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मौत से पहले निर्भया के दोषियों की आखिरी इच्छा क्या थी? फांसी से आधे घंटे पहले इस IAS को बताया
नई दिल्ली. निर्भया के चारों दोषियों को फांसी दे दी गई है। फांसी से आधे घंटे पहले दोषियों ने डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेज नेहा बंसल के सामने अपनी आखिरी इच्छा जाहिर की। डेथ वॉरंट के मुताबिक, 5.30 बजे फांसी दी जानी थी, उससे आधे घंटे पहले करीब 4.45 से 5 बजे के बीच दोषियों और नेहा बंसल की मुलाकात हुई। बता दें कि दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने चारों दोषियों को फांसी देने के लिए चौथी बार डेथ वॉरंट जारी किया था, जिसके मुताबिक, उन्हें 5.30 बजे फांसी दी गई।
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चारों दोषियों मुकेश सिंह (32), पवन गुप्ता (25), विनय शर्मा (26) और अक्षय कुमार सिंह (31) को 5:30 बजे फांसी देने के बाद उनके शव को दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
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निर्भया के दोषी मुकेश ने आखिरी इच्छा की। उसने कहा कि मैं अंगदान करना चाहता हूं। इसके लिए उसने लिखकर भी दिया।
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दोषी विनय ने जेल में पेंटिंग बनाई थी। उसने वह पेटिंग जेल अधिकारियों को रखने के लिए दी।
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दोषी विनय ने आखिरी इच्छा में कहा, जब मेरे शव को मेरे परिवार को सौंपा जाए तो उसके साथ हनुमान चालीसा और एक फोटो भी दी जाए।
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दो दोषी पवन और अक्षय ने अपनी आखिरी इच्छा में कुछ नहीं कहा। वह सिर्फ चुप रहे।
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चारों दोषी फांसी से पहले आखिरी बार एक दूसरे से मिलना चाहते थे। लेकिन तिहाड़ जेल प्रशासन ने इसकी इजाजत नहीं दी। रात में करीब 1 बजे अक्षय ने मुकेश से मिलने के लिए कहा, लेकिन हेड वॉर्डन ने मना क दिया।
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अक्षय ने जब पवन जल्लाद को देखा, तब जेल कर्मचारियों से पूछा, यह नया व्यक्ति कौन है? तब जेल प्रशासन ने बताया, यह स्टाफ का ही एक कर्मचारी है।
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जिला मजिस्ट्रेट, चिकित्सा परीक्षक, जेल अधीक्षक और 10 अन्य जेल अधिकारी फांसी कोठी में मौजूद थे। डीएम ने भी ब्लैक वारंट में हस्ताक्षर किए। इसके बाद चारों को फांसी के फंदे पर टांग दिया गया।
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चारों दोषियों को 5.30 बजे फांसी दी गई। फिर आधे घंटे तक चारों दोषियों के शव हवा में लटक रहे थे। इसके बाद डॉक्टर ने चारों को मृत घोषित कर दिया।
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निर्भया का मुख्य दोषी राम सिंह था। मार्च 2013 में तिहाड़ जेल में राम सिंह की लाश मिली थी। पुलिस के मुताबिक राम सिंह ने खुद को फांसी लगाई थी, लेकिन बचाव पक्ष के वकीलों और राम सिंह के परिवार का आरोप था कि राम सिंह की हत्या की गई थी। राम सिंह बस ड्राइवर था। दक्षिण दिल्ली के रविदास झुग्गी में रहने वाला राम सिंह वारदात से 20 साल पहले राजस्थान से दिल्ली आया था। निर्भया केस में सबसे पहले राम सिंह को ही गिरफ्तार किया गया था।
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यह बिहार का रहने वाला है। इसने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और दिल्ली चला आया। शादी के बाद ही 2011 में दिल्ली आया था। यहां वह राम सिंह से मिला। घर पर इस पत्नी और एक बच्चा है।
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पवन दिल्ली में फल बेंचने का काम करता था। वारदात वाली रात वह बस में मौजूद था। पवन जेल में रहकर ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहा था।
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निर्भया से गैंगरेप का दोषी मुकेश बस क्लीनर का काम करता था। जिस रात गैंगरेप की यह घटना हुई थी उस वक्त मुकेश सिंह बस में ही सवार था। गैंगरेप के बाद मुकेश ने निर्भया और उसके दोस्त को बुरी तरह पीटा था।
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निर्भया को 6वां दोषी नाबालिग था। वारदात के वक्त वह 17 साल का था। नाबालिग दोषी उत्तर प्रदेश के एक गांव का रहना वाला है। वह 11 साल की उम्र में दिल्ली आया था। इस केस में इसपर बतौर नाबालिग मुकदमा चलाया गया। 31 अगस्त 2013 को नाबलिग को बलात्कार और हत्या का दोषी पाया गया और उसे सुधार गृह में तीन साल के लिए भेज दिया गया। इसके बाद उसे फ्री कर दिया गया।
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निर्भया का दोषी विनय जिम ट्रेनर का काम करता था। वारदात वाली रात विनय बस चला रहा था। इसने पिछले साल जेल के अंदर आत्महत्या की कोशिश की थी लेकिन बच गया था।
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फांसी देने से आधे घंटे पहले दोषियों के साथ क्या-क्या किया गया, उसकी एक टाइमलाइन
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