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10 फोटो में देखें बिच्छुओं की देवी का चमत्कारः पत्थरों के बीच से बिच्छू निकाल बदन पर घुमाते हैं, ये काटते नहीं
यादगिरी (कर्नाटक)। महाराष्ट्र और कर्नाटक में नाग पंचमी के शुभ दिन पर लोग कोबरा सांप की विशेष पूजा करते हैं। मगर एक मंदिर ऐसा भी है, जहां अनोखे तरीके से सिर्फ बिच्छुओं की पूजा की जाती है। पूरे कर्नाटक के साथ-साथ आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र से हजारों की संख्या श्रद्धालु यहां विशेष आशीर्वाद लेने आते हैं। यह मेला लगता है कर्नाटक के यादगिरी जिले के गुरुमतकल कस्बा स्थित कंडाकुर कोंडामई पहाड़ी पर स्थित मंदिर में। इस दिन भक्त, चाहे वह बुजुर्ग हो या फिर बच्चा, महिला हो या पुरूष, बिच्छुओं को अपने शरीर पर रखते हैं और बिच्छू पूरे शरीर पर घूमता-टहलता रहता है। आइए तस्वीरों के जरिए इस हैरतअंगेज कारनामे को देखते हैं।

जुलाई से अगस्त महीने के दौरान और विशेषकर नाग पंचमी पर यह पहाड़ी लाल बिच्छुओं से भर जाएगी। लोग यहां आते हैं और इन बिच्छुओं को पत्थरों से निकालकर शरीर पर रखते हैं।
ऐसा दावा किया जाता है कि आज तक किसी भी भक्त को बिच्छुओं ने काटा नहीं है। भक्त भी इन्हें शरीर पर रखकर रोमांचकारी पलों का अनुभव लेते हैं।
ये बिच्छु भक्तों के शरीर पर विचरण करते हैं। इसके बाद वे खुद-ब-खुद शरीर से उतर जाते हैं। कहा यह भी जाता है कि अगर किसी को बिच्छु ने काट भी लिया, तो वहीं पवित्र विभूति लगा ले। इससे जहर का असर नहीं होगा। साथ ही दर्द भी गायब हो जाएगा।
वैसे तो यहां वर्षभर लोग आते ही रहते हैं, मगर नाग पंचमी को यहां विशेष रूप से भक्तों की मौजूदगी होती है। कर्नाटक की ही नहीं आसपास के राज्यों से भी यहां लोग आते हैं।
कोंडामाई मंदिर कंडाकुर में कोंडामाई पहाड़ी पर स्थित है। दावा किया जाता है कि यह मंदिर ब्रिटिश काल से अस्तित्व में है। कोंडामाई का अर्थ होता है बिच्छुओं की देवी।
दावा किया जाता है कि नाग पंचमी पर अगर भक्त यहां आते हैं और देवी से कुछ मांगे तो उनकी मनोकामना पूरी होती है। बहुत से भक्तों का कहना है कि वे हर साल यहां दर्शन-पूजन करने आते हैं।
साथ ही, अगर वे पहाड़ी पर कोई माता का नाम लेकर कोई भी पत्थर हटाएं तो नीचे से बिच्छू निकलेगा। हालांकि, दावा यह भी किया जाता है कि नाग पंचमी के बाद ये बिच्छू गायब हो जाते हैं।
लोगों का कहना है कि यहां बिच्छू सिर्फ नाग पंचमी पर ही दिखाई देते हैं। इसके बाद अगर यहां कोई आता है, तो उन्हें बिच्छू नहीं दिखाई देंगे। यहां महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना से भक्त आते हैं।
कोंडामाई पहाड़ी नम लाल और रेतीली मिट्टी से ढंकी है। ऐसी जगह बिच्छुओं के प्रजनन के लिए अनुकूल होता है। हालांकि, कोई भी बिच्छू जहरीले नहीं होते।
भक्तों का मानना है कि माता के आशीर्वाद की वजह से बिच्छू जहरीले नहीं होते। कुछ साल पहले गुलबर्गा यूनिवर्सिटी की एक टीम इस जगह जांच के लिए आई। तब उन्हें बिच्छुओं ने काट लिया। मगर भगवान की पूजा की, जिसके बाद जहर का असर खत्म हुआ और टीम वापस लौट गई।
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