आज ही के दिन हुआ था देश का सबसे बड़ा और विश्व का दूसरा सबसे बड़ा रेल हादसा, नदी में समा गई थी पूरी ट्रेन

First Published 6, Jun 2020, 7:38 PM

सहरसा (Bihar) । 6 जून 1981 में देश का सबसे बड़ा और विश्व का दूसरा सबसे बड़ा रेल हादसा हुआ था। 39 साल पहले आज ही के दिन 9 बोगियों की यात्रियों से खचाखच भरी एक ट्रेन मानसी-सहरसा रेल खंड पर बदला घाट-धमारा घाट स्टेशन के बीच बागमती नदी पर बने पुल संख्या-51 पर पलट गई थी। ट्रेन की सात बोगियां उफनती बागमती में जा गिरी थी। यह ट्रेन मानसी से सहरसा को जा रही थी। बताते हैं कि इस हादसे में तीन सौ लोगों की मौत हो गई थी, लेकिन स्थानीय लोग इस आंकड़ें को बहुत कम मानते हैं।
 

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हादसे के बारे में लोग बताते हैं कि  6 जून 1981 को मानसी तक ट्रेन सही सलामत बढ़ रही थी। शाम तीन बजे ट्रेन, बदला घाट पहुंची। थोड़ी देर रुकने के बाद ट्रेन धीरे-धीरे धमारा घाट की ओर चली।<br />
(फाइल फोटो)</p>


हादसे के बारे में लोग बताते हैं कि  6 जून 1981 को मानसी तक ट्रेन सही सलामत बढ़ रही थी। शाम तीन बजे ट्रेन, बदला घाट पहुंची। थोड़ी देर रुकने के बाद ट्रेन धीरे-धीरे धमारा घाट की ओर चली।
(फाइल फोटो)

<p>ट्रेन ने कुछ ही दूरी तय की थी कि मौसम खराब हो गया। तेज आंधी के बाद बारिश भी होने लगी। तब तक ट्रेन रेल के पुल संख्या 51 के पास पहुंच गई थी। ट्रेन अपनी रफ्तार से दौड़ रही थी कि तभी अचानक ट्रेन के ड्राइवर ने ब्रेक लगा दिया। जिसके बाद पैसेंजर ट्रेन की सात बोगी पुल से बागमती नदी में जा गिरी। <br />
(फाइल फोटो)</p>

ट्रेन ने कुछ ही दूरी तय की थी कि मौसम खराब हो गया। तेज आंधी के बाद बारिश भी होने लगी। तब तक ट्रेन रेल के पुल संख्या 51 के पास पहुंच गई थी। ट्रेन अपनी रफ्तार से दौड़ रही थी कि तभी अचानक ट्रेन के ड्राइवर ने ब्रेक लगा दिया। जिसके बाद पैसेंजर ट्रेन की सात बोगी पुल से बागमती नदी में जा गिरी। 
(फाइल फोटो)

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ट्रेन बागमती नदी पर बनाए गए पुल संख्या 51 को पार कर रही थी। कई लोगों का शव कई दिनों तक ट्रेन की बोगियों में फंसा रहा। इस हादसे में मरने वालों की सरकारी आंकड़े के अनुसार संख्या 300 थी। लेकिन, स्थानीय लोगों के अनुसार हादसे में 800 के करीब लोग मारे गए थे। इस हादसे को देश के सबके बड़े रेल हादसे के रूप में याद किया जाता है।<br />
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ट्रेन बागमती नदी पर बनाए गए पुल संख्या 51 को पार कर रही थी। कई लोगों का शव कई दिनों तक ट्रेन की बोगियों में फंसा रहा। इस हादसे में मरने वालों की सरकारी आंकड़े के अनुसार संख्या 300 थी। लेकिन, स्थानीय लोगों के अनुसार हादसे में 800 के करीब लोग मारे गए थे। इस हादसे को देश के सबके बड़े रेल हादसे के रूप में याद किया जाता है।
(फाइल फोटो)

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कुछ लोग कहते हैं कि जब ट्रेन बागमती नदी को पार कर रही थी तभी ट्रैक पर गाय व भैंस का झुंड सामने आ गई थी जिसे बचाने के चक्कर में ड्राइवर ने ब्रेक मारी थी। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि बारिश तेज थी, आंधी भी थी, जिसके कारण लोगों ने ट्रेन की सभी खिड़कियों को बंद कर दिया और तेज तूफान होने की वजह से पूरा दबाव ट्रेन पर पड़ा और बोगियां नदी में समा गई। हालांकि ड्राइवर ने ब्रेक क्यों लगाई थी, इसका खुलासा नहीं हो पाया है।<br />
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कुछ लोग कहते हैं कि जब ट्रेन बागमती नदी को पार कर रही थी तभी ट्रैक पर गाय व भैंस का झुंड सामने आ गई थी जिसे बचाने के चक्कर में ड्राइवर ने ब्रेक मारी थी। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि बारिश तेज थी, आंधी भी थी, जिसके कारण लोगों ने ट्रेन की सभी खिड़कियों को बंद कर दिया और तेज तूफान होने की वजह से पूरा दबाव ट्रेन पर पड़ा और बोगियां नदी में समा गई। हालांकि ड्राइवर ने ब्रेक क्यों लगाई थी, इसका खुलासा नहीं हो पाया है।
(फाइल फोटो)

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बता दें कि ये देश का सबसे बड़ा और विश्व का दूसरा सबसे बड़ा रेल हादसा हुआ था। विश्व की सबसे बड़ी ट्रेन दुर्घटना श्रीलंका में 2004 में हुई थी। जब सुनामी की तेज लहरों में ओसियन क्वीन एक्सप्रेस समा गई थी। हादसे में सत्रह सौ से अधिक लोगों की मौत हुई थी। <br />
(फाइल फोटो)</p>


बता दें कि ये देश का सबसे बड़ा और विश्व का दूसरा सबसे बड़ा रेल हादसा हुआ था। विश्व की सबसे बड़ी ट्रेन दुर्घटना श्रीलंका में 2004 में हुई थी। जब सुनामी की तेज लहरों में ओसियन क्वीन एक्सप्रेस समा गई थी। हादसे में सत्रह सौ से अधिक लोगों की मौत हुई थी। 
(फाइल फोटो)

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