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Nobel Prize की पूरी कहानी: कैसे शुरू हुआ, कौन देता है-कितनी है प्राइज मनी और भारत के किन लोगों को मिला यह सम्मान
Nobel Prize History: नोबेल पुरस्कार दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक है। जानिए यह पुरस्कार कैसे और किसे मिलता है, कितनी प्राइज मनी दी जाती है और भारत से किन लोगों को यह सम्मान मिला है। इन सभी सवालों के जवाब जानें 10 फोटो स्लाइड में...

Nobel Prize क्या है और इतना खास क्यों है?
नोबेल अवार्ड दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में गिना जाता है। यह उन लोगों और संस्थाओं को दिया जाता है, जिनके काम से इंसानियत को बड़ा फायदा हुआ हो। इसकी शुरुआत अल्फ्रेड नोबेल की इच्छा से हुई थी। नोबेल ने अपनी वसीयत में अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा ऐसे पुरस्कार के लिए रखने की बात कही थी, जो मानवता के लिए सबसे अच्छा काम करने वालों को दिया जाए। पहला नोबेल पुरस्कार 1901 में दिया गया था।

Alfred Nobel कौन थे, जिनके नाम पर पुरस्कार है?
अल्फ्रेड नोबेल का जन्म 1833 में स्वीडन में हुआ था। वह साइंटिस्ट, आविष्कारक और कारोबारी थे। उनका सबसे मशहूर आविष्कार डायनामाइट था। उन्होंने अपने जीवन में बहुत बड़ी संपत्ति बनाई। 1896 में उनकी मौत के बाद उनकी वसीयत सामने आई, जिसमें उन्होंने अपनी संपत्ति से पुरस्कार शुरू करने की इच्छा जताई थी। उनकी मृत्यु 10 दिसंबर 1896 को हुई थी। इसी वजह से हर साल 10 दिसंबर को नोबेल पुरस्कार दिए जाते हैं।
Nobel Prize कितनी श्रेणियों में दिया जाता है?
अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत में मूल रूप से 5 क्षेत्रों का जिक्र था- भौतिकी, रसायन, शरीर और इलाज से जुड़ी खोजें, साहित्य और शांति। बाद में 1968 में अर्थशास्त्र के क्षेत्र में एक अलग पुरस्कार शुरू किया गया। इसे अल्फ्रेड नोबेल की याद में अर्थशास्त्र का पुरस्कार कहा जाता है।
Nobel Prize के लिए किसे और कैसे चुना जाता है?
नोबेल पुरस्कार के लिए कोई इंसान खुद अपना नाम नहीं भेज सकता। अलग-अलग क्षेत्रों के योग्य लोगों को उम्मीदवारों के नाम भेजने के लिए कहा जाता है। इसके बाद संबंधित समितियां मिले हुए नामों और उनके काम की जांच करती हैं। एक्सपर्ट से राय ली जाती है और धीरे-धीरे नामों को कम किया जाता है। आखिर में संबंधित संस्था वोटिंग के जरिए विनर का फैसला करती है। यह फैसला अंतिम होता है।
Nobel Prize के लिए नाम किसे पता चलता है?
नोबेल अवार्ड के लिए किस-किस इंसान का नाम भेजा गया, इसकी जानकारी तत्काल सार्वजनिक नहीं की जाती। कैंडिडेट के नाम और सेलेक्शन से जुड़ी जानकारी को 50 साल तक गुप्त रखा जाता है। यानी आज किसी इंसान का नाम नोबेल के लिए भेजा गया है या नहीं, इसकी आधिकारिक जानकारी आम तौर पर कई दशकों तक सामने नहीं आती। यही वजह है कि हर साल घोषित होने से पहले इंटरनेट पर चलने वाले कई संभावित नाम सिर्फ अटकल होते हैं।
Nobel Prize में क्या-क्या मिलता है?
नोबेल अवार्ड पाने वाले को सोने का मेडल, प्रमाण पत्र और पुरस्कार की रकम दी जाती है। मौजूदा समय में एक पूरे नोबेल पुरस्कार की रकम 1.1 करोड़ स्वीडिश क्रोनर यानी भारतीय रुपए में यह 10.56 करोड़ रुपया होगा। अगर एक पुरस्कार दो या तीन लोगों को मिलता है तो रकम उनके बीच बांटी जाती है।
Nobel Prize कब और कहां दिया जाता है?
नोबेल अवार्ड हर साल 10 दिसंबर को दिए जाते हैं। यह दिन अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि है। भौतिकी, रसायन, शरीर और इलाज से जुड़ी खोजों, साहित्य और अर्थशास्त्र के पुरस्कार स्वीडन के स्टॉकहोम में दिए जाते हैं। वहीं नोबेल शांति पुरस्कार नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में दिया जाता है। विजेताओं को अवार्ड के साथ अपने काम के बारे में लोगों के सामने बोलने का मौका भी मिलता है।
भारत से किन लोगों को Nobel Prize मिला?
भारत में रवींद्रनाथ टैगोर को 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला और वह यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय बने। सी. वी. रमन को 1930 में भौतिकी का नोबेल मिला। इसके बाद मदर टेरेसा को 1979 में शांति का नोबेल, अमर्त्य सेन को 1998 में अर्थशास्त्र का नोबेल और कैलाश सत्यार्थी को 2014 में शांति का नोबेल मिला। अभिजीत बनर्जी को 2019 में अर्थशास्त्र का अवार्ड मिला।
Nobel Prize एक व्यक्ति को कितनी बार मिल सकता है?
एक ही इंसान को अपने जीवन में एक से ज्यादा बार नोबेल प्राइज मिल सकता है। वहीं एक पुरस्कार को अधिकतम तीन लोगों के बीच बांटा जा सकता है। पुरस्कार किसी इंसान के साथ किसी संस्था को भी दिया जा सकता है, खासकर शांति के क्षेत्र में। नोबेल पुरस्कार पाने वाले लोगों को नोबेल विजेता कहा जाता है।
Nobel Prize से जुड़े 5 फैक्ट
1. पहला नोबेल 1901 में दिया गया।
2. अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत में 5 मूल क्षेत्र थे।
3. अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार 1968 में शुरू हुआ।
4. हर साल पुरस्कार 10 दिसंबर को दिए जाते हैं।
5. उम्मीदवारों और सिलेक्शन से जुड़ी जानकारी 50 साल तक सीक्रेट रखी जाती है।
यानी नोबेल पुरस्कार सिर्फ पैसा या मेडल पाने का सम्मान नहीं है, बल्कि दुनिया पर बड़ा असर डालने वाले काम की पहचान है।