फोटो में भारी मात्रा में 2 हजार के नकली नोट दिखाए गए हैं। इन तस्वीरों में पुलिसकर्मी 2 हजार के गुलाबी नोटों को जब्त करती नजर आ रही है। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट आग की तरह फैल चुकी है।

नई दिल्ली. सोशल मीडिया पर एक पोस्ट जमकर वायरल हो रही है। इसमें दावा किया जा रहा है कि, गुजरात में आरएसएस के एक समर्थक की कार से नकली नोट बरामद हुए हैं। फोटो में भारी मात्रा में 2 हजार के नकली नोट दिखाए गए हैं। इन तस्वीरों में पुलिसकर्मी 2 हजार के गुलाबी नोटों को जब्त करती नजर आ रही है। 

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सोशल मीडिया पर ये पोस्ट आग की तरह फैल चुकी है। सुर्खियों में आने के बाद खबर को लेकर संज्ञान लिया गया जिसके बाद इस पोस्ट को लेकर सच्चाई सामने आई। 

इन पेज पर फैलाई गई पोस्ट

ट्विटर पर "आम आदमी ज़िंदाबाद" और "मोबाइल टेक्नोलॉजी" जैसे कई फेसबुक पेजों ने पोस्ट को हिंदी में एक कैप्शन के साथ साझा किया। पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि, "गुजरात से नकली नोटों के बंडल जब्त किए गए और उन्हें आरएसएस कार्यकर्ता केतन दवे की कार से जब्त किया गया।" 

फैक्ट चेकिंग में सच सामने आया

इस पोस्ट के साथ भारी मात्रा में 2 हजार के नोटों के बंडल दिखाए गए हैं। वहीं तस्वीरें लगातार वायरल की जा रही हैं। दावा किया गया कि ये फर्जी नोटों के बंडल आरएसएस कार्यकर्ता और नेता केतन दवे की कार से बरामद हुए हैं। हालांकि फैक्ट चेकिंग में ये दावा पूरी तरह झूठा निकला। 

दो अलग घटनाओं से बुनी गई कहानी

गूगल पर ये नोटों की तस्वीर रिवर्स सर्च इमेज में चेक की गईं तो ये तस्वीर तेलंगना की निकली। वायरल पोस्ट में इस्तेमाल की गई तस्वीरें गुजरात की नहीं बल्कि तेलंगाना की हैं। फाइनेंसियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट साल 2017 में एक अलग घटना में केतन दवे नामक एक फाइनेंसर को धोखाधड़ी के एक मामले में गुजरात के राजकोट में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उनकी कार से नकली नोटों को जब्त किया गया था केतन दवे के आरएसएस से जुड़े होने की कोई खबर सामने नहीं आई थी। 

पूरी तरह भ्रामक निकली जानकारी 

बात करें इन वायरल तस्वीरों की तो रिवर्स इमेज सर्च में ये फोटोज इन वायरल छवियों को पाया। 2 नवंबर, 2019 को टाइम्स ऑफ इंडिया रपोर्ट में तेलंगाना पुलिस ने पांच लोगों के एक गिरोह को गिरफ्तार किया और खम्मम में 6 करोड़ रुपये से अधिक के नकली नोटों को जब्त किया। ये उसी खबर की तस्वीरें हैं जो गुजरात में आरएसएस नेता की बताकर शेयर की जा रही हैं।

नतीजा

ये पूरी तरह दो अलग-अलग घटनाओं को जोड़कर भ्रामक पोस्ट बनाई गई है। इसलिए, यह पाया गया कि इस वायरल पोस्ट को किसी खास साजिश के तहत शेयर किया जा रहा है।