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कोरोना की दवा ढूंढ रहे वैज्ञानिकों को मिली सफलता, इस दवा से 48 घंटे में खत्म हो सकता है वायरस!

First Published Apr 5, 2020, 11:14 AM IST
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मेलबर्न. कोरोना वायरस का संक्रमण दुनिया भर में तेजी से बढ़ता जा रहा है। कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या दुनिया भर 12 लाख से ऊपर पहुंच गई है। जबकि 64 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। दुनिया के लिए नासूर बन चुके कोरोना से पार पाने के लिए दुनिया भर के वैज्ञानिक उपचार खोजने में जुटे हुए हैं। चीन, अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों की फौज कोरोना की दवा खोजने में जुटी हुई है। इन सब के बीच एक खबर ने वैज्ञानिकों में उम्मीद की किरण जगाई है। वैज्ञानिकों ने जांच में पाया है कि दुनिया भर में पहले से मौजूद एक दवाई से 48 घंटे के अंदर मानव शरीर में पैदा हुए कोरोना वायरस को मारा जा सकता है। इस खोज के साथ अब वैज्ञानिकों ने इस ओर अपना कदम बढ़ाना शुरू कर दिया है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये रिपोर्ट ‘एंटीवायरल रिसर्च’ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुई है। अध्ययन में दावा किया गया है कि ‘इवरमेक्टिन’ नाम की दवा से वायरस सार्स-सीओवी -2 को 48 घंटे के भीतर कोशिकाओं में बढ़ने से रोक गया है।  (प्रतिकात्मक तस्वीर)

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये रिपोर्ट ‘एंटीवायरल रिसर्च’ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुई है। अध्ययन में दावा किया गया है कि ‘इवरमेक्टिन’ नाम की दवा से वायरस सार्स-सीओवी -2 को 48 घंटे के भीतर कोशिकाओं में बढ़ने से रोक गया है। (प्रतिकात्मक तस्वीर)

मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है, ऑस्ट्रेलिया के मोनाश विश्वविद्यालय से जुड़े काइली वागस्टाफ ने कहा, हमने पाया कि एक खुराक भी 48 घंटों तक सभी वायरल आरएनए को हटा सकती है और 24 घंटे में इसमें काफी कमी आती है।  (प्रतिकात्मक तस्वीर)

मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है, ऑस्ट्रेलिया के मोनाश विश्वविद्यालय से जुड़े काइली वागस्टाफ ने कहा, हमने पाया कि एक खुराक भी 48 घंटों तक सभी वायरल आरएनए को हटा सकती है और 24 घंटे में इसमें काफी कमी आती है। (प्रतिकात्मक तस्वीर)

वैज्ञानिकों ने कहा कि ‘इवरमेक्टिन’ एक मान्यताप्राप्त दवा है, जिसे एचआईवी, डेंगू, इन्फ्लुएंजा और जीका वायरस सहित विभिन्न वायरसों के खिलाफ प्रभावी माना गया है।  (प्रतिकात्मक तस्वीर)

वैज्ञानिकों ने कहा कि ‘इवरमेक्टिन’ एक मान्यताप्राप्त दवा है, जिसे एचआईवी, डेंगू, इन्फ्लुएंजा और जीका वायरस सहित विभिन्न वायरसों के खिलाफ प्रभावी माना गया है। (प्रतिकात्मक तस्वीर)

वागस्टाफ ने हालांकि आगाह किया कि अध्ययन में किए गए परीक्षण प्रयोगशाला के हैं और ये परीक्षण लोगों में किए जाने की आवश्यकता है।  (प्रतिकात्मक तस्वीर)

वागस्टाफ ने हालांकि आगाह किया कि अध्ययन में किए गए परीक्षण प्रयोगशाला के हैं और ये परीक्षण लोगों में किए जाने की आवश्यकता है। (प्रतिकात्मक तस्वीर)

लैब में पास हुआ टेस्ट अब इंसानों में होगी जांचः वागस्टाफ ने कहा, आइवरमेक्टिन व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाती है और इसे एक सुरक्षित दवा माना जाता है। (प्रतिकात्मक तस्वीर)

लैब में पास हुआ टेस्ट अब इंसानों में होगी जांचः वागस्टाफ ने कहा, आइवरमेक्टिन व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाती है और इसे एक सुरक्षित दवा माना जाता है। (प्रतिकात्मक तस्वीर)

प्रयोग कर  रही वैज्ञानिकों की टीम ने कहा, हमें अब यह पता लगाने की जरूरत है कि मनुष्यों में इस्तेमाल की जाने वाली इसकी मात्रा प्रभावी होगी या नहीं, यह अगला कदम होगा।  (प्रतिकात्मक तस्वीर)

प्रयोग कर रही वैज्ञानिकों की टीम ने कहा, हमें अब यह पता लगाने की जरूरत है कि मनुष्यों में इस्तेमाल की जाने वाली इसकी मात्रा प्रभावी होगी या नहीं, यह अगला कदम होगा। (प्रतिकात्मक तस्वीर)

चीन में भी जारी है प्रयोगः चीन के वुहान शहर से शुरू हुए कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए चीनी वैज्ञानिक भी जुटे हुए है। लगातार वह भी परीक्षण कर रहे हैं। इसी क्रम में शनिवार को जानकारी सामने आई थी कि 17 मार्च को कोरोना वायरस कोविड-19 के लिए बनाई गई वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल यानी इंसानों पर परीक्षण शुरू किया था।

चीन में भी जारी है प्रयोगः चीन के वुहान शहर से शुरू हुए कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए चीनी वैज्ञानिक भी जुटे हुए है। लगातार वह भी परीक्षण कर रहे हैं। इसी क्रम में शनिवार को जानकारी सामने आई थी कि 17 मार्च को कोरोना वायरस कोविड-19 के लिए बनाई गई वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल यानी इंसानों पर परीक्षण शुरू किया था।

जिसके बाद अब इस परीक्षण के बेहद पॉजिटिव रिजल्ट सामने आ रहे हैं।इस वैक्सीन को चीन में सबसे बड़ी बायो-वॉरफेयर साइंटिस्ट चेन वी और उनकी टीम ने बनाया है। जिन 108 लोगों पर परीक्षण किया जा रहा था। ये सभी लोग 18 साल से लेकर 60 साल तक की उम्र के हैं।

जिसके बाद अब इस परीक्षण के बेहद पॉजिटिव रिजल्ट सामने आ रहे हैं।इस वैक्सीन को चीन में सबसे बड़ी बायो-वॉरफेयर साइंटिस्ट चेन वी और उनकी टीम ने बनाया है। जिन 108 लोगों पर परीक्षण किया जा रहा था। ये सभी लोग 18 साल से लेकर 60 साल तक की उम्र के हैं।

स्पेन में बढ़ता जा रहा संक्रमणः  प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेझ ने शनिवार रात ऐलान किया कि 14 मार्च से लगाया गया लॉकडाउन 26 अप्रैल तक जारी रहेगा। जरूरत हुई तो इसे और भी बढ़ाया जा सकता है। लॉकडाउन को स्पेन सरकार ने ‘स्टेट अलार्म’ नाम दिया है।

स्पेन में बढ़ता जा रहा संक्रमणः प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेझ ने शनिवार रात ऐलान किया कि 14 मार्च से लगाया गया लॉकडाउन 26 अप्रैल तक जारी रहेगा। जरूरत हुई तो इसे और भी बढ़ाया जा सकता है। लॉकडाउन को स्पेन सरकार ने ‘स्टेट अलार्म’ नाम दिया है।

स्पेन में कोरोना वायरस से मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। स्पेन में कोरोना वायरस से मरने वाले मरीजों की संख्या 11 हजार 947 है जबकि 1 लाख 26 हजार 168 लोग कोरोना पॉजिटिव है। हालांकि राहत भरी खबर है कि 34 हजार 219 लोग कोरोना को मात देकर स्वस्थ हो चुके हैं।

स्पेन में कोरोना वायरस से मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। स्पेन में कोरोना वायरस से मरने वाले मरीजों की संख्या 11 हजार 947 है जबकि 1 लाख 26 हजार 168 लोग कोरोना पॉजिटिव है। हालांकि राहत भरी खबर है कि 34 हजार 219 लोग कोरोना को मात देकर स्वस्थ हो चुके हैं।

इटली में 15 हजार मौतेंः इटली में कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा कम नहीं हो रहा है। यहां अब तक 1 लाख 24 हजार 632 लोग संक्रमित पाए गए हैं। जबकि 15 हजार 362 लोग लोगों की मौत हो चुकी है। चीन के बाद इ़टली में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ने शुरू हुए थे। जिसके बाद इटली में यह हालात उत्पन्न हुए हैं।

इटली में 15 हजार मौतेंः इटली में कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा कम नहीं हो रहा है। यहां अब तक 1 लाख 24 हजार 632 लोग संक्रमित पाए गए हैं। जबकि 15 हजार 362 लोग लोगों की मौत हो चुकी है। चीन के बाद इ़टली में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ने शुरू हुए थे। जिसके बाद इटली में यह हालात उत्पन्न हुए हैं।

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