धान की भूसी से खाना पकाने वाला चूल्हा बना, इंजीनियर्स ने माना-हर मौसम में है कारगर
पटना (Bihar) । पूर्वी चम्पारण जिले के मोतिहारी के रहने वाले अशोक ठाकुर ने भूसी से खाना पकाने वाले चूल्हे को तैयार किया है, जिसकी डिमांड बिहार में खूब है। इस चूल्हे को टेस्टिंग के लिए आईआईटी गुवाहाटी और दिल्ली के टीइआरआई यूनिवर्सिटी भेजा गया था। वहां से मिली रिपोर्ट्स के मुताबिक यह चूल्हा ग्रामीण इलाकों में हर मौसम में कारगर है। बता दें कि बिहार में धान बहुत होता है। यहां चावल ही ज्यादा खाया जाता है। ऐसे में इस चूल्हे की डिमांड ज्यादा है।

सातवीं कक्षा की पढ़ाई छोड़ देने वाले अशोक पारम्परिक चूल्हे बनाते थे, उनमें धान की भूसी ईंधन के रूप में ज़्यादा समय के लिए कामयाब नहीं थी। इसलिए उन्होंने इस चूल्हे को मॉडिफाई करके भूसी के चूल्हे का रूप दिया।
अशोक कहते हैं कि उन्होंने जो भी किया वह उनके सालों के अनुभव से किया। उनके पास कोई फिक्स डिजाईन या फिर लेआउट नहीं था, उन्होंने बस अपने आईडियाज पर काम किया।
इस चूल्हे की खासियत यह है कि इसे कहीं भी लाया-ले जाया सकता है। क्योंकि, इसका वजन सिर्फ 4 किलो है। इसमें धान की एक किलो भूसी लगभग एक घंटे तक जल सकती है। यह चूल्हा धुंआ-रहित है और इसे कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
अशोक बताते हैं कि जब उन्होंने इस चूल्हे को सफलतापूर्वक बना लिया तो उनके इलाके के लोगों ने हाथों-हाथ इसे खरीदा। क्योंकि, सबके घरों में भूसी तो आसानी से उपलब्ध थी ही और अब इस चूल्हे की वजह से उन्हें अन्य किसी ईंधन पर खर्च करने की ज़रूरत नहीं होती। अब तो बाहर से भी हमारे पास लोगों के फोन आते हैं और वे यह चूल्हा मंगवाते हैं।
यह चूल्हा मात्र 650 रुपये का हैं। साल 2013 में ‘ज्ञान और सृष्टि‘ के फाउंडर, अमित गुप्ता को अपनी शोधयात्रा के दौरान अशोक के इस अनोखे जुगाड़ को देखने और समझने का मौका मिला। उन्होंने नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन के इनोवेटर्स की लिस्ट में अशोक का नाम भी शामिल कर लिया।
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