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फर्जी निकले कई नेताओं के दावे; पुलिस के सामने RSS के वर्कर ने नहीं शाहरुख ने दागी थीं गोलियां
नई दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दिल्ली आगमन से ठीक पहले नागरिकता कानून के समर्थन और विरोध को लेकर दिल्ली में दो गुटों में हुई मुठभेड़ के बाद हिंसा भड़क गई। यहां लगातार दूसरे दिन भी हुईं झड़पों ने उग्र रूप ले लिया। उत्तर-पूर्व दिल्ली के जाफराबाद में एक युवक ने कथित तौर पर आठ राउंड फायरिंग कर हिंसा को और भड़का दिया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद फेसबुक, ट्रविटर पर दावा किया जा रहा था कि, ये शख्स सीएए के समर्थन में प्रदर्शन करने वाले ग्रुप से था जो पुलिस की मौजूदगी में फायरिंग कर रहा था। आम आदमी पार्टी के एक नेता ने शख्स को आरएसएस और बीजेपी का कार्यकर्ता होने का दावा किया। फैक्ट चेक में आइए जानते हैं वायरल हो रही इस खबर की पूरी सच्चाई आखिर क्या है...
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दिल्ली के शाहीन बाग में पिछले 2 महीने से विरोध प्रदर्शन जारी है। शाहीनबाग की तर्ज पर दिल्ली के मौजपुर में भी प्रोटेस्ट शुरू हुआ और महिलाएं धरने पर बैठीं। धरने के दो दिन बाद जाफराबाद और भजनपुरा में हिंसक वारदात सामने आई जिसके बाद अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े नेता नेता और दूसरे लोग अपने-अपने नजरिए से हिंसा को एंटी सीएए और प्रो-सीएए खांचे में प्रस्तुत कर दावे करने लगे।
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सबसे पहले द हिंदू के वरिष्ठ रिपोर्टर सौरभ त्रिवेदी ने घटना का वीडियो पोस्ट किया और कहा कि एक विरोधी सीएए प्रदर्शनकारी ने जाफराबाद में गोलीबारी की। वीडियो में एक शख्स दिल्ली पुलिस के जवानों के सामने हाथों में बंदूक किए फायरिंग करता नजर आ रहा है। उसके पीछे उप्रद्रवियों की भीड़ है। वह शख्स अकेले पुलिस कर्मी की ओर बंदूक से इशारा करते देखा जा सकता है। खबरों के मुताबिक इस शूटर ने हिंसा में करीब आठ राउंड फायरिंग की थी।
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इस शख्स को आम आदमी पार्टी के नेता अमानतुल्लाह खां सहित कुछ लोगों ने दावे से कहा कि फायरिंग करने वाला शख्स बीजेपी और आरएसएस का कार्यकर्ता है। अमानतुल्लाह ने शख्स का वीडियो पोस्ट कर लिखा, "बीजेपी दिल्ली में दंगे करवा रही है, इस शख्स का रिश्ता पक्का कपिल मिश्रा के साथ होगा।" वीडियो के साथ ये भी दावा किया जा रहा कि भीड़ के हाथों में भगवा झंडे थे। उप्रद्रवी सीएए के विरोधियों पर फायरिंग कर रहे थे। साथ ही ये भी कहा जा रहा कि, बीजेपी के कार्यकर्ता होने के नाते पुलिस तमाशबीन बनकर इन्हें देखती रही। शाहीन बाग ऑफिसियल नाम के फेसबुक पेज से भी शख्स को लेकर कुछ ऐसा ही दावा किया गया। वहीं राजनीतिक पहचान रखने वाले सलमान निजामी ने भी वीडियो में फायरिंग करने वाले शख्स को सीएए के समर्थन में हिंसा भड़काने वाला बताया।
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फैक्ट चेकिंग में ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई जो उपद्रवियों के बीजेपी या आरएसएस से जुड़े होने का संबंध बताती हो। हालांकि दिल्ली पुलिस की जानकारी के आधार पर मीडिया ने फायरिंग करने वाले शख्स की पहचान शाहरुख के रूप बताई। वीडियो में शाहरुख के पीछे दिख रही भीड़ के हाथ में भगवा झंडे नहीं बल्कि प्लास्टिक की कैरेट्स थीं। वीडियो को जूम करके देखने पर मालूम होता है कि भीड़ प्लास्टिक की कैरट्स को ढाल बनाकर हिंसा भड़का रही थी।
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फैक्ट चेक में सोशल मीडिया पर जाफराबाद में हुई फायरिंग और हिंसा में भगवा झंडे को लेकर दंगे भड़काने का दावा झूठा साबित होता है। उपद्रवियों के हाथों में प्लास्टिक कैरेट्स थीं।
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