US Tariff on India: फरवरी 2025 से सितंबर 2026 तक कब-कब बदला टैरिफ? पूरी टाइमलाइन
India US trade War: भारत-अमेरिका टैरिफ विवाद की पूरी टाइमलाइन जानें। फरवरी 2025 के 26% टैरिफ से सितंबर 2026 में 100% तक शुल्क के प्रावधान और रूस के तेल से जुड़े पूरे घटनाक्रम को समझें।

डेढ़ साल में कई बार बदले नियम, अब 100% तक शुल्क का खतरा
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में पिछले करीब डेढ़ साल से एक शब्द बार-बार सामने आया है—टैरिफ। फरवरी 2025 में शुरू हुआ यह विवाद कई पड़ाव पार करते हुए सितंबर 2026 में ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ का रास्ता खुलता दिख रहा है। भारत भी इसके संभावित दायरे में है।

फरवरी 2025: शुरू हुआ 'पारस्परिक' टैरिफ का खेल
फरवरी 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसी टैरिफ व्यवस्था का ऐलान किया, जिसमें दूसरे देशों से अमेरिकी सामान पर लगने वाले शुल्क के आधार पर जवाबी शुल्क लगाने की बात थी। इसी दौरान भारत और अमेरिका ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी रखा।
अप्रैल 2025: 26% टैरिफ का ऐलान
अप्रैल में अमेरिका ने कई भारतीय उत्पादों पर 26 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की। हालांकि, इसके अमल पर 90 दिनों की रोक लगा दी गई। इस अवधि में भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर 10 फीसदी शुल्क लागू रहा।
जुलाई-अगस्त 2025: टैरिफ 50% तक पहुंचा
जुलाई 2025 में भारतीय उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाकर 25 फीसदी किया गया। अगले महीने अगस्त में यह बढ़कर 50 फीसदी हो गया। भारत ने इसे अनुचित बताते हुए राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा उठाया। इसी दौरान रूस से भारत की तेल खरीद भी दोनों देशों के बीच बातचीत का अहम विषय बनी रही।
फरवरी-जुलाई 2026: फिर बदली टैरिफ व्यवस्था
फरवरी 2026 में अमेरिका ने भारतीय आयात पर शुल्क घटाकर 18 फीसदी करने का फैसला किया। इसके साथ रूस से तेल खरीद कम करने और व्यापारिक बाधाएं घटाने जैसी अपेक्षाएं भी सामने आईं। बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने भारत समेत कई देशों के आयात पर अस्थायी 10 फीसदी शुल्क की घोषणा की। जुलाई में 150 दिनों की अवधि खत्म होने के बाद फिर 10 फीसदी टैरिफ लागू करने की घोषणा हुई।
सितंबर 2026: 100% तक टैरिफ का नया मोड़
सितंबर 2026 में अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने वाले प्रतिबंध संबंधी विधेयक को मंजूरी दी। इसके तहत रूस के तेल और गैस के बड़े खरीदार देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का रास्ता खुलता है। भारत ने पहले ही चेताया था कि ऐसे कदम द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं। अब भारतीय व्यापार और उद्योग संगठनों के साथ संभावित असर पर काम करने की बात कही गई है।
यानी फरवरी 2025 के 'पारस्परिक टैरिफ' से शुरू हुआ विवाद सितंबर 2026 तक रूस की ऊर्जा खरीद और भू-राजनीतिक दबाव से जुड़ गया है। आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिकी प्रशासन इस प्रावधान का इस्तेमाल किस तरह करता है और भारत इसका जवाब कैसे देता है।
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