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चौबेपुर थाना ही नहीं अन्य थानों में भी मेरे मददगार...मौत से पहले विकास दुबे ने खोले ऐसे ही कई बड़े राज
नई दिल्ली. कानपुर में 8 पुलिसवालों की हत्या करने के आरोपी विकास दुबे की मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, कानपुर से 17 किलोमीटर पहले भवती में उसने पुलिसवालों की बंदूक छीनकर भागने की कोशिश की, इसी दौरान मुठभेड़ में उसे दो गोली लगी। घायल हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया। विकास दुबे की मौत पर कई सवाल उठ रहे हैं। सवाल किए जा रहे हैं कि विकास दुबे की मौत के बाद कैसे पता चलेगा कि विकास दुबे के सिर पर किसका हाथ था? किसकी सह पर वह खुलेआम हत्याएं करके बच निकलता था? इन सवालों के बीच अच्छी खबर यह है कि उज्जैन में गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने करीब 2 घंटे पूछताछ की, जिसमें विकास दुबे ने कई बड़े खुलासे किए।

विकास दुबे की मौत हो चुकी है, लेकिन मौत से पहले उज्जैन में पुलिस पूछताछ में विकास ने जो कुछ बताया, उसे क्रमवार बताते हैं।
विकास दुबे ने पूछताछ में खुलासा किया था कि उसने एनकाउंटर के डर से पुलिसवालों पर गोली चलाई। विकास ने बताया कि उसने जानबूझकर ऐसा नहीं किया, बल्कि खुद की जान बचाने के लिए पुलिसवालों को निशाना बनाया।
विकास दुबे ने पूछताछ में माना था कि उसे पुलिस के आने के खबर पहले ही मिल गई थी। लेकिन खबर के हिसाब से पुलिस का एक्शन नहीं हुआ। दरअसल, विकास दुबे को खबर मिली थी कि पुलिस सुबह आने वाली है। इसलिए रात को उसने पूरी तैयारी कर ली थी। खाना खाने जा रहा था, तभी सुबह की बजाय रात को ही पुलिस आ गई। इससे विकास दुबे कुछ समझ नहीं पाया और अंधाधुंध फायरिंग शुरू हो गई।
विकास दुबे ने बताया कि पुलिसवालों के शवों को जलाने के लिए उन्हें एक के ऊपर एक रखा गया था, लेकिन शवों को जलाने का मौका नहीं मिला और सभी जान बचाकर वहां से भाग निकले।
विकास दुबे के इस खुलासे ने सबको चौंका दिया। विकास ने उज्जैन पुलिस को बताया कि पुलिसवालों की हत्या के बाद उनके शव को चलाने के लिए तेल मंगाया गया था। पुलिसवालों का शव जलाकर उन्हें पास के कुंए में फेंक दिया जाता, जिससे सभी सबूत मिट जाते। आग लगाने के लिए घर में गैलनों में तेल रखा गया था। काले रंग के एक पचास लीटर के गैलन में तेल भरा था। लेकिन लाशें इकट्ठा करने के बाद उसे जलाने का मौका नहीं मिला और वो फरार हो गया।
विकास दुबे ने कहा कि मैंने सीओ को नहीं मारा, बल्कि साथ के लोगों ने मारा। विकास ने बताया कि सीओ से उसकी पर्सनल खुन्नस थी। वह विकास को कहता था कि एक पैर गड़बड़ है दूसरा भी सही कर दूंगा। इसी वजह से सीओ के पैर में भी गोली मारी गई। विकास ने कबूला कि उसने ही अपने साथियों को अलग-अलग भागने के लिए कहा था।
पूछताछ में उज्जैन पुलिस को विकास दुबे ने बताया था कि सिर्फ चौबेपुर में ही नहीं, बल्कि अन्य थानों में भी उसके मददगार थे। जो तमाम मामलों में उसकी मदद करते थे। विकास दुबे ने यह भी बताया कि लॉकडाउन के दौरान चौबेपुर थाने के तमाम पुलिसवालों का उसने बहुत ख्याल रखा। सबको खाना पीना खिलाया और दूसरी मदद भी की।
उज्जैन में पूछताछ के दौरान विकास दुबे ने माना था कि उसने अपने साथियों को हथियारों के साथ बुलाया था।
विकास दुबे ने पुलिस के सामने बताया कि हत्या के बाद उसने पुलिसवालों के हथियार लूटे और उसने उन्हें कहां रखा।
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