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Fact Check. दिल्ली हिंसा में पुलिसवाले ने बच्चे को पीटा? फोटो शेयर करने से पहले जान लें पूरा सच
नई दिल्ली. संशोधित नागरिकता कानून (CAA 2019) को लेकर राजधानी में फरवरी 23-24 को दंगे भड़क गए थे। इस बीच कानून के विरोधी और समर्थकों के बीच तीखी झड़पे हुईं। दिल्ली के मौजपुर, भजनपुरा और मुस्ताफाबाद इलाकों में हिंसा भड़क गई। हिंसा को लेकर सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियोज तैर रहे हैं। इनमें दिल्ली पुलिस की उपद्रवियों पर लाठीचार्ज और मारपीट की फोटोज भी शामिल हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर लोगों ने एक तस्वीर को लेकर दावा किया कि, एक पुलिसवाले ने बच्चे को लाठी से मारा। फैक्ट चेक में आइए जानते हैं वायरल हो रही इस खबर की पूरी सच्चाई आखिर क्या है.......
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फेसबुक, ट्वीटर सभी जगह से तस्वीर शेयर हो रही है। दिल्ली हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस के रवैये को लेकर लोग सवाल उठा रहे हैं। कुछ लोगों ने दिल्ली पुलिस को बच्चों पर मर्दानगी दिखाने के आरोप लगाए।
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फेसबुक यूजर अनिल कुमार यादव ने एक तस्वीर शेयर की जिसमें एक पुलिसवाला बच्चे पर लाठी चलाता दिख रहा है। इस तस्वीर के साथ लिखा, ‘बहुत बड़े आतंक को पीटते हुए दिल्ली पुलिस।’
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कांग्रेस सदस्य उदित राज ने भी अपने वेरिफाइड ट्विटर हैंडल से यही तस्वीर शेयर की और साथ में लिखा, ‘याद रखो, एक बच्चे की हत्या, एक औरत की मौत, एक आदमी का गोलियों से चिथड़ा तन, किसी शासन का ही नहीं, संपूर्ण राष्ट्र का है पतन।’हालांकि राज ने तस्वीर को साफ तौर पर दिल्ली हिंसा का नहीं बताया। दावा किया जा रहा है कि, ये दिल्ली दंगों के तस्वीर है।
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अब सवाल उठता है कि सच क्या है? तस्वीर भारत की राजधानी दिल्ली की नहीं या नहीं? तो हम आपको बता दें कि, ये फोटो दस साल पुरानी है और दिल्ली तो क्या भारत के किसी कोने की नहीं है। फैक्ट चेकिंग में हमने जांच-पड़ताल की तो पाया कि वायरल फोटो गूगल पर दिल्ली हिंसा होने के पहले से मौजूद है। रिवर्स इमेज सर्च करने से हमें The Guardian की 30 जून, 2010 को छपी एक रिपोर्ट का लिंक मिला। फोटो बांग्लादेश की राजधानी ढाका की है। फोटोग्राफर मुनीर उज़ ज़मान ने तस्वीर खींची थी, तब खबर छपी थी कि, यह तस्वीर ढाका में कपड़ा कारीगरों से झड़प के दौरान बांग्लादेशी पुलिसवाले द्वारा एक बच्चे को पीटने की है। रिपोर्ट के मुताबिक, ढाका में मेहनताने में बढ़ोतरी की मांग लिए टेक्स्टाइल वर्करों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े, पानी की बौछारें की और लाठियां भी चलाई।
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फैक्ट चेकिंग में मिले आकड़ों के आधार पर हम ये कह सकते हैं कि, तस्वीर दिल्ली हिंसा की नहीं है। दिल्ली पुलिस की बर्बरता बताकर तस्वीर को तनाव भड़काने के इरादों के तहत शेयर किया जा रहा है। ऐसे में इस तस्वीर को शेयर करने से बचें।
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