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एक और अन्नदाता ने लगाया मौत को गले, मरने से पहले लिखा-क्यों तारीख पर तारीख दे रही है मोदी सरकार

First Published Feb 7, 2021, 4:54 PM IST
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बहादुरगढ़ (हरियाणा). कृषि कानून के विरोध में आंदोलन लगातार 74 दिन से जारी है। मोदी सरकारी की तमाम कोशिशों के बावजूद के बाद भी पंजाब हरियाणा के किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। अब यह आंदोलन उनके लिए जान से भी ज्यादा कीमती हो गया है। हरियाणा बहादुरगढ़ दिल्ली बॉर्डर पर धरने पर बैठे एक और किसान ने रविवार को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। अन्नदाता ने मरने से पहले केंद्र सरकार के नाम एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है। बता दें कि अब तक किसान आंदोलन में 200 से ज्यादा मौत हो चुकी है। इसके बावजदू भी किसान पीछे नहीं हट रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक तीनों कानून वापस नहीं होते वह डटे रहेंगे।
 


दरअसल, जिस किसान ने आत्महत्या की है उसकी पहचान  52 वर्षीय कर्मवीर सिंगवाल के रूप में हुई है। वह मूलरुप से जींद जिले के सिंघोवाल गांव का रहने वाला था। कर्मवीर  पिछले दो महीने से ज्यादा से धरना दे रहा था। रविवार को बहादुरगढ़ के बाईपास पर नए बस स्टैंड के पास एक पेड़ पर रस्सी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने किसानों की मौजूदगी में शव को फंदे से उतारा और पोस्टमॉर्टम के लिए सिविल अस्पताल में भिजवा दिया है। 
 


दरअसल, जिस किसान ने आत्महत्या की है उसकी पहचान  52 वर्षीय कर्मवीर सिंगवाल के रूप में हुई है। वह मूलरुप से जींद जिले के सिंघोवाल गांव का रहने वाला था। कर्मवीर  पिछले दो महीने से ज्यादा से धरना दे रहा था। रविवार को बहादुरगढ़ के बाईपास पर नए बस स्टैंड के पास एक पेड़ पर रस्सी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने किसानों की मौजूदगी में शव को फंदे से उतारा और पोस्टमॉर्टम के लिए सिविल अस्पताल में भिजवा दिया है। 
 


किसान कर्मवीर सिंगवाल ने मरने से पहले सुसाइड नोट में लिखा-प्यारे किसान भाइयो  ये मोदी सरकार तारीख पर तारीख देती जा रही है। लेकिन पता नहीं कब ये ये काले कानून को रद्द करेगी। हमने भी ठान लिया है जब तक कानून रद्द नहीं होंगे हम यहां से नहीं जाएंगे। चाहे कुछ हो जाए।


किसान कर्मवीर सिंगवाल ने मरने से पहले सुसाइड नोट में लिखा-प्यारे किसान भाइयो  ये मोदी सरकार तारीख पर तारीख देती जा रही है। लेकिन पता नहीं कब ये ये काले कानून को रद्द करेगी। हमने भी ठान लिया है जब तक कानून रद्द नहीं होंगे हम यहां से नहीं जाएंगे। चाहे कुछ हो जाए।


मृतक किसान के साथियों ने बताया कि  कर्मवीर किसानों के दर्द और मोदी सरकार की जिद से दुखी था। वह अक्सर कहता था कि अब जान भले ही क्यों ना चली जाए, लेकिन कानून लागू नहीं होने देंगे। बता दें कि  कर्मवीर अपने सुसाइन नोट की शुरूआत में 'भारतीय किसान यूनियन जिंदाबाद' से की है।


मृतक किसान के साथियों ने बताया कि  कर्मवीर किसानों के दर्द और मोदी सरकार की जिद से दुखी था। वह अक्सर कहता था कि अब जान भले ही क्यों ना चली जाए, लेकिन कानून लागू नहीं होने देंगे। बता दें कि  कर्मवीर अपने सुसाइन नोट की शुरूआत में 'भारतीय किसान यूनियन जिंदाबाद' से की है।


बता दें कि अब तक पंजाब-हरियाणा से लेकर कई राज्यों के किसान की इस आंदोलन के दौरान मौत हो चुकी है। मरने वाले किसानों का आंकड़ा  किसान  200 तक पहुंच गया है। जिसमें 10 से ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की है। तो वहीं कइयों की धरने को दौरैन ठंड या दिल के दौरे की वजह से मौत हो गई। 
 


बता दें कि अब तक पंजाब-हरियाणा से लेकर कई राज्यों के किसान की इस आंदोलन के दौरान मौत हो चुकी है। मरने वाले किसानों का आंकड़ा  किसान  200 तक पहुंच गया है। जिसमें 10 से ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की है। तो वहीं कइयों की धरने को दौरैन ठंड या दिल के दौरे की वजह से मौत हो गई। 
 

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