इस बार भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध रथयात्रा 16 जुलाई से शुरू हो चुकी है। इस रथयात्रा से जुड़े अनेक रोचक फैक्ट हैं जिनके बारे में कम ही लोगों को जानकारी है।

Jagannath Temple Facts: भगवान जगन्नाथ का रूप देश के अन्य किसी मंदिरों में विराजमान भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण की मूर्तियों से एकदम अलग है। पुरी के जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ की बड़ी-बड़ी गोल आंखें, अधूरे हाथ-पैर और एकदम अद्भुत स्वरूप हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचता है। खासकर उनकी विशाल आंखों को देखकर अक्सर मन में सवाल आता है कि भगवान जगन्नाथ की आंखें इतनी बड़ी क्यों हैं? आइए जानते हैं, क्या है इसके पीछे का रहस्य...

1. भगवान हर समय अपने भक्तों पर नजर रखते हैं....

मान्यता यह है कि भगवान जगन्नाथ अपनी बड़ी आंखों से पूरी दुनिया, अपने भक्तों पर एक साथ नजर रखते हैं। उनके लिए कोई छोटा-बड़ा, अमीर-गरीब या ऊंच-नीच नहीं है। उनकी नजर सभी पर जैसी है। इसी वजह से उनकी आंखें बिना पलक झपकाए हमेशा खुली दिखती हैं। इसका मैसेज यह है कि भगवान हर वक्त अपने भक्तों की रक्षा और देखभाल करते हैं।

2. श्रीकृष्ण के प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है

वैष्णव परंपरा के अनुसार, जब श्रीकृष्ण ने वृंदावन की रासलीला और राधा के प्रेम को याद किया, तो वे प्रेम और आनंद में खो गए। उस दौरान उनके शरीर की बनावट बदल गया। कहते हैं उसी अवस्था में उनकी आंखें बड़ी और गोल हो गईं।

3. बड़ी आंखें देती हैं समानता का संदेश

भगवान जगन्नाथ को जगत के नाथ भी कहते हैं। मतलब वे पूरी दुनिया के भगवान हैं। उनकी विशाल आंखें इस बात का प्रतीक हैं कि भगवान किसी के साथ भेदभाव नहीं करते। वे हर जीव, हर समाज और हर धर्म के लोगों को समान नजर से देखते हैं। यही वजह है जगन्नाथ धाम को सामाजिक समानता और समरसता का भी प्रतीक मानते हैं।

4. दार्शनिक अर्थ भी बेहद गहरा है

दार्शनिक दृष्टि से भगवान जगन्नाथ की आंखें हमें यह मैसेज देती हैं कि जिंदगी में हमेशा चौकन्ना रहना चाहिए। बिना पलक झपकाए खुली आंखें इस ओर इशारा करती हैं कि भगवान हमेशा सब कुछ देख रहे हैं। इसलिए इंसान को अच्छे कर्म करने चाहिए। सही रास्ते पर चलना चाहिए।

5. पुराणों और परंपराओं में क्या लिखा है?

भगवान जगन्नाथ की पूजा का जिक्र कई प्राचीन ग्रंथों में भी है। स्कंद पुराण के उत्कल खंड में नीलमाधव और भगवान जगन्नाथ की स्थापना का जिक्र है। इसमें भगवान के भव्य स्वरूप के बारे में भी लिखा है। ब्रह्म पुराण, पद्म पुराण और नारद पुराण में भी भगवान जगन्नाथ की महिमा, पुरी धाम और उनकी पूजा को लेकर जिक्र है। गौड़ीय वैष्णव परंपरा में उनकी बड़ी आंखों को श्रीकृष्ण के प्रेम, करुणा और विशाल नजर से सभी को देखने वाला बताया गया है।

6. क्यों नहीं झपकती भगवान की आंखें?

भगवान जगन्नाथ की आंखों में पलकें नहीं हैं। इसका अर्थ यह है भगवान कभी सोते नहीं हैं। वे हर वक्त अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। पूरी दुनिया की देखभाल करते हैं। इस वजह से उनकी आंखें हमेशा खुली रहती हैं।


कॉन्टेन्ट सोर्सः स्कंद पुराण (उत्कल खंड), ब्रह्म पुराण, पद्म पुराण, नारद पुराण, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन, गौड़ीय वैष्णव परंपरा पर आधारित।