बहरीन में US Navy Fifth Fleet पर ईरान का बड़ा हमला, IRGC की कार्रवाई में 21 सैनिकों की मौत
Breaking News: बहरीन के मनामा में US नेवी के पांचवें बेड़े पर ईरान के मिसाइल और शहीद-136 ड्रोन हमले की खबर से मिडिल ईस्ट में हलचल मच गई। क्या यह US-ईरान नेवल वॉर की शुरुआत है? और अगर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हुआ तो दुनिया की तेल आपूर्ति का क्या होगा?

Bahrain Naval Base Attack: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। खबरों के मुताबिक, बहरीन के मनामा शहर में मौजूद US नेवी फिफ्थ फ्लीट के मुख्यालय पर ईरान की तरफ से मिसाइल और ड्रोन हमला किया गया है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस हमले में 21 सैनिकों की मौत हुई है, जबकि कई लोग घायल भी बताए जा रहे हैं। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं।
आखिर बहरीन में US Navy Fifth Fleet पर हमला कैसे हुआ?
रिपोर्ट्स के अनुसार, 28 फरवरी 2026 को ईरान की सेना, खासकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक समन्वित हमला किया। इसमें बैलिस्टिक मिसाइलों और Shahed-136 अटैक ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। यह हमला बहरीन के मनामा के जुफैर डिस्ट्रिक्ट में स्थित नेवल सपोर्ट एक्टिविटी बेस पर किया गया, जहां से अमेरिका का पांचवां फ्लीट ऑपरेट करता है।
İranın "Şahed-136" dronu bu gecə Bəhreyndə ABŞ hərbçilərinin yerləşdiyi bildirilən otelə zərbə endirib pic.twitter.com/2JvalrUoXs
— Azadlıq Qəzeti (@azadliq_news) March 8, 2026
सैटेलाइट तस्वीरों और वायरल वीडियो में बेस के अंदर से घना काला धुआं उठता हुआ दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक हमले में कई सैन्य ढांचे जैसे-रडार फैसिलिटी, सर्विस बिल्डिंग और सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचा है।
क्या सच में 21 सैनिक मारे गए? अमेरिका ने क्या कहा?
ईरानी मीडिया और कुछ क्षेत्रीय रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस हमले में 21 अमेरिकी सैनिक मारे गए। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने अलग बयान दिया है। उनका कहना है कि हमले के समय कई सैनिक बंकरों में चले गए थे, इसलिए बेस पर तुरंत बड़े पैमाने पर मौत की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन क्षेत्रीय झड़पों में कुछ सैनिकों के मारे जाने और घायल होने की जानकारी सामने आई है। यही वजह है कि इस घटना को लेकर जानकारी अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
#BREAKING
US's weapons warehouses in Bahrain were targeted pic.twitter.com/A1QwBy90I0— Tehran Times (@TehranTimes79) March 8, 2026
क्या यह “Epic Fury” ऑपरेशन का बदला है?
ईरान ने इस हमले को “सटीक बदला” बताया है। उनके मुताबिक यह कार्रवाई कथित US-Israel संयुक्त ऑपरेशन “Epic Fury” के जवाब में की गई। ईरान का दावा है कि उस ऑपरेशन में उनके कई बड़े नेताओं को निशाना बनाया गया था। इसलिए उन्होंने अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर जवाबी हमला किया।
🇮🇷🔻Iran's FM Abbas Araghchi earlier accused the US of striking an Iranian desalination plant on Qeshm Island (providing water to ~30 villages), saying it "set this precedent, not Iran." Bahrain hosts the US Navy's 5th Fleet HQ, and reports suggest some US strikes on Iran… pic.twitter.com/WNXlAfCPNV
— Aprajita Nafs Nefes 🦋 Ancient Believer (@aprajitanefes) March 8, 2026
इस बयान के बाद से मिडिल ईस्ट में तनाव और ज्यादा बढ़ गया है। तनाव सिर्फ बहरीन तक सीमित नहीं रहा। 6 मार्च 2026 को एक और बड़ी खबर सामने आई। रिपोर्ट्स के अनुसार हिंद महासागर में एक अमेरिकी सबमरीन ने टॉरपीडो से एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया। अगर यह खबर सही साबित होती है तो इसका मतलब है कि दोनों देशों के बीच नौसैनिक टकराव अब खुलकर सामने आने लगा है।
आखिर US Navy Fifth Fleet इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
US Navy का Fifth Fleet मिडिल ईस्ट में अमेरिका की सबसे महत्वपूर्ण नौसैनिक ताकतों में से एक है। यह फ्लीट लगभग 2.5 मिलियन स्क्वायर मील समुद्री क्षेत्र की निगरानी करता है, जिसमें शामिल हैं- फारस की खाड़ी, लाल सागर और अरब सागर। यह फ्लीट होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते से होने वाले वैश्विक व्यापार और तेल सप्लाई को सुरक्षित रखने में बड़ी भूमिका निभाता है। इसके अलावा यह 47 देशों के संयुक्त समुद्री बल (CMF) नाम के गठबंधन को भी मैनेज करता है।
Strait of Hormuz संकट: क्या दुनिया की तेल सप्लाई खतरे में है?
इस पूरे तनाव के बीच सबसे ज्यादा चर्चा Strait of Hormuz को लेकर हो रही है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में वैश्विक तेल सप्लाई गुजरती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, IRGC ने जहाजों को चेतावनी दी है कि उन्हें इस रास्ते से गुजरने की अनुमति नहीं है। बाद में ईरान ने इस स्ट्रेट को बंद करने की धमकी भी दी। कुछ टैंकरों पर पहले ही ड्रोन और मिसाइल हमले होने की खबरें सामने आ चुकी हैं। इसके बाद कई बड़ी शिपिंग कंपनियों ने इस रास्ते से गुजरना रोक दिया है।
क्या अब अमेरिका टैंकरों को सैन्य सुरक्षा देगा?
इस स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने भी बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि सरकार शिपिंग कंपनियों को पॉलिटिकल रिस्क इंश्योरेंस दे सकती है। इसके साथ ही US नेवी टैंकरों को एस्कॉर्ट करने की योजना भी बनाई जा सकती है। बहरीन में हमला, ईरानी युद्धपोत डूबने की खबर, और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बढ़ता संकट-इन सब घटनाओं ने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी है।
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