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मामूली इलेक्ट्रीशियन के बेटे ने विदेश में पाई 70 लाख की नौकरी, कभी पिता के पास नहीं थे फीस के पैसे
नई दिल्ली. किसी का सपोर्ट मिलना आपको आगे बढ़ने का हौसला देता है लेकिन इस लड़के का मानना है कि किसी का सपोर्ट न मिलने से आप अकेले खुद अपने मुश्किल हालातों से लड़ने की ताकत रखना सीख जाते हैं। गरीबी, भुखमरी में मरने की कगार पर रहने वाले इस लड़के ने वो कर दिखाया है जिसे सुनकर अच्छे-अच्छों के होश उड़ जाएं। हम बात कर रहे हैं एक इलेक्ट्रिशियन के बेटे की जिसने विदेश में 70 लाख पैकेज की नौकरी पाकर सुर्खियां बटोरी थीं। उसकी काबिलियत और संघर्ष की कहानी से वो रातोरात स्टार बन गया था। आइए आपको इस लड़के के बारे में बताते हैं कौन है ये शख्स?
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ये हैं दिल्ली के जामिया नगर में पले-बढ़े मोहम्मद आमिर अली। आमिर बेहद गरीब परिवार से हैं। उनके पिता एक मामूली इलेक्ट्रीशियन हैं जो किसी के घर बिजली खराब होने पर मरम्मत कर दो पैसे कमाते हैं। ऐसे में आमिर के विदेश में नौकरी लगने के बाद पिता और परिवार के लोग भौचक्के रह गए। ये कैसे हुआ और आमिर ने ऐसा क्या किया आइए जानते हैं क्योंकि पिक्चर अभी बाकी है।
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आमिर ने जामिया से डिप्लोमा किया और स्पेशलिस्ट बन गए। इसके बाद वे नौकरी की तलाश करने लगे लेकिन अमेरिकी कंपनी ने उन्हें 70 लाख का सलाना पैकेज देकर होश उड़ा दिए। इतना ज्यादा पैकेज पाने वाले अली पहले जामिया डिप्लोमा होल्डर बने।
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आमिर के संघर्ष की बात करें तो उन्होंने गरीबी के कारण बहुत कुछ झेला। जेईई मेन परीक्षा देने के बाद एनएसआइटी में बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर में आमिर का एडमिशन हो गया था, लेकिन 4 लाख की फीस होने की वजह से उन्होंने पिता को नहीं बताया।
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आमिर ने सोचा मेरे पापा जैसे-तैसे पैसे कमाकर घर चला रहे हैं ऐसे में मेरी 4 लाख फीस भरने के बाद छोटे भाई कैसे पढ़ेंगे, घर कैसे चलेगा? यही सोचर आमिर ने पिता को फीस के बारे में नहीं बताया। हालांकि बाद में उनके पिता ने उन्हें इस बात के लिए डांटा भी।
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बहरहाल आमिर शुरुआत से ही एक होनहार छात्र थे। 2014 में बारहवीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ और बॉयोलॉजी पढ़कर 70.8 फीसद अंक लाने वाले आमिर ने एक साल पढ़ाई छोड़ दी थी। साल 2015 में जामिया विश्वविद्यालय में बीटेक एवं इंजीनियरिंग डिप्लोमा की प्रवेश परीक्षा दी। जामिया से 2015 से 2018 तक उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया। साल 2018 में अमेरिका की फ्रिजन मोटर वर्क्स ने आमिर को बैट्री मैनेजमेंट सिस्टम इंजीनियर का पद ऑफर किया, इस बात से वो देशभर में चर्चा में आ गए थे।
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आमिर मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मेरठ के रहने वाले हैं। उन्होंने जामिया के सेंटर फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (सीआइई) के तहत इलेक्ट्रिक कार प्रोजेक्ट पर काम किया था।
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आमिर के पिता शमशाद अली जामिया में इलेक्ट्रीशियन हैं। उन्होंने कर्जा लेकर 40 से 50 हजार रुपये तक की एक मारुति 800 कार खरीदकर आमिर को दी। आमिर ने अपनी मेहनत से इसे इलेक्ट्रिक चार्जिंग कार में बना डाला था। आमिर का काम देश-विदेश की कई कंपनियों की नजर में आया। जामिया के पॉलिटेक्निक के प्रोफेसर वकार आलम और सीआइई के सहायक निदेशक डॉ. प्रभाष मिश्र के नेतृत्व में आमिर ने प्रोजेक्ट पूरा किया।
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मशीनों से मोहब्बत करने वाले आमिर की मेहनत और जज्बा ही है कि उन्होंने गरीबी को मुंह चिढ़ा और मौजूद सुविधाओं में रहकर अपने पिता और देश का नाम रोशन किया। मैकेनिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों को आमिर से प्रेरणा लेनी चाहिए। उनके संघर्ष की कहानी आज भी छात्रों को प्रेरणा के तौर पर सुनाई जाती है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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