कोरोना संक्रमण के बीच 'रेमेडिसविर इंजेक्शन की कमी सामने आई है। जिस कारण कालाबाजारी की घटनाएं हुईं। कई लोगों ने अपनी जान गंवा दी क्योंकि उन्हें रेमेडिसविर नहीं मिला। 

फैक्ट चेक डेस्क. कोरोना संक्रमण (Covid-19) के बढ़ते मामलों के बीच देशभर में रेमेडिसविर (remdesivir) इंजेक्शन की कमी आ रही है। ऐसे में बाजार में कोविपरी (COVIPRI) बिक रही है। जिसे कहा जा रहा है कि यह रेमेडिसविर (remdesivir) इंजेक्शन की जगह काम करता है। यह पोस्ट सोशल मीडिया में भी वायरल हो रही है। 

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क्या हो रहा है सोशल मीडिया में वायरल
सोशल मीडिया में वायरल किया जा रहा है कि 'रेमेडिसविर' इंजेक्शन लिखी पैकेट में "कोविपरी" बिक रही है। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स इस पोस्ट कर रहे हैं कि रेमेडिसविर (remdesivir) के पैकेट उपलब्ध हैं। जिन्हें जरूरत हो इस नंबर पर संपर्क करें। 

गलत अंग्रेजी का प्रयोग
सोशल मीडिया में 'कोविपरी' को वायरल किया जा रहा है। दवा के सर्टिफाइड होने पर भी सवाल उठ रहे है। दवा में जो अंग्रेजी लिखी गई है उसमें भी गलतियां हैं।

नकली दवाई में कई हो चुके हैं गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने नकली रेमेडिसविर (Fake Remdesivir) बेचने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। रेमेडिसविर इंजेक्शन को कोरोना मरीजों के इलाज में कारगार माना जाता है। 

बाजार में आयी नकली वैक्सीन
दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच की डीएसपी मोनिका भारद्वाज ने ट्वीट कर कहा है कि कोरोना वायरस के मरीजों को नकली रेमेडिसविर इंजेक्शन तैयार करके बाजार में उतारा गया है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे इस दवाई को नहीं खरीदें। 

क्या है वायरल मैसेज की सच्चाई
सोशल मीडिया में वायरल हो रही है 'कोविपरी' की दवाई पूरी तरह से फेक है। कोविपरी एक नकली दवा है और रेमेडिसविर इंजेक्शन नहीं है। दिल्ली पुलिस ने लोगों को आगाह किया है कि "कोविपरी" नाम से कोई भी इंजेक्शन नहीं हैं।