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Assam flood: असम में बाढ़ का पानी अभी उतरा भी नहीं था कि फिर से बज गई खतरे की घंटी, 55 लाख लोग प्रभावित हैं
गुवाहाटी. असम में बाढ़ की स्थित(flood situation in Assam) में अभी कोई सुधार हुआ भी नहीं था कि मौसम विभाग(IMD) ने फिर भारी बारिश का अलर्ट जारी कर दिया है। मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी से आने वाली दक्षिण-पश्चिमी हवा के प्रभाव से अगले 4-5 दिनों में पश्चिम बंगाल में भारी बारिश होने की संभावना है। ब्रह्मपुत्र और बराक नदियों का जलस्तर बढ़ने से असम में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के कई इलाकों में पानी भरा हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, असम में 32 जिलों के 55 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। मई के मध्य से अब तक दो बाढ़ों के कारण अब तक 89 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं

राज्य के 36 में से 32 जिलों में जारी बाढ़ से कुल 55,42,053 लोग प्रभावित हुए हैं। असम स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथारिटी के एक बुलेटिन के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान बाढ़ के कारण सात और लोगों की मौत हो गई, जिससे मरने वालों की संख्या 89 हो गई। बुलेटिन के अनुसार सबसे बुरी तरह प्रभावित जिलों में बारपेटा है, जहां 12,51,359 लोग बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं। धुबरी में 5,94,708 और दरांग में 5,47,421 लोग प्रभावित हैं।
इस बीच मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा जिले में बाढ़ प्रभावित इलाकों की स्थिति की समीक्षा करने के लिए ट्रेन से नगांव गए। उन्होंने वहां कुछ राहत शिविरों का दौरा किया। नगांव बाढ़ की मौजूदा लहर से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यहां 4,57,381 से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। 15,188 लोगों ने 147 राहत शिविरों में शरण ली है। मुख्यमंत्री ने एक tweet करके कहा गुवाहाटी से चपरमुख और कामपुर में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों मे जाने के लिए उन्होंने ट्रेन से यात्रा की। सरमा ने कहा कि कोपिली के बाढ़ के पानी ने नगांव जिले के बड़े इलाकों में पानी भर दिया है। भविष्य में इस तरह की आपदा की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
बराक घाटी के तीन जिलों कछार, करीमगंज और हैलाकांडी में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। बराक और कुशियारा नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है, जिससे घाटी का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए नेशनल डिजास्टर रिस्पोंस फोर्स (NDRF) के जवानों को कछार जिलों में तैनात किया गया है। वहीं, बाकी दो जिलों में स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (SDRF) के अलावा अन्य एजेंसियों के प्रतिनिधियों को तैनात किया गया है।
कछार जिले के 506 गांवों में 2,16,851 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। करीमगंज में 1,47,649 और हैलाकांडी में लगभग एक लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं।
बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए ऑयल इंडिया लिमिटेड ने मुख्यमंत्री राहत कोष में 5 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री रामेश्वर तेली और कंपनी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक सुशील कुमार मिश्रा को योगदान के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि इससे बाढ़-राहत कार्य में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।
लगातार बारिश के कारण आई विनाशकारी बाढ़ से 121 राजस्व मंडल और 5,577 गांव प्रभावित हुए हैं, जबकि 2,62,155 लोगों ने 862 राहत शिविरों में शरण ली है।
सेंट्रल वॉटर कमिशन (सीडब्ल्यूसी) के बुलेटिन के अनुसार, नागांव जिले के कामपुर में कोपिली नदी और निमाटीघाट, तेजपुर, गुवाहाटी, कामरूप, गोलपारा और धुबरी में ब्रह्मपुत्र नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। पुथिमारी, पगलाडिया, बेकी बराक और कुशियारा जैसी कई अन्य नदियों का जलस्तर भी खतरे के निशान से ऊपर है।
राज्य में 108306.18 हेक्टेयर खेती वाला क्षेत्र और 36,60,173 पशु प्रभावित हुए हैं। सात तटबंध टूट गए हैं, जबकि 316 सड़कें और 20 पुल डैमेज हो गए हैं। काजीरंगा नेशनल पार्क में बाढ़ के पानी से कुल 233 शिविरों में से कम से कम 26 डूब गए हैं।
मुख्यमंत्री मौजूदा बाढ़ की स्थिति की समीक्षा के लिए सिलचर का दौरा करने वाले हैं। परिवहन मंत्री परिमल शुक्लाबैद्य कछार के सिलचर में डेरा डाले हुए हैं और तीनों जिलों के स्थानीय विधायकों, डिप्टी कमिश्नर्स और सीनियर अधिकारियों के साथ बराक घाटी में बाढ़ की स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।
असम में बाढ़ से सिर्फ इंसान ही प्रभावित नही हुए हैं, बड़ी संख्या में जानवरों पर भी संकट मंडरा रहा है। उन्हें बचाने की जदद्दोजहद भी है।
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