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इस देश में कपड़े उतारकर डॉक्टर्स कर रहे कोरोना मरीजों का इलाज, अश्लीलता नहीं, इसमें छिपा है दर्द और गुस्सा
हटके डेस्क: देखते ही देखते चीन के वुहान से शुरू हुए कोरोना वायरस ने आज पूरी दुनिया में तबाही मचा दी है। इस वायरस से अभी तक दुनिया में कुल संक्रमितों की संख्या 30 लाख पार कर चुकी है। साथ ही मौत का आंकड़ा भी 2 लाख 11 हजार के पार जा चुका है। इस वायरस से लड़ने के लिए अभी तक कोई दवा नहीं बनी है। सिर्फ संक्रमित व्यक्ति से दूरी ही बचाव का एक तरीका है। ऐसे में कई देशों को लॉक डाउन किया गया है। सभी अपने घरों में बंद हैं लेकिन जिन लोगों को कोरोना वॉरियर्स का नाम दिया गया है, वो जान जोखिम में डालकर कोरोना से लड़ रहे हैं। लेकिन इन वॉरियर्स को उचित सुविधा ना मिलने के कारण जान से हाथ धोना पड़ रहा है। कई देशों में कई डॉक्टर्स खुद वायरस से संक्रमित हो गए हैं। अब जर्मनी के डॉक्टर्स ने सरकार से उचित पीपीई किट्स की डिमांड करते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू किया है। लेकिन इस विरोध का तरीका काफी अलग है। देखिए, कैसे यहां डॉक्टर्स प्रदर्शन कर रहे हैं...

पाकिस्तान में कई डॉक्टर्स ने कोरोना से लड़ने के लिए उचित प्रोटेक्टिव सूट ना मिलने के कारण अपनी नौकरी छोड़ दी। लेकिन इसके उलट जर्मनी में डॉक्टरों ने इसका अलग ही ढंग निकाला।
जर्मन फ्रंटलाइनर्स ने अपनी नेकेड सेल्फी सोशल मीडिया पर शेयर की है। उनका कहना है कि जब उन्हें पीपीई किट्स नहीं मिलते हैं तो कुछ ऐसा ही फील होता है।
जर्मनी में डॉक्टर्स प्रोटेक्टिव सूट और इक्विपमेंटकी कमी के विरोश में न्यूड फोटो खींचकर पोस्ट कर रहे हैं।
एक डॉक्टर ने टॉयलेट पेपर के पीछे बैठकर और मास्क लगाकर फोटो क्लिक करवाया। यहां पीपीई किट के उत्पादन को बढ़ा दिया गया है। लेकिन फिर भी डॉक्टर्स को कमी का सामना करना पड़ रहा है।
इस ग्रुप के डॉक्टर्स का कहना है कि जनवरी में जब पहला मामला सामने आया था, तब से ही किट्स की डिमांड की जा रही है। जो अब तक पूरी नहीं की गई है। मेडिकल टीम ने फ़िल्टर मास्क, गॉगल्स, ग्लव्स की डिमांड की, जो काफी कम सप्लाई की गई है।
ऐसे में अब इन डॉक्टर्स ने इस तरह विरोध जताया है। उनका कहना है कि जब बिना इक्विपमेंट के उन्हें कोरोना मरीजों का इलाज करना पड़ता है, तो वैसा ही लगता है जैसे बिना कपड़े पहने इंसान को लगता है।
यहां पीपीई किट्स की भारी कमी हो गई है। ऐसे में डॉक्टर्स के इस ग्रुप ने सिर्फ स्टेथस्कोप के साथ फोटो क्लिक करवाई।
विरोध के इस तरीके को सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है। यहां अप्रैल के शुरुआत में मास्क बर्लिन से भेजा गया था, जिसे बैंकॉक एयरपोर्ट पर रोक दिया गया। डॉक्टर्स का कहना है कि कोरोना संक्रमितों का इलाज बिना पीपीई किट के करना काफी खतरनाक है।
जर्मनी में हाल के दिनों में कोरोना संक्रमितों की संख्या में तेजी आई है। 14 मार्च के बाद से ममलों में थोड़ी कमी तो आई है लेकिन खतरा टला नहीं है। जर्मनी में लॉकडाउन में ढील दी गई है। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये खतरनाक है। इससे आने वाले समय में अचानक संक्रमण बढ़ जाएगा।
वहीं मास्क और पीपीई किट की कमी के कारण डॉक्टर्स को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। यहां बसों में मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया है।
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