तो कुछ भी नहीं बिगाड़ पाएगा कोरोना, भारत में भी तैयार हो रही है वायरस की वैक्सीन
हैदराबाद. कोरोना महामारी को रोकने के लिए सभी देश जी जान से इसकी दवा खोजने में जुटे हुए हैं। हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक भी CoroFlu नाम की वैक्सीन विकसित कर रहा है। जहां अब तक सभी देश इसके ऐसे वैक्सीन की खोज में जुटे हैं जिसे शरीर के अंदर इंजेक्ट किया जा सके। वहीं भारत जिस वैक्सीन को बना रहा है उसे पीड़ित इंसान की नाक में डाला जाएगा।
18

कोरोफ्लू ,फ्लू की दवाई एम2एसआर के बेस पर बनाई जा रही है। एम2एसआर इनफ्लूएंजा बीमारी की एक ताकतवर दवा है। इसे योशिहिरो कावाओका और गैब्रिएल न्यूमैन ने मिलकर बनाया था।
Add Asianetnews Hindi as a Preferred Source

28
इस वैक्सीन को विकसित करने के लिए भारत बायोटेक ने यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मैडिसन और फ्लूजेन कंपनी के साथ समझौता किया है। तीनों संस्थानों के वैज्ञानिक मिलकर इस वैक्सीन को विकसित करेंगे।
38
जब इस दवा को शरीर में डाला जाता है तो वह तुरंत शरीर में फ्लू के खिलाफ लड़ने के लिए एंटीबॉडीज बनाती है। एम2एसआर दवा के अंदर इस बार योशिहिरो कावाओका ने कोविड-19 का जीन सीक्वेंस मिला दिया है।
48
इस दवा का पूरा नाम है- कोरोफ्लूः वन ड्रॉप कोविड-19 नेसल वैक्सीन। कंपनी का दावा है कि यह वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित है। क्योंकि इससे पहले भी फ्लू के लिए बनाई गई दवाइयां सुरक्षित थीं ।
58
M2SR बेस पर बनने वाली कोरोफ्लू दवा में कोविड-19 का जीन सीक्वेंस मिलाने से अब यह दवा संक्रमण से लड़ने के लिए तैयार हो गई । यानी जब यह वैक्सीन मरीज के शरीर में डाली जाएगी तब उसके शरीर में कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बन जाएंगे।
68
भारत बायोटेक की बिजनेस डेवलपमेंट हेड डॉ. रैशेस एला ने बताया कि हम भारत में इस वैक्सीन का उत्पादन करेंगे। उनका क्लीनिकल ट्रायल भी यही होगा और फिर यहीं से 300 मिलियन डोज भी बनाए जाएंगे।
78
इस वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल अभी बाकी है। कंपनी इंसानों पर क्लीनिकल ट्रायल साल 2020 के अंत तक करना शुरू करेगी। तब तक इसके परीक्षण प्रयोगशाला में चलते रहेंगे।
88
एम2 एसआर एक बेहद सफल दवा है। इसका कारण है कि एम2एसआर एक फ्लू वायरस है। जिसमें एम2 जीन की कमी होती है। यही कारण है की इस दवा से कोई भी वायरस शरीर के अंदर कोशिकाओं को तोड़कर नए वायरस नहीं बना पाता।
Latest Videos