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Defence Expo 2020: इस तरह पूरी दुनिया को ताकत दिखाएगा भारत, देखिए 10 तस्वीरें

First Published Feb 5, 2020, 7:59 PM IST
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लखनऊ (Uttar Pradesh)। प्रधानमंत्री मंत्री नरेंद्र मोदी डिफेंस एक्सपो 2020 का आज उद्घाटन किए। इस दौरान पीएम ने टैंक, तोप, हेलीकॉप्टर, कमांडो की क्षमता देखी। तालमेल, दक्षता और डिफेंस देखा। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कि हथियारों की मंडी में भारत दुनिया को मेक इन इंडिया की ताकत किस तरह से दिखाएगा। बता दें कि हम विभिन्न स्त्रोतों तस्वीरें एकत्र कर उनके बारे में जानकारी दे रहे हैं। साथ ही यह भी बता दें कि अब भारत जैसा देश लंबे समय तक आयातित रक्षा उपकरणों और हथियारों पर निर्भर नहीं रह सकता। रक्षा उपकरणों के कारोबारियों के इस समागम में 70 से ज्यादा देशों की 1028 कंपनियां अपने उत्पादों और तकनीकों का प्रदर्शन करेंगी। इनमें 856 भारतीय और 172 विदेशी कंपनियां हैं। पांच दिन तक चलने वाले इस डिफेंस एक्सपो के दौरान रक्षा सौदों से जुड़े तकरीबन 200 से ज्यादा सहमति पत्र (एमओयू) हस्ताक्षरित होंगे। इस चार दिवसीय आयोजन में 39 देशों के रक्षा मंत्री भी शिरकत करेंगे।

एचएएल (हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड) ने दुनिया के सबसे हल्के लड़ाकू विमान को बनाया है। एयरक्राफ्ट कैरियर पर मिग 29 की जगह तेजस को तैनात करने की तैयारी है। पिछले दिनों एयरक्राफ्ट कैरियर पर तेजस ने अरेस्ट लैंडिंग कर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया था।

एचएएल (हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड) ने दुनिया के सबसे हल्के लड़ाकू विमान को बनाया है। एयरक्राफ्ट कैरियर पर मिग 29 की जगह तेजस को तैनात करने की तैयारी है। पिछले दिनों एयरक्राफ्ट कैरियर पर तेजस ने अरेस्ट लैंडिंग कर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया था।

राफेल विमान की खासियत है कि यह ऊंचे इलाकों में भी लड़ने में माहिर है। राफेल एक मिनट में 60 हजार फुट की ऊंचाई तक जा सकता है। यह अधिकतम 24,500 किलोग्राम का भार उठाकर उड़ने में सक्षम है। इसकी अधिकतम रफ्तार 2200 से 2500 किमी. प्रतिघंटा है और इसकी रेंज 3700 किलोमीटर है। ऑप्ट्रॉनिक सिक्योर फ्रंटल इंफ्रारेड सर्च और ट्रैक सिस्टम से लैस इस विमान में एमबीडीए एमआइसीए, एमबीडीए मेटेओर और एमबीडीए अपाचे जैसी कई तरह की खतरनाक मिसाइलें और गन लगी होती हैं, जो पल भर में दुश्मनों को मिट्टी में मिला सकती है।

राफेल विमान की खासियत है कि यह ऊंचे इलाकों में भी लड़ने में माहिर है। राफेल एक मिनट में 60 हजार फुट की ऊंचाई तक जा सकता है। यह अधिकतम 24,500 किलोग्राम का भार उठाकर उड़ने में सक्षम है। इसकी अधिकतम रफ्तार 2200 से 2500 किमी. प्रतिघंटा है और इसकी रेंज 3700 किलोमीटर है। ऑप्ट्रॉनिक सिक्योर फ्रंटल इंफ्रारेड सर्च और ट्रैक सिस्टम से लैस इस विमान में एमबीडीए एमआइसीए, एमबीडीए मेटेओर और एमबीडीए अपाचे जैसी कई तरह की खतरनाक मिसाइलें और गन लगी होती हैं, जो पल भर में दुश्मनों को मिट्टी में मिला सकती है।

यह दुनिया की इकलौती सुपरसोनिक मिसाइल है, जो सबमरीन, युद्धपोत, लड़ाकू विमान और जमीन पर लांचिंग पैड से फायर की जा सकती है। मेक इन इंडिया के तहत रूस के साथ मिलकर भारत ने ब्रह्मोस को विकसित किया है।

यह दुनिया की इकलौती सुपरसोनिक मिसाइल है, जो सबमरीन, युद्धपोत, लड़ाकू विमान और जमीन पर लांचिंग पैड से फायर की जा सकती है। मेक इन इंडिया के तहत रूस के साथ मिलकर भारत ने ब्रह्मोस को विकसित किया है।

अल्ट्रालाइट होवित्जर गन धनुष को पिछले साल दीपावली पर ही भारतीय सेना में शामिल किया गया। यह 155/45 एमएम आर्टीलरी गन 38 किलोमीटर तक एक मिनट में चार राउंड फायर कर सकती है। इसे दुनिया की सबसे मारक आर्टीलरी गन में से एक माना जा रहा है।

अल्ट्रालाइट होवित्जर गन धनुष को पिछले साल दीपावली पर ही भारतीय सेना में शामिल किया गया। यह 155/45 एमएम आर्टीलरी गन 38 किलोमीटर तक एक मिनट में चार राउंड फायर कर सकती है। इसे दुनिया की सबसे मारक आर्टीलरी गन में से एक माना जा रहा है।

हिंदुस्तान शिपयार्ड लि. विशाखापट्टनम का पांच मीटर पानी तक में उतरकर निगरानी करने वाला पेट्रोलिंग वेसेल समुद्र में इकोनोमिक जोन में एंटी स्मगलिंग, कोस्टल क्षेत्र की निगरानी, मछुआरों की सुरक्षा में भारत की मजबूती को प्रदर्शित करेगा।

हिंदुस्तान शिपयार्ड लि. विशाखापट्टनम का पांच मीटर पानी तक में उतरकर निगरानी करने वाला पेट्रोलिंग वेसेल समुद्र में इकोनोमिक जोन में एंटी स्मगलिंग, कोस्टल क्षेत्र की निगरानी, मछुआरों की सुरक्षा में भारत की मजबूती को प्रदर्शित करेगा।

एचएएल ने अब तक ऐसे तीन लाइट यूटीलिटी हेलीकॉप्टर (एलयूएच) बनाए हैं। एक हेलीकॉप्टर को डिफेंस एक्सपो के फ्लाई पास्ट में शामिल किया गया है। इस हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल सर्च एंड रेस्क्यू में होता है।

एचएएल ने अब तक ऐसे तीन लाइट यूटीलिटी हेलीकॉप्टर (एलयूएच) बनाए हैं। एक हेलीकॉप्टर को डिफेंस एक्सपो के फ्लाई पास्ट में शामिल किया गया है। इस हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल सर्च एंड रेस्क्यू में होता है।

बीएमपी असल में रूसी रक्षा प्रणाली है। जिसे इंफेंट्री कॉम्बैट व्हीकल और  बीएमपी भी कहते हैं, जो एंफीबियस कैटेगरी का है यानी सतह और पानी दोनों पर चल सकता है।

बीएमपी असल में रूसी रक्षा प्रणाली है। जिसे इंफेंट्री कॉम्बैट व्हीकल और बीएमपी भी कहते हैं, जो एंफीबियस कैटेगरी का है यानी सतह और पानी दोनों पर चल सकता है।

डीआरडीओ ने स्वदेशी तकनीक से चार क्रू वाले अर्जुन टैंक को तैयार किया है। यह टैंक अधिकतम 70 किमी प्रति घंटे की गति से दौड़ सकता है। इसकी 120 एमएम गन एक मिनट में छह राउंड तक फायर कर सकती है।

डीआरडीओ ने स्वदेशी तकनीक से चार क्रू वाले अर्जुन टैंक को तैयार किया है। यह टैंक अधिकतम 70 किमी प्रति घंटे की गति से दौड़ सकता है। इसकी 120 एमएम गन एक मिनट में छह राउंड तक फायर कर सकती है।

आवाज से ही लड़ाकू विमान उड़ाने की तकनीक विकसित कर ली गई है। एचएएल ने वॉयस एक्टिविटेड कमांड सिस्टम वाले सुखोई एसयू 30 विमान की कॉकपिट बनाई है। इस प्रोटोटाइप की सफल टेस्टिंग भी पूरी कर ली है।

आवाज से ही लड़ाकू विमान उड़ाने की तकनीक विकसित कर ली गई है। एचएएल ने वॉयस एक्टिविटेड कमांड सिस्टम वाले सुखोई एसयू 30 विमान की कॉकपिट बनाई है। इस प्रोटोटाइप की सफल टेस्टिंग भी पूरी कर ली है।

अंतरिक्ष में दुश्मन के सेटेलाइट को मार गिराने वाली डीआरडीओ की यह एंटी सेटेलाइट मिसाइल है। भारत यह तकनीक हासिल करने वाला चौथा देश बन गया है। एक्सपो में दुनिया भर की सबसे अधिक नजर ए-सेट पर ही होगी।

अंतरिक्ष में दुश्मन के सेटेलाइट को मार गिराने वाली डीआरडीओ की यह एंटी सेटेलाइट मिसाइल है। भारत यह तकनीक हासिल करने वाला चौथा देश बन गया है। एक्सपो में दुनिया भर की सबसे अधिक नजर ए-सेट पर ही होगी।

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