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अपने इतने करीबी की मौत से टूटे महेंद्र सिंह धोनी, इनकी वजह से ही बन पाए थे क्रिकेट की दुनिया के बादशाह

First Published Nov 25, 2020, 10:50 AM IST
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स्पोर्ट्स डेस्क: आज जिस माही को हम और आप इतना प्यार करते हैं, उन्हें इस जगह तक लाने वाले शख्स का 24 नवंबर को निधन हो गया। ये थे महेंद्र सिंह धोनी के संरक्षक और रा रांची में पहली टर्फ पिच बनाने वाले देवल सहाय। देवल सहाय का मंगलवार को निधन हो गया। बताया जा रहा है कि उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था, जिसकी वजह से उनकी मौत हो गई। वो रांची के ही एक अस्पताल में भर्ती थे। देवल अपने पीछे अपनी पत्नी, बेटी  और बेटे को छोड़ गए हैं। दोनों रांची में ही रहते हैं। 73 साल की उम्र में दुनिया छोड़ गए देवल ही वो शख्स हैं, जिन्होंने धोनी के टैलेंट को पहचाना और उन्हें बल्लेबाजी में निखारा था। उनके जाने से धोनी को काफी दुःख पहुंचा है। आइये आपको बताते हैं कैसे देवल ने रांची जैसे छोटे से शहर से निकाल धोनी को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टार बना दिया। 

देवल सहाय को बीते कुछ समय से सांस लेने में समस्या हो रही थी। इसके कारण उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया था। लेकिन फिर उन्हें छुट्टी देकर घर भेज दिया गया था। 

देवल सहाय को बीते कुछ समय से सांस लेने में समस्या हो रही थी। इसके कारण उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया था। लेकिन फिर उन्हें छुट्टी देकर घर भेज दिया गया था। 

सहाय के बेटे ने बताया कि छुट्टी मिलने के 10 दिन बाद अचानक उनकी तबियत और बिगड़ गई। जिसके कारण उन्हें अस्पताल में दुबारा एडमिट करवाया गया। 
 

सहाय के बेटे ने बताया कि छुट्टी मिलने के 10 दिन बाद अचानक उनकी तबियत और बिगड़ गई। जिसके कारण उन्हें अस्पताल में दुबारा एडमिट करवाया गया। 
 

24 नवंबर को सहाय ने आखिरी सांसें ली। सुबह 3 बजे रांची के निजी अस्पताल में उनका निधन हो गया। 25 नवंबर को रांची में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। 
 

24 नवंबर को सहाय ने आखिरी सांसें ली। सुबह 3 बजे रांची के निजी अस्पताल में उनका निधन हो गया। 25 नवंबर को रांची में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। 
 

सहाय के पीछे उनकी पत्नी, बेटी और बेटा हैं। बेटी अमेरिका में रहती है लेकिन पिता की तबियत खराब होने पर वो भारत आ गई थीं। इन दिनों वो रांची में ही रह रही हैं। 

सहाय के पीछे उनकी पत्नी, बेटी और बेटा हैं। बेटी अमेरिका में रहती है लेकिन पिता की तबियत खराब होने पर वो भारत आ गई थीं। इन दिनों वो रांची में ही रह रही हैं। 

पेशे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर सहाय रांची में पहले टर्फ पिच को बनवाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने इसमें सहायक की भूमिका निभाई थी। वो पहले धोनी के पिता के साथ मेकॉन में काम करते थे। 

पेशे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर सहाय रांची में पहले टर्फ पिच को बनवाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने इसमें सहायक की भूमिका निभाई थी। वो पहले धोनी के पिता के साथ मेकॉन में काम करते थे। 

सहाय मेकॉन में पहले चीफ इंजीनियर थे और इसके बाद वो सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड में चले गए थे। यहां वो निदेशक की पोस्ट तक जाने के बाद रिटायर हुए थे। 

सहाय मेकॉन में पहले चीफ इंजीनियर थे और इसके बाद वो सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड में चले गए थे। यहां वो निदेशक की पोस्ट तक जाने के बाद रिटायर हुए थे। 

जब सहाय सीसीएल (सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड) में थे, तब उन्होंने धोनी को वजीफे पर रखा था। साथ ही उन्होंने ही धोनी को सबसे पहली बार टर्फ पिच पर खेलने का अवसर दिया था। 

जब सहाय सीसीएल (सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड) में थे, तब उन्होंने धोनी को वजीफे पर रखा था। साथ ही उन्होंने ही धोनी को सबसे पहली बार टर्फ पिच पर खेलने का अवसर दिया था। 

बता दें कि देवल सहाय के किरदार को धोनी की बायोपिक फिल्म, एम.एस.धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी में दिखाया गया था। इस फिल्म से भी कई लोगों को पता चला था कि देवल सहाय की वजह से ही आज धोनी इस मुकाम पर हैं। 
 

बता दें कि देवल सहाय के किरदार को धोनी की बायोपिक फिल्म, एम.एस.धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी में दिखाया गया था। इस फिल्म से भी कई लोगों को पता चला था कि देवल सहाय की वजह से ही आज धोनी इस मुकाम पर हैं। 
 

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