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एक शख्स ने 2 हाथियों के नाम लिख दी 5 करोड़ की जायदाद, दिलचस्प है पूरी कहानी

First Published Jun 9, 2020, 1:07 PM IST
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पटना (Bihar) । जान बचाने वाले दो हाथियों को दानापुर के जानीपुर के रहने वाले अख्तर इमाम ने 5 करोड़ की जायदाद का हमालिक बना दिया है। इसके लिए दोनों हाथियों के नाम दस्तावेज भी रजिस्ट्री ऑफिस से रजिस्ट्रेशन करवा दिए हैं। अख्तर इमाम का कहना है कि हमारी सारी जायदाद इन हाथियों के नाम कर दी है। यही नहीं हमें कुछ होने के बाद हमारी भी सारी संपत्ति एरावत संस्था के नाम चली जाएगी ताकि इन हाथियों का संरक्षण किया जा सके और इन्हें तस्करों से बचाया जा सके। बता दें कि हाथियों के नाम अपनी पूरी जायदा करने वाले अख्तर इमाम ने अपने दोनों हाथियों का नाम भी रखा हुआ है। एक का नाम मोती तो दूसरे का नाम रानी है। इनके लिए परिवार हो या समाज, सब कुछ हाथी ही है।


पटना से सटे जानीपुर निवासी और एरावत संस्था के मुख्य प्रबंधक अख्तर इमाम 10 साल से अपनी बीवी और बच्चे से अलग रह रहे हैं। वे बताते हैं कि वह 12 साल की उम्र से ही हाथियों की सेवा कर रहे हैं। 


पटना से सटे जानीपुर निवासी और एरावत संस्था के मुख्य प्रबंधक अख्तर इमाम 10 साल से अपनी बीवी और बच्चे से अलग रह रहे हैं। वे बताते हैं कि वह 12 साल की उम्र से ही हाथियों की सेवा कर रहे हैं। 


पारिवारिक विवाद होने की वजह से 10 साल पहले उनकी पत्नी दो बेटे और बेटी के साथ घर से मायके चली गई थी। जायदाद के चक्कर में बेटे मेराज उर्फ रिंकू ने अपने ही प्रेमिका का दुष्कर्म से झूठा आरोप लगाकर उसे जेल भी भिजवा दिया था। मगर, जांच में यह बात गलत पाई गई। इसलिए उन्होंने उसे जायदाद से वंचित कर दिया है।
 


पारिवारिक विवाद होने की वजह से 10 साल पहले उनकी पत्नी दो बेटे और बेटी के साथ घर से मायके चली गई थी। जायदाद के चक्कर में बेटे मेराज उर्फ रिंकू ने अपने ही प्रेमिका का दुष्कर्म से झूठा आरोप लगाकर उसे जेल भी भिजवा दिया था। मगर, जांच में यह बात गलत पाई गई। इसलिए उन्होंने उसे जायदाद से वंचित कर दिया है।
 


अख्तर इमाम बताते हैं कि एक बार उन पर जानलेवा हमला करने का प्रयास किया गया था। इसी दौरान हमारे हाथी ने मुझे बचा लिया था। इन्होंने बताया कि एक बार पिस्तौल हाथ में लिए बदमाश जब हमारे कमरे की तरफ बढ़ने लगे तो हाथी उसे देखकर चिघ्घाड़ने लगा और इसी बीच हमारी नींद खुल गई और हमने शोर मचाया तो बदमाश भाग निकले।
 


अख्तर इमाम बताते हैं कि एक बार उन पर जानलेवा हमला करने का प्रयास किया गया था। इसी दौरान हमारे हाथी ने मुझे बचा लिया था। इन्होंने बताया कि एक बार पिस्तौल हाथ में लिए बदमाश जब हमारे कमरे की तरफ बढ़ने लगे तो हाथी उसे देखकर चिघ्घाड़ने लगा और इसी बीच हमारी नींद खुल गई और हमने शोर मचाया तो बदमाश भाग निकले।
 

अख्तर का कहना है क बेटा मेरा मेराज पशु तस्करों से मिलकर हाथी बेचने की भी कोशिश की थी। लेकिन, वह पकड़ा गया। मैंने अपनी पूरी जायदाद हाथी के नाम कर दी है। अगर हाथी न रहा तो हमारे परिवार के किसी सदस्य को कुछ भी नहीं मिलेगा।
 

अख्तर का कहना है क बेटा मेरा मेराज पशु तस्करों से मिलकर हाथी बेचने की भी कोशिश की थी। लेकिन, वह पकड़ा गया। मैंने अपनी पूरी जायदाद हाथी के नाम कर दी है। अगर हाथी न रहा तो हमारे परिवार के किसी सदस्य को कुछ भी नहीं मिलेगा।
 


पत्नी को आधी जायदाद लिख दी है और अपने हिस्से की लगभग 5 करोड़ रुपए की जायदाद खेत खलिहान मकान बैंक बैलेंस सभी दोनों हाथियों के नाम कर दिया है। अख्तर का कहना है कि अगर दोनों हाथियों की मौत हो जाती है तो यह जायदाद एरावत संस्था को चली जाएगी.


पत्नी को आधी जायदाद लिख दी है और अपने हिस्से की लगभग 5 करोड़ रुपए की जायदाद खेत खलिहान मकान बैंक बैलेंस सभी दोनों हाथियों के नाम कर दिया है। अख्तर का कहना है कि अगर दोनों हाथियों की मौत हो जाती है तो यह जायदाद एरावत संस्था को चली जाएगी.

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