Repo Rate में 'Repo' का मतलब क्या होता है? इसका फुल फॉर्म क्या है, RBI की रेपो रेट की आज इतनी ज्यादा चर्चा क्यों है और ये रेट कौन तय करता है? सिंपल तरीके से समझिए...

Repo Rate Full Form: टीवी खोलिए, अखबार पढ़िए या मोबाइल पर न्यूज देखिए, बुधवार 5 अगस्त की सुबह से हर जगह 'RBI के रेपो रेट' की ही चर्चा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की हर मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) के समय यह शब्द सबसे ज्यादा सुनने को मिलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रेपो रेट (Repo Rate) में आखिर 'रेपो' (Repo) क्या होता है, इसका मतलब क्या होता है? हैरानी की बात यह है कि ज्यादातर लोग रेपो रेट का नाम तो जानते हैं, लेकिन इस छोटे से शब्द की फुल फॉर्म और इसका असली मतलब नहीं जानते हैं। आइए बिना किसी भारी-भरकम अर्थशास्त्र के बिल्कुल सिंपल भाषा में इसका मतलब जानते हैं, ताकि आप इसे कभी न भूलें...

रेपो रेट की आज इतनी चर्चा क्यों हो रही है?

आज सुबह 10 बजे RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा RBI की MPC (Monetary Policy Committee) के ताजा फैसलों का ऐलान करने वाले हैं। इस समय रेपो रेट 5.25% पर बनी हुई है और पिछले तीन MPC बैठकों में इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया था। अब सभी की नजर इस बात पर है कि इस बार RBI ब्याज दर में बदलाव करता है या इसे पहले की तरह बरकरार रखता है। यही कारण है कि आज इस शब्द की हर तरफ चर्चा हो रही है।

Repo Rate में 'Repo' का मतलब क्या है?

रेपो (Repo) का फुल फॉर्म Repurchasing Option या Repurchase Agreement होता है। मान लीजिए आपको अचानक पैसों की जरूरत पड़ गई। आप अपने सोने के गहने लेकर सुनार के पास जाते हैं और कहते हैं, 'ये गहने रख लो और मुझे कुछ पैसे दे दो। मैं कुछ दिन बाद ब्याज समेत पैसे लौटाकर अपने गहने वापस ले लूंगा यानी Repurchase कर लूंगा।' ठीक इसी तरह जब किसी बैंक को पैसों की जरूरत पड़ती है, तो वह RBI से कुछ समय के लिए पैसा उधार लेता है। इसके बदले बैंक अपनी सरकारी सिक्योरिटीज (Government Securities) RBI के पास गिरवी रख देता है और बाद में तय समय पर उन्हें वापस खरीद लेता है। इसी प्रक्रिया को रेपो कहा जाता है। यहीं से रेपो रेट शब्द बना है।

रेपो रेट आखिर होती क्या है?

रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर RBI देश के बैंकों को पैसा उधार देता है। मान लीजिए किसी बैंक के पास ग्राहकों को लोन देने के लिए पैसे कम पड़ गए। ऐसे में वह RBI के पास जाता है और वहां से पैसा लेता है। RBI उस पैसे पर जो ब्याज लेता है, वही रेपो रेट कहलाती है। यानी यह आम लोगों के लिए नहीं, बल्कि RBI और बैंकों के बीच होने वाले लेन-देन की ब्याज दर होती है।

रेपो रेट कौन तय करता है?

रेपो रेट का फैसला RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) करती है। इस समिति में कुल 6 सदस्य होते हैं। RBI गवर्नर (अध्यक्ष), RBI के दो अन्य सदस्य और केंद्र सरकार की ओर से नियुक्त तीन बाहरी एक्सपर्ट्स इस कमेटी में होते हैं। सभी सदस्य आर्थिक हालात, महंगाई, विकास दर और दूसरे आंकड़ों को देखकर फैसला लेते हैं।

RBI MPC से अक्सर पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब (FAQs)

Repo की फुल फॉर्म क्या होती है?

Repo की फुल फॉर्म Repurchase Agreement या Repurchase Option मानी जाती है।

Repo Rate कौन तय करता है?

RBI की 6 सदस्यीय Monetary Policy Committee (MPC)।

Repo Rate बढ़ने से क्या होता है?

बैंकों के लिए पैसा महंगा हो सकता है, जिससे लोन की ब्याज दरें बढ़ने की संभावना रहती है।

Repo Rate घटने से क्या फायदा होता है?

लोन सस्ता हो सकता है और कई मामलों में EMI कम होने की संभावना बनती है।