नई दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी से देश में लगातार मौतों का आकड़ा बढ़ रहा है। तपती गर्मी से कोरोना वायरस के मरने की उम्मीदों पर पानी फिर चुका है। लोगों को अब ये एहसास हो गया है कि निकट भविष्य में भी जिंदा रहने के लिए मास्क और सैनिटाइटर जीवन का अनिवार्य हिस्सा बने रहेंगे। अब लोग हर जगह सैनिटाइटर की बोतल भी अपने साथ रख रहे हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर सैनिटाइजर की बोतल से कार में आग लगने की खबर वायरल हो रही है। यूजर्स का दावा है कि सैनिटाइजर कार में रखने से आग लगने का खतरा है।

सोशल मीडिया पर कई पोस्ट में यह दावा किया जा रहा है कि सैनिटाइटर की बोतल से आपकी कार में आग लग सकती है। फैक्ट चेकिंग में आइए जानते हैं इस दावे में कितनी सच्चाई है? 

वायरल पोस्ट क्या है? 

राकेश आर्या नाम के यूजर ने सोशल मीडिया पर जलती हुई कारों के कुछ वीडियो शेयर करते हुए लिखा, बचने का मौका भी नही मिला कार सवार अरविंद जिंदा जल गया, एक्सपर्ट की माने तो कभी भी गाड़ी के भीतर सेनेटीज नही करवाये। दिल्ली के आउटर रिंग रोड पे, गाड़ी में लगी आग, कार सवार ने चाबी पे सेनेटाइजर छिड़क कर स्टार्ट किया था। कहा जा रहा है कि इन कारों में कथित तौर पर सैनिटाइजर से आग लग गई। 

क्या दावा किया जा रहा है? 

फेसबुक यूजर्स दावा कर रहे हैं कि दिल्ली में एक कार में आग लगी जिसमें ड्राइवर की जान चली गई। पुलिस उस घटना में जांच करके यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आग कैसे लगी लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि ऐसा सैनिटाइजर का उपयोग करने के कारण हुआ। 

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या प्रचंड गर्मी और धूप में सैनिटाइटर की बोतल से आपकी कार में आग लग सकती है, क्योंकि सैनिटाइटर शराब से बनता है और बेहद ज्वलनशील होता है? 

 

 

फैक्ट चेकिंग

यह असंभव है कि सैनिटाइजर की बोतल में खुद से आग पकड़ ले लेकिन इसके कई खतरे भी हैं, इसलिए सैनिटाइजर की बोतल को कार के डैशबोर्ड पर छोड़ना खतरनाक साबित हो सकता है। सबसे कम तापमान, जिस पर कोई भी पदार्थ सामान्य वातावरण में बिना किसी बाहरी चिंगारी या आग के खुद ही जल उठे, उसे स्वतः प्रज्ज्वलन तापमान (auto-ignition temperature) कहते हैं। सैनिटाइजर में पाए जाने वाले इथाइल एल्कोहल का स्वतः प्रज्ज्वलन तापमान 363°C होता है। यह तापमान इतना ज्यादा है कि टिन, लेड और कैडमियम जैसी धातुएं भी उस तापमान तक पहुंचने से पहले ही पिघल जाएंगी।

सैनिटाइटर के अलग-अलग ब्रांड में एल्कोहल की अलग-अलग मात्रा हो सकती है, लेकिन ज्यादातर में यह 60 से 80 फीसदी तक होता है। इसलिए आग लगने के चांसेज हैं लेकिन सैनिटाइजर का खुद से आग पकड़ना मुश्किल लगता है। कोई कार अगर गर्मी के दौरान धूप में खड़ी है तो यह बहुत गर्म हो सकती है। ज्यादा तापमान में कार खतरनाक साबित हो सकती है। 

सच क्या है? 

अग्निशमन के मामले में भारत सरकार के सलाहकार और मशहूर फायर एक्सपर्ट डीके शम्मी इस बात की पुष्टि करते हुए कहते हैं, "सैद्धांतिक रूप से, गर्म कार में रखी सैनिटाइजर की बोतल में खुद ही आग लग जाए, अगर यह असंभव नहीं है तो संभव भी नहीं है लेकिन वे चेतावनी देते हैं कि इसमें खतरा है।"

सैनिटाइजर में पाए जाने वाले एल्कोहल का फ्लैश पॉइंट ​मात्र 21°C होता है. दिल्ली का तापमान आजकल इसका दोगुना ज्यादा है। इसका मतलब यह हुआ कि अगर सैनिटाइजर की बोतल को खुला छोड़ दिया जाए तो गर्मी के कारण सैनिटाइजर भाप बनकर बोतल से बाहर, कार के भीतरी वायुमंडल में आ जाएगा। सैनिटाइज़र में पाया जाने वाला यह एल्कोहल कार के अंदर अत्यधिक ज्वलनशील भाप के रूप में मौजूद रहेगा। डीके शम्मी कहते हैं, “यदि कार में रखी गई सैनिटाइजर की बोतल एयरटाइट नहीं है, तो इसकी भाप बंद कार के अंदर जमा होती रहेगी और यह गैस चैंबर की तरह हो जाएगी, फिर इसमें आग लगने के लिए एक छोटी सी चिंगारी या गाड़ी का हॉर्न ही काफी है।”

 

 

ये निकला नतीजा 

ऐसे में अगर कोई आपको कार में सैनिटाइजर की बोतल न छोड़ने की चेतावनी दे रहा है तो यह बेबुनियाद नहीं है। सैनिटाइजर के सुरक्षा दिशानिर्देश में स्पष्ट रूप से कहा जाता है कि इसे बोतल में कसकर बंद रखने के साथ ठंडी और हवादार जगह पर रखना चाहिए। अगर आप हर चीज को सैनिटाइज करते हैं, यहां तक कि गाड़ी की चाबी भी, तो चाबी से सैनिटाइटर सूखने तक इंतजार करें, उसके बाद कार स्टार्ट करें। आग के खतरे के अलावा, एक और कारण है जिसके लिए सैनिटाइजर को ठंडी जगह पर रखना चाहिए। ज्यादा गर्मी के संपर्क में आने से सैनिटाइजर की कीटाणुनाशक क्षमता कमजोर हो जाती है।