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Shraddha Paksha 2022: पितृ दोष से परेशान हैं तो 25 सितंबर से पहले करें पौधों के ये आसान उपाय

उज्जैन. ज्योतिष शास्त्र में कई तरह के दोषों के बारे में बताया गया है। पितृ दोष भी इनमें से एक है। जिसकी कुंडली में पितृ दोष होता है, उसे अपनी लाइफ में कदम-कदम पर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पितृ दोष (Pitru Dosh Ke Upay) के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए श्राद्ध पक्ष (Shraddha Paksha 2022) के दौरान कुछ खास उपाय करने चाहिए। इस बार श्राद्ध पक्ष 25 सितंबर तक रहेगा। काशी के ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्र के अनुसार, श्राद्ध पक्ष में यदि कुछ खास पौधे लगाएं जाएं तो इससे भी पितृ प्रसन्न होते हैं। आगे जानिए श्राद्ध पक्ष के दौरान कौन-कौन से पौधे लगाने से पितृ दोष से बचा जा सकता है…

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Author : Manish Meharele
| Updated : Sep 13 2022, 05:20 PM IST
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हिंदू धर्म में अनेक अवसरों पर पीपल वृक्ष की की पूजा भी की जाती है। पुराणों के अनुसार, इस पेड़ में पितरों का स्थान होता है। इसलिए श्राद्ध पक्ष के दौरान रोज पीपल पर जल चढ़ना चाहिए। श्राद्ध के दौरान पीपल का पौधा लगाने से हर तरह की परेशानी दूर हो सकती है और पितृ भी प्रसन्न होते हैं। 
 

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तुलसी को हिंदू धर्म में सबसे अधिक पूजनीय माना गया है। इसके पत्तों के बिना भगवान विष्णु की पूजा अधूरी मानी जाती है। श्राद्ध कर्म में भी तुलसी के पत्तों का उपयोग विशेष रूप से किया जाता है, धर्म ग्रंथों के अनुसार, ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं। श्राद्ध पक्ष के दौरान तुलसी का पौधा लगाना बहुत ही शुभ माना जाता है और इससे पितृ दोष का अशुभ प्रभाव भी कम होता है।
 

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धर्म ग्रंथों के अनुसार बिल्व वृक्ष में कई देवताओं का वास माना गया है। भगवान शिव की पूजा में बिल्व के पत्तों का उपयोग विशेष रूप से किया जाता है। इस वृक्ष में देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु का वास भी माना गया है। श्राद्ध पक्ष के दौरान बिल्व का पौधा लगाने से पितृ देवता प्रसन्न होते हैं।
 

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शास्त्रों में बरगद के वृक्ष को पूजनीय माना गया है। कई व्रत-त्योहारों के मौके पर बरगद की पूजा की जाती है। एक कथा के अनुसार, बरगद के पेड़ को ही साक्षी मानकर माता सीता ने राजा दशरथ के लिए पिंडदान किया था। बरगद पर जल चढ़ाकर इसकी परिक्रमा करने से पितर प्रसन्न होते हैं। श्राद्ध पक्ष के दौरान बरगद का पौधा रोपने से पितृ देवता प्रसन्न होते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। 


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About the Author

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Manish Meharele
मनीष मेहरेले। मीडिया जगत में इनके पास 19 साल से ज्यादा का अनुभव है। वर्तमान समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर धर्म-आध्यात्म बीट पर काम कर रहे हैं। करियर की शुरुआत इन्होंने स्थानीय अखबार दैनिक अवंतिका से की थी। इसके बाद वह दैनिक भास्कर प्रिंट उज्जैन में वाणिज्य डेस्क प्रभारी रहे और 2010-2019 तक दैनिक भास्कर डिजिटल में धर्म डेस्क पर काम किया। इन्हें महाभारत, रामायण जैसे धार्मिक ग्रंथों का अच्छा ज्ञान है। इनके पास जीव विज्ञान में बीएससी स्नातक की डिग्री है।

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