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शहीद पिता को सैल्यूट करके रोते हुए बोला 10 साल का बेटा-पापा की तरह मैं भी सेना में जाऊंगा

First Published May 19, 2020, 11:20 AM IST
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गुड़गांव, हरियाणा. पिता को आखिरी विदाई देते वक्त बेशक 10 साल के बेटे के आंख से आंसू थम नहीं रहे थे, लेकिन उसका जज्बा देखने लायक था। यह कहानी जम्मू-कश्मीर के डोडा में शहीद हुए लांस नायक राज सिंह खटाना की है। सोमवार को जब उनका अंतिम संस्कार किया जा रहा था, तो पिता को सैल्यूट करते हुए मासूम बोला कि अब वो भी सेना में भर्ती होगा। बता दें कि रविवार को आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान गुड़गांव के दमदमा गांव निवासी राज सिंह शहीद हो गए थे। सोमवार दोपहर राजकीय सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान मौजूद लोगों ने नारे लगाए-‘जब तक सूरज चांद रहेगा, राज सिंह तेरा नाम रहेगा और भाई राज सिंह अमर रहें।’ 
 

शहीद के पार्थिव शरीर के साथ आए 10 राष्ट्रीय राइफल्स के सूबेदार दयाराम ने बताया कि 16 मई को आतंकवादियों को छुपे होने की सूचना मिली थी। इसके बाद 17 मई की सुबह जम्मू-कश्मीर पुलिस और सेना ने संयुक्त अभियान चलाया था। आतंकवादियों के हमले में राज सिंह घायल हो गए थे। इसके बावजूद उन्होंने एक आतंकवादी को मार गिराया था। (तस्वीर-पिता को अंतिम सलामी देता 10 साल का बेटा रिषभ)

शहीद के पार्थिव शरीर के साथ आए 10 राष्ट्रीय राइफल्स के सूबेदार दयाराम ने बताया कि 16 मई को आतंकवादियों को छुपे होने की सूचना मिली थी। इसके बाद 17 मई की सुबह जम्मू-कश्मीर पुलिस और सेना ने संयुक्त अभियान चलाया था। आतंकवादियों के हमले में राज सिंह घायल हो गए थे। इसके बावजूद उन्होंने एक आतंकवादी को मार गिराया था। (तस्वीर-पिता को अंतिम सलामी देता 10 साल का बेटा रिषभ)

राज सिंह चार बहनों और तीन भाइयों में दूसरे नंबर के थे। उन्होंने खेड़ला गांव के स्कूल से 12वीं की थी। वे सितंबर 2011 में सेना में भर्ती हुए थे। इनके पिता हवलदार गजराज सिंह भी सेना में रहे थे। उनका 6 वर्ष पहले निधन हो चुका है।

राज सिंह चार बहनों और तीन भाइयों में दूसरे नंबर के थे। उन्होंने खेड़ला गांव के स्कूल से 12वीं की थी। वे सितंबर 2011 में सेना में भर्ती हुए थे। इनके पिता हवलदार गजराज सिंह भी सेना में रहे थे। उनका 6 वर्ष पहले निधन हो चुका है।

शहीद के तीन बच्चे  रिषभ (10), इशिका (6) तथा अनुराग (4) हैं। उन्हें रिषभ ने मुखाग्नि दी। शहीद की पत्नी रवीता ने कहा कि उन्हें गर्व है कि उनके पति देश के काम आए।

शहीद के तीन बच्चे  रिषभ (10), इशिका (6) तथा अनुराग (4) हैं। उन्हें रिषभ ने मुखाग्नि दी। शहीद की पत्नी रवीता ने कहा कि उन्हें गर्व है कि उनके पति देश के काम आए।

राज सिंह खेल कोटे से सेना में भर्ती हुए थे। वे हमेशा से ही अपने पिता की तरह सेना में जाने की बात कहा करते थे।

राज सिंह खेल कोटे से सेना में भर्ती हुए थे। वे हमेशा से ही अपने पिता की तरह सेना में जाने की बात कहा करते थे।

सोमवार को जब शहीद का पार्थिव शरीर घर पहुंचा, तो मां का रो-रोकर बुरा हाल हो गया था।

सोमवार को जब शहीद का पार्थिव शरीर घर पहुंचा, तो मां का रो-रोकर बुरा हाल हो गया था।

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