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प्रवासी मजदूरों को मोदी सरकार की राहत,आज से 'वन नेशन वन राशन कार्ड' लागू, जानिए कैसे मिलेगा फायदा
नई दिल्ली. देश में जारी कोरोना संकट और लॉकडाउन के बीच प्रवासी मजदूरों और गरीबों के लिए बड़ी राहत की खबर है। आज से देशभर में 'वन नेशन वन राशन कार्ड' को लागू किया जा रहा है। एक जून से देश में इसकी शुरुआत 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से हो रही है। सरकार इस योजना पर तेजी से काम कर रही थी। अब जिसके पास राशन कार्ड नहीं है, वह किसी भी राज्य में इस कार्ड के लिए अप्लाई कर सकता है। इसके साथ ही किसी के पास किसी अन्य राज्य का राशन कार्ड है, जहां का वह निवासी और वह दूसरे राज्य में रहता है तो उसे उसी प्रवासी राज्य में ही राशन की सुविधा मुहैया कराई जाएगी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले दिनों आत्मनिर्भर राहत पैकेज की घोषणा के दौरान 'वन नेशन, वन राशन कार्ड' का जिक्र किया था। इस कल्याणकारी योजना के तहत देश के गरीबों को किफायती कीमत पर देश के किसी भी हिस्से में सस्ते दाम पर राशन मिलेगा। राशन कार्ड का सबसे ज्यादा फायदा गरीबी रेखा के नीचे (BPL) कार्ड धारकों को मिलता है।
निर्मला सीतारमण ने बताया कि यह योजना सार्वजनिक वितरण से जुड़ी 83 फीसदी आबादी को कवर करेगी। वहीं 23 राज्यों में मौजूद 67 करोड़ राशनकार्ड धारक (जो कुल PDS आबादी का 83 फीसदी है) अगस्त, 2020 तक नेशनल पोर्टेबिलिटी के तहत आ जाएंगे। हालांकि, मार्च 2021 से पहले 100 फीसदी नेशनल पोर्टेबिलिटी हासिल कर ली जाएगी।
क्या है वन नेशन, वन राशन कार्ड योजना?
'वन नेशन वन राशन कार्ड' केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी योजना है, जिसके तहत पूरे देश में पीडीएस के लाभार्थियों को कहीं भी सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत चलने वाली राशन की दुकानों से राशन मिलेगा। यानी किसी भी राज्य का राशन कार्ड धारक दूसरे किसी भी राज्य में भी कार्ड दिखाकर राशन ले सकेगा।
कैसे और किसे मिलेगा लाभ
उदाहर ते तौर पर समझिए कि कोई शख्स दिल्ली में रहता है जब कि वह बिहार का मूल निवासी है और उसके पास बिहार का राशन कार्ड है तो वह वन नेशन वन राशन कार्ड योजना के तहत दिल्ली में बिहार का राशन कार्ड दिखाकर राशन ले सकता है।
मान लीजिए कि लालचंद उत्तर प्रदेश का निवासी है और उसका राशन कार्ड भी उत्तर प्रदेश का है। लेकिन वह झारखंड में रहता है। तो उस राशन कार्ड के जरिए झारखंड में उचित मूल्य पर सरकारी राशन खरीद सकेगा। सरकार का कहना है कि इससे भ्रष्टाचार और फर्जी राशन कार्ड में कमी आएगी। मतलब कि किसी भी तरह की सीमा या नियमों का बंधन नहीं होगा। वह देश के किसी भी राज्य में राशन खरीद सकता है। सबसे खास बात यह है कि इसके लिए किसी नए राशन कार्ड की जरूरत नहीं होगी। यानी आप पुराने राशन कार्ड से ही इस योजना का लाभ ले सकते हैं।
क्या होगा फायदा ?
इस योजना के लागू हो जाने के बाद पूरे देश में एक ही तरह का राशन कार्ड होगा। लाभार्थी देश में कहीं भी ई-पीओएस उपकरण पर बॉयोमेट्रिक प्रमाणन करने के बाद अपने मौजूदा राशन कार्ड से राशन ले सकते हैं। लाभार्थियों को अंगूठा लगाना अनिवार्य होगा, यही प्रमाण होगा। बॉयोमेट्रिक इस्तेमाल में आधार का इस्तेमाल होगा यानी आधार से लाभार्थियों की पहचान होगी।
पुराने राशन कार्ड का क्या?
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि 'वन नेशन, वन राशन' कार्ड योजना लागू होने के बाद भी पुराना राशन कार्ड चलता रहेगा। उसी को केवल नये नियम के आधार पर अपडेट कर दिया जाएगा, जिससे वो पूरे देश में मान्य हो जाएगा। राशन कार्ड धारकों को चावल और गेहूं सस्ते दाम पर मिलता है। चावल 3 रुपये किलो और गेहूं 2 रुपये किलो मिलता है।
राशन कार्ड 10 नंबर का होगा
केंद्र सरकार राज्यों को 10 अंकों का राशन कार्ड नंबर जारी करेगी। इस नंबर में पहले दो अंक राज्य के कोड होंगे और अगले दो अंक राशन कार्ड नंबर होंगे। इसके अतिरिक्त राशन कार्ड नंबर के साथ एक और दो अंकों के सेट को जोड़ा जाएगा। इसे देश भर में लागू करने के लिए राशन कार्डों की पोर्टेबिलिटी की सुविधा शुरू होगी।
12 राज्यों में पहले से है वन नेशन, वन राशन
वन नेशन, वन राशन कार्ड की योजना 1 जनवरी 2020 से 12 राज्यों में चालू है। ये राज्य आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, राजस्थान, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, गोवा, झारखंड और त्रिपुरा हैं। वहीं, अब यह योजना 1 जून से अब यह देशभर में लागू हो गई है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत केंद्र सरकार देश के 80 करोड़ से अधिक लोगों सस्ते दाम पर खाद्यान मुहैया कराती है। इस योजना से सरकार को उम्मीद है कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और फर्जी राशन कार्ड नहीं बन पाएगा।
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