भूखे प्यासे आ रहे मजदूरों को पुलिस भेज रही वापस, बिलखते हुए बोले घर जाने दो 5 दिन से कुछ नहीं खाया

First Published 17, May 2020, 7:54 PM


अम्बाला (हरियाणा). लॉकडाउन में बेरोजगार हुए मजदूरों के पलायन की कई तस्वीरें सामने आ रही हैं। जहां वह भूखे-प्यासे रहकर तीखी धूप सहन करते हुए अपने सिर पर भारी-भरकम वजन लिए अपने गांव के लिए चले जा रहे हैं। लेकिन जैसे-तैसे वह अपने राज्यों की सीमा पर पहुंचे तो पुलिस उनको रोक रही है। उन्हें स्टेट की बॉर्डर से वापस भेजा जा रहा है। रोते-बिलखते मजदूरों की ऐसी ही कुछ तस्वीरें हरियाणा-पंजाब सीमा से सामने आई हैं।
 

<p>यह तस्वीर हरियाणा-पंजाब बॉर्डर की है, जहां महिला पांच दिन में पैदल चलकर अपने राज्य की सीमा पर पहुंची थी, लेकिन जैसे वह बॉर्डर पहुंची तो पुलिस वालों ने उसको अंदर नहीं जाने दिया। वह पुलिसवालों के सामने गिड़गिड़ाती रही, सर जाने दो..छोटे-छोटे बच्चे हैं भूखे मर जाएंगे, लेकिन उसकी एक नहीं सुनी वह बिलख-बिलखकर रोने लगी, मिन्नतें करती रही इसके बाद भी उसको हरियाणा रोडवेज की बस में बैठाकर वापिस पंजाब छोड़ दिया गया।&nbsp;</p>

यह तस्वीर हरियाणा-पंजाब बॉर्डर की है, जहां महिला पांच दिन में पैदल चलकर अपने राज्य की सीमा पर पहुंची थी, लेकिन जैसे वह बॉर्डर पहुंची तो पुलिस वालों ने उसको अंदर नहीं जाने दिया। वह पुलिसवालों के सामने गिड़गिड़ाती रही, सर जाने दो..छोटे-छोटे बच्चे हैं भूखे मर जाएंगे, लेकिन उसकी एक नहीं सुनी वह बिलख-बिलखकर रोने लगी, मिन्नतें करती रही इसके बाद भी उसको हरियाणा रोडवेज की बस में बैठाकर वापिस पंजाब छोड़ दिया गया। 

<p>यह तस्वीर पंजाब बॉर्डर की है, जहां लुधियाना से पैदल चलकर आई महिला कहती रही सर भूखे-प्यासे हाल में यहां तक पहुंचे हैं। घर जाने दो, अब हमारा कोई ठिकाना नहीं है, कहां &nbsp;रहेंगे। मकान मालिक कहता है किराया लाओ तभी रहने देंगे। राशन भी खत्म हो गया है, कई से भर पेट खाना नहीं खाया है, साहब हाथ जोड़ती हूं चले जाने दो। लेकिन पुलिस ने उसको अंदर नहीं जाने दिया।<br />
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यह तस्वीर पंजाब बॉर्डर की है, जहां लुधियाना से पैदल चलकर आई महिला कहती रही सर भूखे-प्यासे हाल में यहां तक पहुंचे हैं। घर जाने दो, अब हमारा कोई ठिकाना नहीं है, कहां  रहेंगे। मकान मालिक कहता है किराया लाओ तभी रहने देंगे। राशन भी खत्म हो गया है, कई से भर पेट खाना नहीं खाया है, साहब हाथ जोड़ती हूं चले जाने दो। लेकिन पुलिस ने उसको अंदर नहीं जाने दिया।
 

<p>तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि वह किस तरह से बिलख रहे हैं। कई मजदूर पिछले एक-एक सप्ताह से पैदल चले हुए थे। उनके पैर सूज गए हैं। भूखे-प्यासे चले जा रहे हैं। लेकिन यहां आकर उनको निराशा लगी, वह यही कह रहे हैं कि गरीबों की तो सरकार भी नहीं सुनती है। हम कोरोना से तो नहीं, भूख से जरूर मर जाएंगे।</p>

तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि वह किस तरह से बिलख रहे हैं। कई मजदूर पिछले एक-एक सप्ताह से पैदल चले हुए थे। उनके पैर सूज गए हैं। भूखे-प्यासे चले जा रहे हैं। लेकिन यहां आकर उनको निराशा लगी, वह यही कह रहे हैं कि गरीबों की तो सरकार भी नहीं सुनती है। हम कोरोना से तो नहीं, भूख से जरूर मर जाएंगे।

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वहीं अम्बाला बॉर्डर पर तैनात पुलिस इंस्पेक्टर अजीत सिंह का कहना है कि पैदल लोग सड़क पर चल रहे हैं। उन्हें बसों से वापिस वहीं छोड़ा जा रहा है, जहां से वे आए हैं। इन्हें सरकार बसों व ट्रेन के जरिए घरों तक पहुंचाएगी।&nbsp;</p>


वहीं अम्बाला बॉर्डर पर तैनात पुलिस इंस्पेक्टर अजीत सिंह का कहना है कि पैदल लोग सड़क पर चल रहे हैं। उन्हें बसों से वापिस वहीं छोड़ा जा रहा है, जहां से वे आए हैं। इन्हें सरकार बसों व ट्रेन के जरिए घरों तक पहुंचाएगी। 

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