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चीन में कोरोना ने स्कूलों पर डाला बुरा असर, 10 फोटो में देखिए कैसे हो रही बच्चों की पढ़ाई
एजुकेशन डेस्क। चीन में कोरोना की वजह से बच्चों की पढ़ाई पर भी असर पड़ा है। शंघाई में स्कूलों को बंद कर दिया गया है और नर्सरी तथा चाइल्ड केयर सेंटर में बच्चों को भी आने पर रोक लगा दी गई है। निकट भविष्य में स्कूल खोले जाने की संभावना नहीं दिख रही। बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है। तस्वीरों में देखिए वहां बच्चों की पढ़ाई किस तरह हो रही है।

चीन में कोरोनों के बढ़ते मामले, वहां से आ रही फोटो और वीडियो देखने के बाद इसने 2019 के अंत की कोरोना महामारी के वीभत्स दृश्य की याद दिला दी है।
चीन के सबसे बड़े शहर शंघाई में सभी स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया जा चुका है। यहां नर्सरी और चाइल्ड केयर सेंटर भी बंद हो चुके हैं।
शंघाई के एजुकेशन ब्यूरो के मुताबिक नर्सरी और चाइल्ड केयर सेंटर बंद हो चुके हैं और यहां भी ऑनलाइन एक्टिविटी शुरू कराई जा रही है।
चीन की जीरो-कोविड स्ट्रेटजी को टारगेट करने वाले विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए अधिकारियों ने इस महीने की शुरुआत में कुछ प्रतिबंधों में ढील दी गई थी, मगर स्कूल खोले जाने का आदेश जारी नहीं हुआ।
हालांकि, शंघाई में सरकार ने और शिक्षा मंत्रालय ने कोविड मामलों के बढ़ने और निकट भविष्य में स्कूल खोले जाने की संभावना नहीं देखे के जाने के बाद स्कूल प्रबंधनों से ऑनलाइन कक्षाएं लेने को कहा है।
हालांकि, सख्त लॉकडाउन के बाद ढील देने से चीन में कोविड का खतरा और बढ़ गया और संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ते देखे गए हैं। इसके बाद बैन वापस लगा दिया गया है।
चीन के कोविड परीक्षण और रिपोर्टिंग प्रणालियों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं और रिपोर्ट्स को सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। यह सिर्फ सरकार और जरूरी अधिकारियों को शेयर हो रही है।
ऐसे में यह पता लगाना मुश्किल हो गया है कि चीन में कोरोना का प्रसार इन दिनों किस स्तर पर हो रहा है और यह आंकड़ा कितना बढ़ गया है या फिर आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं या कम हो रहे।
हालांकि, बीच में दावा यह भी किया गया कि 11 दिसंबर तक के आंकड़ों के साथ उसके पहले के आंकड़े और केस पीक पर पहुंच गए, जिसके बाद देशभर में नए संक्रमणों की कुल संख्या में गिरावट दिखाई दे रही है। .
हालांकि, इसमें कितनी सच्चाई है, इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। मगर डाटा कलेक्शन में बदलाव से पहले कुल मामलों की संख्या बीते अप्रैल में पिछली कोविड लहर की तुलना में अधिक थी।
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