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  • ये हैं अमेरिका से लेकर यूरोप, अरब देश और भारत में हुए 6 बड़े जनआंदोलन, जानिए पूरी कहानी

ये हैं अमेरिका से लेकर यूरोप, अरब देश और भारत में हुए 6 बड़े जनआंदोलन, जानिए पूरी कहानी

अमेरिकी संसद में ट्रम्प समर्थकों के कब्जे और हिंसा ने दुनिया को चौंका दिया है। खुद को 'बॉस' के तौर पर दुनिया में पेश करने वाले अमेरिका में लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को तहस-नहस करने को घटनाक्रम हुआ, उसने भारत सहित तमाम देशों को अलर्ट कर दिया है। दुनिया में पहले भी ऐसे जनआंदोलन होते रहे हैं। इनमें से कुछ सकारात्मक बदलावों के लिए थे, तो कुछ सिर्फ अराजकता का प्रतीक। भारत में भी इस समय ऐसा ही एक किसान आंदोलन चल रहा है। आइए जानते हैं दुनिया के 6 बड़े जनआंदोलनों के बारे में....

4 Min read
Author : Asianet News Hindi
| Updated : Jan 07 2021, 08:21 PM IST
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पहले जानते हैं दुनिया में लोकतंत्र के हाल: 
दुनिया में लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं की स्थापना में जन आंदोलनों का ही योगदान रहा है। इस समय दुनिया के 96 देशों में लोकतांत्रिक सरकार है। अगर 1900 से अब तक की बात करें, तो तब 11 देश मे लोकतंत्र था। 1920 में 20, 1974 में 74 और 2006 में 86 देशों में लोकतांत्रिक सरकारें बनीं। लेकिन आज भी 21 देश तानाशाही में जी रहे हैं। 28 देशों में तानाशाही और लोकतंत्र का मिला-जुला शासन है। अब देखते हैं दुनिया के 6 बड़े आंदोलनों की कहानी...
 

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याद रहेगा 'हल्ला बोल'
ट्रम्प समर्थकों का उत्पात
कहां-यूएस कैपिटल हिल(संसद भवन)
अमेरिका
कब-हंगामा जारी है
क्यों-बाइडेन V/s ट्रम्प

अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में जो बाइडेन से हारे डोनाल्ड ट्रम्प लगातार बौखलाए हुए हैं। वे अपनी हार स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। वे चुनाव में धांधली का आरोप लगाकर अनर्गल बयानबाजियां कर रहे हैं। नतीजा, उनके समर्थकों ने यूएस कैपिटल (अमेरिकी संसद भवन) पर हमला बोल दिया। लिहाजा, अमेरिका में 21 जनवरी तक पब्लिक इमरजेंसी लगानी पड़ी है। बता दें अमेरिकी संसद में 206 साल बाद फिर से हिंसा हुई। इससे पहले 24 अगस्त, 1814 को ब्रिटेन ने अमेरिका पर हमला किया था। इसमें अमेरिकी सेना हार गई थी। तब ब्रिटिश सैनिकों ने यूएस कैपिटल में आग लगा दी थी।

 बहरहाल, अमेरिकी कांग्रेस ने बाइडेन की जीत पर मुहर लगा दी है। ट्रम्प ने भी हार स्वीकारते हुए 20 जनवरी को पद छोड़ने का ऐलान कर दिया है।

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याद रहेगा 'हल्ला बोल'
किसान आंदोलन
कहां-भारत
कब-अभी चल रहा
क्यों-तीन कृषि कानूनों के खिलाफ
कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग का विरोध

भारत में इस समय देशभर के किसान (खासकर पंजाब और हरियाणा) दिल्ली बॉर्डर पर धरना-प्रदर्शन पर डटे हुए हैं। वे केंद्र के तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। ये तीन बिल हैं-
1. कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन व सरलीकरण) कानून-2020
2. कृषक (सशक्तीकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार कानून-2020
3. आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून-2020

47

याद रहेगा 'हल्ला बोल'
नागरिक अधिकार आंदोलन
कहां- अमेरिका
कब-1955-68
क्यों- अफ्रीकी-अमेरिकी लोगों के खिलाफ नस्लीय भेदभाव को गैरकानूनी करना और दक्षिणी देशों में वोटिंग का अधिकार

अमेरिका में नस्लीय हिंसा और भेदभाव की घटनाएं अब भी सामने आती रहती हैं। इस आंदोलन के तहत अहिंसात्मक विरोध और नागरिक अवज्ञा ने सरकार के सामने संकट खड़ा कर दिया था। यह आंदोलन सिर्फ नस्लीय भेदभाव ही नहीं, स्वतंत्रता, सम्मान, गरिमा, आर्थिक और सामाजिक समानता जैसे बुनियादी मुद्दों पर एक बड़ा हल्ला बोल था।

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याद रहेगा 'हल्ला बोल'
बर्लिन वॉल गिराई
कहां-जर्मनी
कब-1989
क्यों-दूसरे विश्व युद्ध के बाद इस दीवार ने जर्मनी को दो हिस्सों में बांट दिया था

बर्लिन की दीवार का निर्माण 13 अगस्त, 1961 को शुरू हुआ था। इसे 9 नवंबर, 1989 को तोड़ दिया गया। इसे तोड़ने में 2 साल का समय लगा था। दूसरे विश्व युद्ध के बाद इस दीवार का निर्माण हुआ था। करीब 28 साल तक जर्मनी इस दीवार के कारण दो हिस्सों में बंटा रहा। यह दीवार 155 किलोमीटर लंबी थी। इस दीवार ने बर्लिन शहर को पूर्वी और पश्चिमी दो टुकड़ों में बांट रखा था।

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याद रहेगा 'हल्ला बोल'
अरब क्रांति
कहां-मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका
कब-2010 से 2012
क्यों- मिस्र, सीरिया, लीबिया और यमन में तानाशाही के खिलाफ और लोकतंत्र की स्थापना के लिए

इस क्रांति की शुरुआत 17 दिसंबर, 2010 को ट्यूनीशिया से हुई थी। इसके बाद मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में लोकतांत्रिक परिवर्तन की लहर जागी थी। इस क्रांति में मिस्र, सीरिया, लीबिया और यमन सहित तमाम अरब देश चपेट में आए। ट्यूनीशिया के तानाशाह अल आबेदीन बेग को सत्ता छोड़नी पड़ी। 11 फरवरी, 2011 को मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक ने भी भारी हिंसा के बाद कुर्सी छोड़ दी। यमन में अली अब्दुल्लाह सलेह का तीन दशकों का तानाशाही शासन 2012 में समाप्त हुआ। लेकिन इस क्रांति के सकारात्मक परिणाम नहीं निकले। यमन, मिस्र, सीरिया, लीबिया आदि सभी देश शिया-सुन्नी की लड़ाई में बर्बाद हो गए हैं।

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याद रहेगा 'हल्ला बोल'
अन्ना आंदोलन
कहां-भारत
कब-2011
क्यों- जनलोकपाल विधेयक के लिए समाजसेवी अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर दिया था धरना

5 अप्रैल 2011 को समाजसेवी अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे पर जनलोकपाल विधेयक लाने की मांग को लेकर यह जनआंदोलन छेड़ा था। इस आंदोलन ने देश की राजनीति को बदल दिया। अरविंद केजरीवाल दिल्ली पर काबिज हुए, लेकिन अन्ना दरकिनार हो गए।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति, ग्लोबल इकोनॉमी, सुरक्षा मुद्दों, टेक प्रगति और विश्व घटनाओं की गहराई से कवरेज पढ़ें। वैश्विक संबंधों, अंतरराष्ट्रीय बाजार और बड़ी अंतरराष्ट्रीय बैठकों की ताज़ा रिपोर्ट्स के लिए World News in Hindi सेक्शन देखें — दुनिया की हर बड़ी खबर, सबसे पहले और सही तरीके से, सिर्फ Asianet News Hindi पर।

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