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क्वारंटाइन सेंटर पर कंडोम बांट रही बिहार सरकार, छूटने वालों के घर आशा बहू पहुंचा रही हैं सप्लाई

First Published Jun 3, 2020, 11:32 AM IST
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पटना (Bihar) । बिहार सरकार जनसंख्या वृद्धि को लेकर चिंतित है। क्वारंटाइन सेंटर में 14 दिन तक रूकने के बाद घर जा रहे प्रवासी मजदूरों को स्वास्थ्य विभाग की तरफ से दो पैकेट कंडोम दिए जा रहे है। इतना ही नहीं, क्वारंटाइन सेंटर पर यदि प्रवासी मजदूरों को कंडोम का पैकेट नहीं मिल पा रहा है तो उनके घर आशा बहू नियोजन के किट दे रही हैं।  
 


बिहार में 28 से 29 लाख के बीच प्रवासी मजदूर लौटे हैं। इनमें से अधिकांश को अलग अलग क्वारंटाइन सेंटर में रखा गया है। इसमें 8.77 लाख ने 14 दिन की क्वारंटाइन अवधि पूरी कर ली है, उन्हें घर जाने दिया गया है।
 


बिहार में 28 से 29 लाख के बीच प्रवासी मजदूर लौटे हैं। इनमें से अधिकांश को अलग अलग क्वारंटाइन सेंटर में रखा गया है। इसमें 8.77 लाख ने 14 दिन की क्वारंटाइन अवधि पूरी कर ली है, उन्हें घर जाने दिया गया है।
 


अधिकारियों के मुताबिक अभी साढ़े पांच लाख से ज्यादा प्रवासी मजदूर राज्यभर में ब्लॉक और जिलास्तर के क्वारंटाइन सेंटर में हैं, जो प्रवासी मजदूर गांव जा रहे हैं उन्हें भी अभी बाहर निकलने की छूट नहीं होगी। 
 


अधिकारियों के मुताबिक अभी साढ़े पांच लाख से ज्यादा प्रवासी मजदूर राज्यभर में ब्लॉक और जिलास्तर के क्वारंटाइन सेंटर में हैं, जो प्रवासी मजदूर गांव जा रहे हैं उन्हें भी अभी बाहर निकलने की छूट नहीं होगी। 
 


अधिकारियों का मानना है कि घर से बाहर न निकलने पर इन परिवारों में जनसंख्या वृद्धि की संभावना ज्यादा है। यह निर्णय लिया गया है। 


अधिकारियों का मानना है कि घर से बाहर न निकलने पर इन परिवारों में जनसंख्या वृद्धि की संभावना ज्यादा है। यह निर्णय लिया गया है। 

क्वारंटाइन सेंटर पर पर्याप्त कंडोम और माला डी आदि की व्यवस्था की गई है। जहां जब प्रवासी मजदूर क्वारंटाइन सेंटर से घर जा रहे होते हैं तो पहले उनकी काउंसिलिंग की जा रही है। इसके अलावा गर्भधारण रोकने के साधन भी उन्हें दिए जा रहे है। इसमें कंडोम, माला डी आदि दिया जाता हैं। 

क्वारंटाइन सेंटर पर पर्याप्त कंडोम और माला डी आदि की व्यवस्था की गई है। जहां जब प्रवासी मजदूर क्वारंटाइन सेंटर से घर जा रहे होते हैं तो पहले उनकी काउंसिलिंग की जा रही है। इसके अलावा गर्भधारण रोकने के साधन भी उन्हें दिए जा रहे है। इसमें कंडोम, माला डी आदि दिया जाता हैं। 

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बताते हैं कि अगर कोई मजदूर यहां से छूट जाता है तो डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग के दौरान आशा बहू उन्हें घर पर कंडोम के दो पैकेट दे रही हैं। कंडोम वितरण काम में विभाग की मदद केयर इंडिया नाम की एक एनजीओ कर रही है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बताते हैं कि अगर कोई मजदूर यहां से छूट जाता है तो डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग के दौरान आशा बहू उन्हें घर पर कंडोम के दो पैकेट दे रही हैं। कंडोम वितरण काम में विभाग की मदद केयर इंडिया नाम की एक एनजीओ कर रही है।

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