजाय बड़े स्केल और स्टाइल पर काफी जोर दिया है। उनकी विजुअल सोच फिल्म में साफ नजर आती है। कई सीक्वेंस महत्वाकांक्षी और प्रभावशाली हैं। लेकिन डायरेक्शन की यही महत्वाकांक्षा कुछ जगह कहानी पर भारी पड़ती है।पहले हाफ में स्टाइल, यश का एटीट्यूड और एक्शन फिल्म को लगातार आगे बढ़ाते हैं। विजुअल ट्रीटमेंट दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखता है और यश की स्क्रीन प्रेजेंस कई हिस्सों को मजबूत बनाती है। हालांकि, जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, स्क्रीनप्ले की कमियां ज्यादा साफ महसूस होने लगती हैं। दूसरे हाफ में कहानी अपने क्लाइमैक्स और तय मुकाम तक पहुंचने में जरूरत से ज्यादा समय लेती है। कई हिस्से खिंचे हुए लगते हैं और भावनात्मक असर भी लगातार नहीं बना रहता। अगर स्क्रीनप्ले थोड़ा ज्यादा टाइट होता, तो निर्देशन का असर कहीं बेहतर हो सकता था।
‘टॉक्सिक’ का म्यूजिक कैसा है?
फिल्म का म्यूजिक इसके माहौल को सपोर्ट करता है और गैंगस्टर वर्ल्ड की डार्क टोन के साथ फिट बैठता है। हालांकि, म्यूजिक फिल्म का सबसे बड़ा हाईलाइट नहीं बनता। यहां असली प्रभाव बैकग्राउंड टोन, एक्शन और विजुअल ट्रीटमेंट से आता है। यानी गाने या म्यूजिकल मोमेंट्स के बजाय फिल्म का ओवरऑल ऑडियो-विजुअल पैकेज ज्यादा असरदार नजर आता है।
टेक्नीकल फ्रंट पर कैसी है ‘टॉक्सिक’?
तकनीकी स्तर पर ‘टॉक्सिक’ काफी प्रभावशाली है। सिनेमैटोग्राफी, प्रोडक्शन डिजाइन, एक्शन ब्लॉक्स और विजुअल प्रेजेंटेशन फिल्म को बड़े पर्दे के लिए बनाया गया अनुभव देते हैं। कई फ्रेम और एक्शन सीक्वेंस बेहद शानदार नजर आते हैं। फिल्म का स्केल साफ बताता है कि मेकर्स ने इसे एक बड़े इवेंट की तरह डिजाइन किया है। समस्या सिर्फ इतनी है कि कई बार यह भव्यता कहानी की कमियों को ढकने के बजाय उन्हें और ज्यादा उभार देती है।
क्यों देखें ‘टॉक्सिक’?
अगर आप यश के फैन हैं, तो फिल्म में आपके लिए काफी कुछ है। यश का स्वैग, दमदार स्क्रीन प्रेजेंस, एक्शन सीक्वेंस और फिल्म का विशाल स्केल बड़े पर्दे पर देखने लायक है। अगर आपकी पहली प्राथमिकता मजबूत कहानी और टाइट स्क्रीनप्ले है, तो फिल्म निराश कर सकती है। यानी शानदार पैकेजिंग के बावजूद कहानी की कमियां नजरअंदाज करना आसान नहीं है। हमारी ओर से इसे 5 में से 2 स्टार।
