- Home
- National News
- Target Killings का डर भी नहीं रोका सका 'मां' से मिलने, झरने के रंग बदलते पानी में दिख जाता है भविष्य
Target Killings का डर भी नहीं रोका सका 'मां' से मिलने, झरने के रंग बदलते पानी में दिख जाता है भविष्य
श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर में टार्गेट किलिंग( targeted killings) के जरिये गैर कश्मीरियों; खासकर हिंदुओं में डर पैदा करके आतंकियों ने सोचा था कि वे 8 जून से शुरू हो रहे प्रसिद्ध खीर भवानी( Mela Kheer Bhawani) मेले पर संकट के बादल पैदा कर सकेंगे, लेकिन ऐसा नही हुआ। मां के दरबार में बड़ी संख्या में दूर-दूर से भक्त पहुंचे। मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के तुलमुल्ला इलाके में पंडितों की पूजनीय देवी माता रागन्या देवी के मंदिर यानी खीर भवानी में मंदिर में मंगलवार को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। यहां 8 जून को वार्षिक मेला आयोजित किया जाता है। अकेले जम्मू से 250 से अधिक भक्त यहां आए हैं। बता दें कि विस्थापित समुदाय यानी कश्मीरी पंडितों के सबसे बड़े धार्मिक कार्यों में से एक प्रसिद्ध रागन्या देवी मंदिर में वार्षिक माता खीर भवानी मेला COVID-19 के प्रकोप के कारण दो साल बाद मनाया जा रहा है। देखिए कुछ तस्वीरें और पढ़िए कुछ अन्य जानकारियां...

तुल्लमुल्ला तीर्थस्थल स्थानीय कश्मीरी पंडित समुदाय का सबसे पवित्र मंदिर होने के साथ-साथ कश्मीर के विभिन्न समुदायों के बीच सदियों पुरानी उदार संस्कृति और भाईचारे का भी प्रतीक है। मंदिर के अंदर के झरने का ऐतिहासिक महत्व है, क्योंकि स्थानीय लोगों का मानना है कि त्योहार के दिन इसके पानी का रंग अगले साल तक होने वाली घटनाओं का पूर्वाभास देता है।
स्थानीय धर्मार्थ ट्रस्ट झरनों से घिरे भूमि के एक बड़े टुकड़े में फैले इस तीर्थ परिसर का रखरखाव करता है। इस मेले को लेकर हाल में अफवाहें फैलाई गई थीं। सोाशल मीडिया पर 'माता खीर भवानी अस्थापन ट्रस्ट' के फर्जी लेटरहेड के जरिये पब्लिसिटी की गई कि टार्गेट किलिंग को देखते हुए ऐतिहासिक खीर भवानी मेला रद्द कर दिया गया है। हालांकि प्रशासन ने इसे फेक बताया था।
खीर भवानी मंदिर के मेले में पहुंचे कश्मीरी पंडितों का स्थानीय लोगों ने फूल देकर स्वागत किया। मेले में सिक्योरिटी सख्त रखी गई।
इस मेले की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां हिंदू और मुसलमान दोनों सम्प्रदाय के लोग शामिल होते हैं। यह मंदिर जो 1990 के दशक की शुरुआत में कश्मीर से चले गए पंडित समुदाय को फिर से घाटी से जोड़ने मुस्लिम समुदाय को एक बड़ा अवसर देता है।
यह भी पढ़ें-उत्तराखंडः बॉर्डर एरिया के गांवों में पर्यटन को बढ़ावा, कुछ ऐसे बदल जाएगी तस्वीर
खीर भवानी मंदिर एक पवित्र पानी के चश्मे(नेचुरल वाटर रिसोर्स) के ऊपर स्थित है। यह जगह श्रीनगर से 25 किलोमीटर दूर है। परंपराओं के हिसाब से वसंत के सीजन में मंदिर में खीर चढ़ाई जाती है। इसी वजह से इसका नाम'खीर भवानी' पड़ा। जम्मू-कश्मीर के महाराजा प्रताप सिंह और महाराजा हरि सिंह ने मंदिर का निर्माण और रीकंस्ट्रक्शन कराया था।
National News (नेशनल न्यूज़) - Get latest India News (राष्ट्रीय समाचार) and breaking Hindi News headlines from India on Asianet News Hindi.