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CORONA को लेकर 15 सबसे बड़े भ्रम और उनका सचः क्या काली मिर्च, अदरक- शहद से खत्म होगा वायरस?
नई दिल्ली. देश में कोरोना महामारी विकराल रूप धारण कर चुकी है। पिछले 15 दिन से हर रोज 3 लाख से ज्यादा एक्टिव केस मिल रहे हैं। वहीं, पिछले 24 घंटे में 4 लाख से ज्यादा लोग कोरोना की चपेट में आए। जबकि 3980 लोगों की मौत हुई। ऐसे में कोरोना वायरस और उसके इलाज को लेकर सोशल मीडिया पर तमाम तरह के दावे किए जा रहे हैं। कोई नींबू से कोरोना को ठीक करने का दावा कर रहा, तो कोई वैक्सीन को लेकर तमाम तरह की सलाह दे रहा है। आईए जानते हैं कोरोना के लेकर ऐसे ही 15 मिथ और उनकी सच्चाई....

मिथ 1- क्या संक्रमित हो चुके लोगों को वैक्सीन की जरूरत नहीं?
फैक्ट- ऐसा नहीं है, कोरोना संक्रमित के बिल्कुल स्वस्थ होने के 15-20 दिन बाद वैक्सीनेशन कराई जा सकती है। ताकि उनमें कोरोना के खिलाफ अच्छा इम्यून पैदा हो सके।
मिथ 2-- क्या थर्मल स्कैनर से कोरोना संक्रमित का पता चल जाता है?
फैक्ट- नहीं, थर्मल स्कैनर से संक्रमित का पता नहीं चलता। यह बस शरीर के तापमान की जानकारी देता है। यानी इससे बुखार का अंदाजा लगाया जा सकता है।
मिथ 3- कोरोना से बच्चे संक्रमित नहीं होंगे?
फैक्ट- कोरोना से सभी उम्र के लोग संक्रमित हो रहे हैं। हालांकि, बच्चों में इसके लक्षण कम रहते हैं।
मिथ 4 - क्या कच्चे प्याज और सेंधे नमक के सेवन से कोरोना ठीक हो जाएगा।
फैक्ट- इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
मिथ 5- क्या गर्म पानी में नीबू और बेकिंग सोडा डालकर पीने से तुरंत कोरोना मर जाएगा।
फैक्ट- नहीं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
मिथ 6- क्या लड़कियों को मासिक धर्म से 5 दिन पहले और बाद में वैक्सीन नहीं लेनी चाहिए?
फैक्ट - नहीं, यह दावा गलत है। 18 साल से ऊपर के सभी लोग वैक्सीन ले सकते हैं।
मिथ 7- काली मिर्च, अदरक व शहद से कोरोना का इलाज संभव है? दावा किया जा रहा है कि पुडुचेरी यूनिवर्सिटी के एक छात्र ने कोरोना का इलाज खोजा है और इसे WHO द्वारा भी इसे स्वीकृति दी गई है।
फैक्ट- यह दावा फर्जी है।
मिथ 8- क्या दूसरी लहर में संक्रमित होने पर तुरंत अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत है?
फैक्ट- नहीं, हल्के और कम लक्षण वाले मरीजों का इलाज घर पर हो सकता है। आईसीएमआर ने करीब 10 हजार लोगों पर इसे लेकर रिसर्च की है।
मिथ 9 - अगर आप 10 मिनट सांस रोक सकते हैं, तो आपको कोरोना नहीं है।
फैक्ट- यह दावा गलत है। यह कोरोना की जांच का कोई मानक नहीं है। अगर आपको कोरोना के लक्षण हैं, तो तुरंत जांच करानी चाहिए।
मिथ 10- 5G की टेस्टिंग से बंद करो, इसी से कोरोना की दूसरी लहर आई?
फैक्ट - यह दावा गलत है। क्योंकि भारत समेत जिन देशों पर कोरोना का कहर जारी है, उनमें से कई देशों में अभी टेस्टिंग शुरू भी नहीं हुई है।
मिथ 11- क्या नेबुलाइजर मशीन को ऑक्सीजन सिलेंडर की जगह इस्तेमाल किया जा सकता है
फैक्ट- यह दावा फर्जी है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि नेबुलाइजर मशीन, रक्त में ऑक्सीजन के स्तर को संतुलित बनाए रख सकता है ।
मिथ 12- क्या होम्योपैथिक दवाई 'ASPIDOSPERMA Q' ऑक्सीजन लेवल को तुरंत संतुलित कर सकती है और यह हमेशा संतुलित बना रहेगा।
फैक्ट- यह दावा भ्रामक है। कोरोना संक्रमितों में ऑक्सीजन लेवल को संतुलित करने के लिए इसे विकल्प के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकता।
मिथ 13- क्या त्रिललोक्यचिंतामणि रस से तुरंत ठीक हो जाएगा ऑक्सीजन लेवल। दावा किया जा रहा है कि इसकी 1-1 गोली 3 बार लेने पर ऑक्सीजन लेवल तुरंत ठीक हो जाता है।
फैक्ट- यह जानकारी भ्रामक है।
मिथ 14- क्या नाक में नींबू डालने से खत्म हो जाएगा कोरोना? एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा, इसमें दावा किया जा रहा है कि नाक में नींबू के रस की तीन तीन बूंद डालने से कोरोना ठीक हो जाएगा।
फैक्ट- इस दावे का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
मिथ- 15 क्या कोरोनावायरस से जवानों से ज्यादा बुजुर्गों को खतरा है?
फैक्ट- कोरोनावायरस का संक्रमण हर उम्र के लोगों को हो रहा है। लेकिन यह कहना भी गलत नहीं होगा कि ज्यादा उम्र के लोगों के लिए जिन्हें अस्थमा, डायबिटीज और दिल की बीमारी है, ऐसे लोगों को इस वायरस से ज्यादा खतरा है।
Asianet News का विनम्र अनुरोधः आईए साथ मिलकर कोरोना को हराएं, जिंदगी को जिताएं...जब भी घर से बाहर निकलें माॅस्क जरूर पहनें, हाथों को सैनिटाइज करते रहें, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। वैक्सीन लगवाएं। हमसब मिलकर कोरोना के खिलाफ जंग जीतेंगे और कोविड चेन को तोडेंगे। #ANCares #IndiaFightsCorona
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