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क्या है कोरोना को हराने का भीलवाड़ा मॉडल, जिसके जरिए 20 दिन के अंदर वायरस को फैलने से रोक दिया
नई दिल्ली. देश में कोरोना संक्रमण से 6399 लोग बीमार हो चुके हैं। यह आंकड़ा 9 अप्रैल की शाम 7 बजे तक का है। कई जगहों पर कोरोना के केस कम हुए हैं, लेकिन ज्यादातर जगहों पर कोरोना संक्रमण बढ़ा है। ऐसे में अचानक भीलवाड़ा मॉडल की चर्चा होने लगी है। मीडिया रिपोर्ट्स से लेकर ट्विटर यूजर्स तक भीलवाड़ा मॉडल को अपनाकर कोरोना को खत्म करने की बात कह रहे हैं। ऐसे में जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर भीलवाड़ा मॉडल क्या है, जिसके जरिए कोरोना पर जीत पाई जा सकती है
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राजस्थान के शहर भीलवाड़ा ने 20 दिन के अंदर कोरोना को हरा दिया था। राजस्थान में कोरोना के कुल 430 मरीज आ चुके हैं। उसमें भीलवाड़ा में 27 लोग कोरोना संक्रमित थे।
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दरअसल भीलवाड़ा में 27 मरीज कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। 19 मार्च को पहला मरीज आया था। अगले दिन पांच और मरीज आते ही जिला कलेक्टर राजेंद्र भट्ट ने कर्फ्यू लगा दिया।
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3 अप्रैल को 10 दिन का महाकर्फ्यू लगा दिया गया। यही कोरोना को रोकने में मील का पत्थर साबित हुआ। तीन डॉक्टर सहित 21 संक्रमित ठीक कर दिए।
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भीलवाड़ा में 55 वार्डों में नगर परिषद के जरिए दो बार सैनिटाइजेशन करवाया जाता था। हर गली-मोहल्ले, कॉलोनी में हाइपोक्लोराइड का छिड़काव करवाया जाता था।
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इसके अलावा जिस अस्पताल से संक्रमण फैला था, उसे सील कर दिया गया। 22 फरवरी से 19 मार्च तक आए मरीजों की लिस्ट निकलवाई गई। 4 राज्यों के 36 और राजस्थान के 15 जिलों के 498 मरीज सामने आए। इन सभी को कलेक्टर को सूचना देकर आइसोलेट किया गया।
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अस्पताल के 253 स्टाफ और जिले के 7 हजार मरीजों की स्क्रीनिंग की गई। देश में पहली बार 25 लाख लोगों की स्क्रीनिंग कराई गई। इसके लिए छह हजार कर्मचारी लगे। 7 हजार से अधिक संदिग्ध होम क्वारंटीन किए गए। एक हजार लोगों को 24 होटल, रिसोर्ट और धर्मशालाओं में क्वारंटीन किया गया।
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डाटा कलेक्शन पर सबसे ज्यादा जोर- भीलवाड़ा में डाटा कलेक्शन पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम रात में तीन-तीन बजे तक संक्रमित और उनसे मिलने वाले लोगों का डाटा कलेक्शन किया जाता था। अगले दिन सुबह कलेक्टर के टेबल पर रिपोर्ट होती थी।
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डॉक्टर 7 दिन ड्यूटी करते फिर 14 दिन क्वारेंटाइन में रहते- कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करने के दौरान डॉक्टर संक्रमित न हो, इसलिए 7 दिन की ड्यूटी के बाद उन्हें 14 दिन के लिए क्वांरेंटाइन किया जाता था। नतीजा यह हुआ कि अब तक 69 स्टाफ में से एक भी संक्रमित नहीं हुआ।
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पहले कर्फ्यू फिर महाकर्फ्यू- भीलवाड़ा में 20 मार्च को कोरोना का पहला मरीज मिला। जिसके बाद कर्फ्यू लगा दिया गया। 14 दिन तक कर्फ्यू के बाद 3 से 13 अप्रैल तक दस दिन के लिए महाकर्फ्यू लगाया गया है।
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जहां कोरोना का मरीज, वहां लगा कर्फ्यू- जहां भी कोरोना संक्रमित मिलता वहां कर्फ्यू लगा दिया जाता था। प्रशासन ने जिले की सीमाएं सील कर दीं। 20 चेक पोस्ट बनाकर कर्मचारी तैनात कर दिए, ताकि न कोई बाहर से आ सके, न जिले से बाहर जा सके। सभी बसें और ट्रेन बंद कराईं।
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लोगों को राशन पहुंचाने के लिए सरकारी भंडार के जरिए घर-घर राशन सामग्री, फल-सब्जियां और डेयरी के जरिए दूध पहुंचाया गया।
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भीलवाड़ा में हमने पहले चरण में कोरोना से महायुद्ध जीत लिया है। अब तक 21 मरीज निगेटिव से पॉजिटिव हो गए।
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लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाने पर जोर दिया गया। इन सबके चलते भीलवाड़ा में कोरोना के मामले आगे नहीं बढ़े।
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महा कर्फ्यू में तीन हजार पुलिस के जवान और एक दर्जन वरिष्ठ अधिकारी तैनात किए गए हैं।
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भीलवाड़ा मॉडल के सफल होने के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि इसी मॉडल को देश के बाकी हिस्सों में भी लागू किया जा सकता है।
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