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यह बच्चे देसी जुगाड़ से कोरोना को दे रहे मात, मासूमों की बात सुनकर हर कोई बोला यह है भारत का भविष्य
बांसबाड़ा (राजस्थान). कोरोना वायरस को खत्म करने के लिए अब तक कोई दवा का निर्माण नहीं हो सका है, ऐसे से इससे बचना ही सबसे बड़ा उपाय है। आज हम जहां भी देखते हैं लोगों के चहेरे पर मास्क और हाथ ग्लब्स पहने होते हैं। राजस्थान कुछ आदिवासी बच्चों की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो इसके प्रति सजग रहने का संदेश दे रही है।

दरअसल, यह तस्वीर बांसबाड़ा जिले की है, जिसको फोटोग्राफर भरत कंसारा ने अपने कैमरे में कैद की है। यह बच्चे गांव में एक तलाब किनारे खेल रहे थे, उनके हाथों में बड़े-बड़े पत्ते थे, जब उनसे पत्रकार ने पूछा इनका क्या करोगे तो मासूम कहने लगे इन पत्तों से हम मास्क बनाएंगे। फिर उससे अपना चेहरा ढकेंगे, ताकि हमको कोरोना ना हो। यह बच्चे अपनी वागड़ी भाषा में एक-दूसरे से बात कर रहे थे,‘मोड़को बंद कर, ने तो कोरोनू पैई जाइगा’यानी इन पत्तों से मुंह ढ़क लोग वरना कोरोना हो जाएगा।
यह तस्वीर पंजाब के संगरूर की है। जहां अभी भी मजदूरों का पलायन जारी है, जब एक मजदूर परिवार को बस में बिठाया गया और एक अधिकारी ने उसको एक फूल देकर विदा किया तो बच्ची मुस्करा उठी। उसकी मुस्कान देखकर मां लॉकडाउन के दर्द को भूल गई।
यह तस्वीर गुजरात के सूरत शहर की है, जहां शनिवार को श्रमिक स्पेशल ट्रेन मजदूर अपने घर जाने के लिए निकले। बस की खिड़की से देखता यह बच्चा शायद यही कह रहा- बाय-बाय सूरत।
यह तस्वीर राजस्थान के बूंदी शहर की है। जहां कुछ बच्चों ने घर में दीपक जलाकर कोरोना योद्धाओं का आभार जताया।
यह तस्वीर राजस्थान के बूंदी शहर की है। जहां कुछ बच्चों ने घर में दीपक जलाकर कोरोना योद्धाओं का आभार जताया।
यह तस्वीर भी महाराष्ट्र से सामने आई है। जहां मां के साथ आ रहा एक बच्चा भी घर जाने के लिए अपने से ज्यादा वजनी सूटकेस लेकर आ रहा है।
फोटो पंजाब के अमृतसर की है। ये राजकुमारी पाल हैं, जो शनिवार को घर वापसी का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए अमृतसर में लिली रिजॉर्ट के बाहर बैठी हैं। नीचे तपता फर्श और ऊपर चिलचिलाती धूप है।
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