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बॉलीवुड की वह फिल्म, जिसे इंदिरा गांधी सरकार ने रिलीज के 20 सप्ताह बाद करा दिया था बैन, वजह सिर्फ इतनी सी थी
एंटरटेनमेंट डेस्क. एक ऐसी फिल्म रिलीज हुई, जो 20 सप्ताह तक सिनेमाघरों में चली और फिर इंदिरा गांधी सरकार के दौरान उस पर प्रतिबंध लगा दिया गया। खास बात यह है कि सरकार को फिल्म में एक्ट्रेस का सिगरेट और शराब पीना पसंद नहीं आया था, जो कि बॉलीवुड ही नहीं दुनिया की हर फिल्म में दिखाया जाना आम बात है। यह बात अलग है कि भारतीय फिल्मों में पिछले कुछ सालों से इस तरह के सीन्स के साथ वैधानिक चेतावनी दी जाने लगी है। खैर, हम मुद्दे पर आते हैं और हमारी स्पेशल सीरीज 'अ फ्राइडे फ्रॉम द पास्ट' की आज की कड़ी को आगे बढ़ाते हैं और आपको बताते हैं वह कौन-सी फिल्म थी और कैसे और क्यों फिल्म को सरकार ने बनाया था निशाना। पढ़िए स्लाइड्स में...

हम जिस फिल्म की बात कर रहे हैं, उसका नाम है 'आंधी'। 'आंधी' को मशहूर गीतकार और निर्देशक गुलज़ार ने निर्देशित किया था। फिल्म में संजीव कुमार, सुचित्रा सेन, ओम शिवपुरी, मनमोहन और ए के हंगलने की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
यह फिल्म 14 फ़रवरी 1975 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। इसके लगभग चार महीने बाद 25 जून 1975 से इंदिरा गांधी सरकार ने देश में आपातकाल घोषित कर दिया था।
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बताया जाता है कि खुद इंदिरा गांधी ने फिल्म नहीं देखी थी। लेकिन उन्होंने अपने ऑफिस के दो लोगों को फिल्म देखने के लिए कहा। उस समय के सूचना एवं प्रसारण मंत्री आई. के. गुजराल ने भी फिल्म देखी और इन सभी को यह खूब पसंद आई। खुद गुलजार ने यह कहा कि फिल्म के कैरेक्टर और इंदिरा गांधी में कोई समानता नहीं है।
हालांकि, फिल्म को सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद ही रिलीज किया गया था। लेकिन जैसे ही यह सिनेमाघरों में आई, इस पर बवाल होना शुरू हो गया। वजह थी फिल्म के लीड कैरेक्टर आरती देवी (सुचित्रा सेन) और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बीच की कुछ समानताएं।
फिल्म में आरती देवी का किरदार ऐसी साड़ी पहने दिखाई देता है, जो लोगों को इंदिरा गांधी की झलक दिखाता है। इतने पर उनके बालों में नज़र आई सिल्वर कलर की लकीर भी वैसी ही थी, जैसी इंदिरा गांधी की अधिकतर तस्वीरों में देखने को मिलती है।
लेकिन चिंगारी लगाने के लिए सिर्फ सुचित्रा का किरदार ही काफी नहीं था। इसके कुछ प्रमोशनल मटेरियल ने भी विवाद को हवा दी थी। मसलन, साउथ इंडिया में एक पोस्टर जारी हुआ था, जिसमें लिखा था, "अपनी प्रधानमंत्री को पर्दे पर देखिए।"दिल्ली के एक अखबार में विज्ञापन छपा था, जिसमें लिखा था, "भारत की स्वतंत्रता के बाद एक महान महिला राजनीतिज्ञ की कहानी।"
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सबसे बड़ा विवाद तब से सामने आया, जब गुजरात में विपक्ष के नेताओं ने फिल्म में आरती देवी के सिगरेट और शराब पीने वाले सीन को अपने विधानसभा चुनाव कैंपेन का हिस्सा बनाया।
फिल्म को सिनेमाघरों चलते हुए लगभग 20 सप्ताह हो गए थे। लेकिन इन विवादों के चलते इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया। गुलजार को आरती देवी वाले सीन फिर से शूट करने और फिल्म में इस बात पर जोर देने के आदेश दिए गए कि इसमें कोई बायोग्राफिकल फैक्ट नहीं है। गुलजार ने समस्या का हल निकालने के लिए फिल्म के एक सीन डाला, जिसमें आरती देवी इंदिरा गांधी की तस्वीर के सामने खड़े होकर उन्हें अपना आदर्श बताती है।
1977 में जब जनता पार्टी की सरकार आई तो फिल्म को क्लियरेंस दिया गया और इसके एडिटेड वर्जन को फिर से दिखाने की परमिशन दे दी गई।
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